14kg vs 10kg Cylinder Rumor: पिछले कुछ दिनों से देश में रसोई गैस (LPG) को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और डर का माहौल बना हुआ था।
सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि सरकार अब 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की जगह सिर्फ 10 किलो गैस भरकर देगी।
लेकिन अब केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय ने इन सभी बातों पर विराम लगा दिया है।
अफवाहों पर न दें ध्यान: मंत्रालय की सफाई
पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने स्पष्ट रूप से कहा है कि 14.2 किलो वाले सिलेंडर में कटौती की कोई योजना नहीं है।
उन्होंने जनता से अपील की है कि वे ऐसी किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें।
मंत्रालय के अनुसार, देश में घरेलू गैस की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और घबराने की कोई बात नहीं है।
Indian oil companies are reportedly exploring contingency measures that could directly affect household LPG usage.
Comapnies are reportedly considering supplying only 10 kg of LPG in the standard 14.2 kg domestic cylinders as a temporary step to manage supply shortages.  pic.twitter.com/6fMogn3vVE
— Peek TV (@PeekTV_in) March 24, 2026
अक्सर जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई तनाव होता है, तो लोग डर के मारे एडवांस बुकिंग शुरू कर देते हैं।
सरकार ने बताया कि पिछले दिनों इसी डर (पैनिक बुकिंग) की वजह से बुकिंग का आंकड़ा 88 लाख तक पहुंच गया था, लेकिन अब स्थिति सुधर रही है और यह घटकर 50 लाख के करीब आ गया है।

होर्मुज रूट से आ रही है खुशखबरी
भारत के लिए राहत की एक बड़ी खबर समुद्र के रास्ते से आई है।
शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पार करके दो बड़े एलपीजी टैंकर भारत के लिए निकल चुके हैं।
इन दोनों जहाजों में करीब 92,700 मीट्रिक टन गैस है।
इससे पहले भी मार्च के महीने में लगातार सप्लाई जारी रही है:
- 16 मार्च: शिवालिक जहाज 46 हजार टन गैस लेकर गुजरात पहुंचा।
- 17 मार्च: नंदा देवी जहाज भी इतनी ही मात्रा में गैस लेकर आया।
- 18 मार्च: जग लाडकी टैंकर से कच्चा तेल भारत पहुंचा।
इन जहाजों के आने से यह साफ है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मुस्तैद है।

सप्लाई सुधारने के लिए पाइप गैस पर जोर
सरकार सिर्फ सिलेंडर पर निर्भर नहीं रहना चाहती।
पिछले 21 दिनों के भीतर देश में करीब 3.5 लाख नए घरों और दुकानों में पाइप वाली गैस (PNG) पहुंचाई गई है।
इससे सिलेंडर की डिमांड कम होगी और जरूरतमंदों को समय पर गैस मिल सकेगी।
इसी कड़ी में सरकार ने एक सख्त नियम भी बनाया है—अगर आपके घर में पाइप गैस (PNG) का कनेक्शन है, तो आपको अपना एलपीजी सिलेंडर सरेंडर करना होगा।
अब पाइप गैस इस्तेमाल करने वाले लोग सिलेंडर रिफिल नहीं करा पाएंगे।

राज्यों को मिला अधिकार और प्रवासियों की चिंता
कमर्शियल गैस (जो होटलों और फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होती है) को लेकर भी सरकार ने लचीला रुख अपनाया है।
अब कमर्शियल गैस का 50% कोटा राज्य सरकारों को दे दिया गया है।
राज्य सरकारें तय कर सकती हैं कि वे अपने इलाके के ढाबों, होटलों या डेयरी यूनिट्स को कितनी गैस देंगी।
साथ ही, सरकार ने प्रवासी मजदूरों का भी ख्याल रखा है।
राज्यों से कहा गया है कि वे 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर (FTL) का इंतजाम करें ताकि मजदूरों को खाना बनाने में दिक्कत न आए।

आखिर क्यों पैदा हुआ यह संकट?
गैस और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई में दिक्कत के पीछे दो मुख्य कारण हैं:
- कतर के प्लांट पर हमला: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण कतर का ‘रास लफ्फान’ प्लांट, जो दुनिया का 20% गैस सप्लाई करता है, फिलहाल बंद है।
- होर्मुज का रास्ता: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ एक छोटा सा समुद्री रास्ता है जिससे दुनिया का 20% तेल गुजरता है। ईरान के साथ युद्ध जैसी स्थिति के कारण यह रास्ता असुरक्षित हो गया है। भारत अपनी 50% से ज्यादा गैस और तेल इसी रास्ते से मंगाता है।
बुकिंग के नए नियम याद रखें
सप्लाई को मैनेज करने के लिए सरकार ने बुकिंग के नियमों में कुछ बदलाव किए हैं:
- शहरों में: एक सिलेंडर मिलने के 25 दिन बाद ही आप दूसरा सिलेंडर बुक कर पाएंगे।
- गांवों में: यह समय सीमा 45 दिन रखी गई है।
सरकार की इन कोशिशों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टैंकरों की रवानगी से यह साफ है कि आने वाले दिनों में गैस की कोई कमी नहीं होगी।
जनता को सलाह दी जाती है कि वे जरूरत के हिसाब से ही बुकिंग करें और अफवाहों से बचें।
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