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अमीर राज्यों की नई लिस्ट: दिल्ली नंबर 1, क्या Top 10 में है यूपी-बिहार और मध्यप्रदेश?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Richest States in india: भारत विविधता का देश है। यहाँ हर राज्य की अपनी संस्कृति, भाषा और खान-पान है।

लेकिन जब बात जेब की आती है, यानी ‘प्रति व्यक्ति आय’ की, तो तस्वीर काफी अलग नजर आती है।

अक्सर लोग समझते हैं कि जिस राज्य की अर्थव्यवस्था (GDP) सबसे बड़ी है, वही सबसे अमीर है, लेकिन असलियत ‘प्रति व्यक्ति शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद’ (NSDP) के आंकड़ों में छिपी होती है।

RBI की हालिया ‘हैंडबुक 2024-25’ के आंकड़ों ने इस बात को साफ कर दिया है कि आबादी और अर्थव्यवस्था के कुल आकार के मुकाबले, प्रति व्यक्ति होने वाली औसत कमाई के मामले में छोटे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश बाजी मार रहे हैं।

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दिल्ली ने मारी बाजी: सबसे ऊपर है देश की राजधानी

इस लिस्ट में सबसे चौंकाने वाला नाम किसी बड़े राज्य का नहीं, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली का है।

आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत का सबसे अमीर हिस्सा है।

यहाँ की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय ₹4,93,024 है।

इसका सीधा मतलब यह है कि दिल्ली में रहने वाला एक औसत व्यक्ति साल भर में करीब 5 लाख रुपये कमाता है।

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दिल्ली एक व्यापारिक और प्रशासनिक केंद्र है, जिसका फायदा यहाँ के नागरिकों की आय में साफ दिखता है।

दक्षिण भारत का दबदबा

दिल्ली के बाद अगर हम टॉप राज्यों पर नजर डालें, तो दक्षिण भारतीय राज्यों का दबदबा देखने को मिलता है:

  1. तेलंगाना: ₹3.87 लाख की वार्षिक आय के साथ यह दूसरे स्थान पर है।
  2. कर्नाटक: ₹3.80 लाख के साथ तीसरे पायदान पर है।

  3. तमिलनाडु: ₹3.61 लाख के साथ चौथे स्थान पर बना हुआ है।

Tirupati Balaji Temple

 

हैरानी की बात यह है कि महाराष्ट्र, जिसकी कुल अर्थव्यवस्था भारत में सबसे बड़ी है, प्रति व्यक्ति आय के मामले में ₹3.09 लाख के साथ इन राज्यों से पीछे है।

हरियाणा और उत्तराखंड का शानदार प्रदर्शन

उत्तर भारत में हरियाणा ₹3.53 लाख की प्रति व्यक्ति आय के साथ काफी मजबूत स्थिति में है।

वहीं पहाड़ी राज्य उत्तराखंड ने भी चौंकाया है, जहाँ की औसत वार्षिक आय ₹2.74 लाख दर्ज की गई है।

केरल (₹3.08 लाख), पंजाब (₹2.21 लाख) और हिमाचल प्रदेश (₹2.56 लाख) भी अपने कुल आकार के मुकाबले प्रति व्यक्ति आय के मामले में मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं।

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इसके अलावा पुड्डुचेरी और आंध्र प्रदेश भी टॉप 10 की लिस्ट में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे हैं।

भारत के टॉप 10 सबसे अमीर राज्य

क्रमांक राज्य का नाम प्रति व्यक्ति आय
1 दिल्ली 493024 रुपये
2 तेलंगाना 387623 रुपये
3 कर्नाटक 380906 रुपये
4 तमिलनाडु 361619 रुपये
5 हरियाण 353182 रुपये
6 महाराष्ट्र 309340 रुपये
7 केरलम 308338 रुपये
8 पुडुचेरी 281478 रुपये
9 उत्तराखंड 274064 रुपये
10 आंध्र प्रदेश 266240 रुपये

यूपी और बिहार की चिंताजनक स्थिति

अब बात करते हैं उन राज्यों की, जिनकी आबादी सबसे ज्यादा है।

उत्तर प्रदेश और बिहार, जो देश की राजनीति और श्रम शक्ति में बड़ा योगदान देते हैं, आर्थिक समृद्धि के पैमाने पर काफी पीछे रह गए हैं।

1. बिहार: यहाँ की स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण है। बिहार की प्रति व्यक्ति आय केवल ₹69,321 है, जो देश में सबसे कम है।

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2. उत्तर प्रदेश: यूपी की स्थिति बिहार से थोड़ी बेहतर है, लेकिन राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है। यहाँ एक व्यक्ति की औसत वार्षिक आय ₹1,08,572 है।

इन राज्यों में बड़ी जनसंख्या और औद्योगिक पिछड़ापन प्रति व्यक्ति कम आय का मुख्य कारण माना जाता है।

मध्य प्रदेश का हाल

मध्य प्रदेश की बात करें तो यहाँ का कुल उत्पादन (GSDP) करीब 15 लाख करोड़ रुपये है, जो दिखने में काफी बड़ा लगता है।

लेकिन जब इसे राज्य की कुल जनसंख्या में बांटा जाता है, तो एक व्यक्ति के हिस्से में साल भर की कमाई सिर्फ ₹1.52 लाख ही आती है।

यह दिखाता है कि राज्य का कुल उत्पादन तो बढ़ रहा है, लेकिन आम आदमी की निजी संपत्ति में उतनी तेजी से इजाफा नहीं हो रहा है।

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यह आंकड़े साफ करते हैं कि केवल राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार (GDP) बड़ा होना काफी नहीं है।

असली विकास तब माना जाता है जब उस आर्थिक तरक्की का फायदा राज्य के हर नागरिक को मिले और उनकी व्यक्तिगत आय बढ़े।

दिल्ली और दक्षिण के राज्यों ने इस मामले में लंबी छलांग लगाई है, जबकि उत्तर भारत के बड़े राज्यों को अभी लंबा सफर तय करना है।

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