Khandwa Animal Fat Ghee: मध्य प्रदेश के खंडवा शहर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने न सिर्फ लोगों के होश उड़ा दिए हैं, बल्कि बाजार से घी खरीदने वालों को भी डरा दिया है।
शहर के इमलीपुरा स्थित बेगम पार्क के पास जिला प्रशासन ने छापेमारी कर एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो जानवरों की चर्बी, हड्डियों और खाल का इस्तेमाल कर अवैध रूप से घी तैयार कर रहा था।

गुप्त सूचना पर हुई बड़ी कार्रवाई
प्रशासन को काफी समय से इस इलाके में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी।
पुख्ता जानकारी मिलने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर, तहसीलदार महेश सोलंकी और नगर निगम उपायुक्त सचिन सिटोले ने पशु चिकित्सा विभाग की टीम के साथ अचानक दबिश दी।
जब टीम मौके पर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए।

क्या-क्या मिला मौके पर?
दो अलग-अलग मकानों में चल रहे इस अवैध कारोबार की तलाशी लेने पर प्रशासन को 9 बड़े ड्रम और 69 कनस्तर मिले, जिनमें चर्बी से बना घी भरा हुआ था।
इसके अलावा बड़ी-बड़ी बोरियों में जानवरों की हड्डियां और सूखी खालें ठूंस-ठूंस कर भरी गई थीं।
बदबू और गंदगी के बीच यहाँ ‘मौत का सामान’ तैयार किया जा रहा था।

लाइसेंस की आड़ में काला धंधा
कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद संचालक अनवर कुरैशी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
पूछताछ में उसने बचने की कोशिश की और अधिकारियों को साल 2023 का एक ट्रेड लाइसेंस दिखाया।
यह लाइसेंस केवल ‘अपशिष्ट सामग्री’ (वेस्ट मटेरियल) रखने के लिए था, लेकिन इसकी आड़ में वह घी बनाने का अवैध कारखाना चला रहा था।

लोगों का गुस्सा फूटा
इलाके के लोगों का कहना है कि वे इस फैक्ट्री से आने वाली बदबू और गंदगी की शिकायत कई बार प्रशासन से कर चुके थे, लेकिन कार्रवाई अब जाकर हुई है।
गौर करने वाली बात यह है कि कुछ साल पहले भी इसी इलाके से इसी तरह की चर्बी वाली घी फैक्ट्री पकड़ी गई थी, जिससे साफ होता है कि मिलावटखोरों के हौसले कितने बुलंद हैं।
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय विधायक ने भी मौके का मुआयना किया और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

सैंपल जांच के लिए भेजे गए
पशु विभाग की टीम ने मौके से बरामद घी, चर्बी और हड्डियों के सैंपल लिए हैं।
इन सैंपलों को लैब भेजा जा रहा है ताकि वैज्ञानिक पुष्टि हो सके कि इसमें किन-किन जानवरों के अंगों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

फिलहाल पुलिस अनवर कुरैशी से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह ‘नकली घी’ किन-किन दुकानों या होटलों में सप्लाई किया जा रहा था।
