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समंदर में बारूद बिछाकर लोकेशन भूला IRGC, अब चाहकर भी हॉर्मुज स्ट्रेट नहीं खोल पाएगा ईरान!

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Hormuz mines location lost: मिडिल ईस्ट में एक महीने से जारी भीषण जंग के बीच, ईरान और अमेरिका ने दो हफ्तों के सीजफायर (युद्धविराम) का ऐलान तो कर दिया है, लेकिन असली मुसीबत अभी टली नहीं है।

दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग, ‘हॉर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz), जिसे ईरान ने युद्ध के दौरान बंद कर दिया था, उसे फिर से खोलना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।

अमेरिका ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है कि ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने इस रास्ते में इतनी बेतरतीब तरीके से समुद्री माइंस (बारूदी सुरंगें) बिछाई हैं कि अब वे खुद उनकी सटीक लोकेशन भूल चुके हैं।

28 फरवरी का वह हमला जिसने सब बदल दिया

इस पूरे विवाद की जड़ 28 फरवरी को हुए उस हमले में है, जिसने पूरी दुनिया को दहला दिया था।

अमेरिका और इजरायल ने एक संयुक्त सैन्य ऑपरेशन के जरिए ईरान के भीतर कई ठिकानों को निशाना बनाया।

इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामनेई समेत कई शीर्ष राजनेताओं और सैन्य कमांडरों की मौत की खबरें आईं।

इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अपनी सबसे घातक चाल चली—’हॉर्मुज स्ट्रेट’ को बंद करना।

क्यों बंद किया हॉर्मुज स्ट्रेट’ 

हॉर्मुज स्ट्रेट वह संकरा समुद्री रास्ता है जहाँ से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और भारी मात्रा में एलपीजी (LPG) गुजरती है।

इसे बंद करने का मतलब था दुनिया की अर्थव्यवस्था की गर्दन दबाना।

ईरान ने अपनी छोटी नावों का इस्तेमाल करके पूरे रास्ते में शक्तिशाली माइंस बिछा दीं, ताकि कोई भी विदेशी जहाज वहां से न गुजर सके।

अमेरिका का दावा: “लोकेशन भूल गया ईरान”

अब जब शांति बहाली के लिए सीजफायर हुआ है, तो पहली शर्त यही थी कि ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह सुरक्षित बनाए और जहाजों के लिए खोल दे।

लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि स्थिति ईरान के नियंत्रण से बाहर हो चुकी है।

दावा किया जा रहा है कि ईरान ने माइंस बिछाते समय कोई प्रॉपर रिकॉर्डिंग या मैपिंग नहीं की।

अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार:

  • बेतरतीब माइनिंग: माइंस को बिना किसी पैटर्न के कहीं भी गिरा दिया गया।
  • तकनीकी कमी: ईरान के पास उन माइंस को वापस खोजने और निष्क्रिय करने की आधुनिक तकनीक की भारी कमी है।
  • प्राकृतिक कारण: समुद्री लहरों और करंट की वजह से कई माइंस अपनी जगह से खिसक कर गहरे या अनजान इलाकों में चली गई हैं।

इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आज कोई जहाज वहां से गुजरता है, तो वह एक ‘सुसाइड मिशन’ जैसा होगा, क्योंकि किसी को नहीं पता कि समंदर की सतह के नीचे बारूद कहां छिपा है।

ईरान की मजबूरी और अराघची का बयान

हैरानी की बात यह है कि ईरान के अपने बयानों से भी इस दावे को मजबूती मिल रही है।

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा कि जलडमरूमध्य को “तकनीकी सीमाओं” को ध्यान में रखते हुए धीरे-धीरे खोला जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘तकनीकी सीमा’ शब्द का इस्तेमाल असल में उसी डर को छिपाने के लिए किया जा रहा है कि ईरान के पास अब उन माइंस का कोई नक्शा नहीं बचा है।

दुनिया पर क्या होगा असर?

हॉर्मुज स्ट्रेट का बंद रहना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी आपदा से कम नहीं है।

भारत, चीन और जापान जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट पर निर्भर हैं, उनके लिए कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

हालांकि सीजफायर की वजह से एक बहुत छोटा और संकरा रास्ता जहाजों के लिए खोला गया है, लेकिन बड़े कार्गो शिप्स और ऑयल टैंकरों के लिए अभी भी यह ‘नो-गो ज़ोन’ बना हुआ है।

कुलमिलाकर सीजफायर तो हो गया, लेकिन हॉर्मुज स्ट्रेट में बिछा बारूद अब एक ऐसा जिन्न बन गया है जो बोतल में वापस जाने को तैयार नहीं है।

अगर अमेरिका का दावा सही है, तो आने वाले हफ्तों में हमें समंदर में माइंस स्वीपिंग (Mines Sweeping) का एक बड़ा और खतरनाक ऑपरेशन देखने को मिल सकता है।

तब तक, दुनिया की धड़कनें इस संकरे जलमार्ग पर टिकी रहेंगी।

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