Beer crisis in MP: मध्य प्रदेश में सूरज की तपिश के साथ ही बियर की डिमांड रॉकेट की रफ्तार से बढ़ गई है, लेकिन अफसोस की बात यह है कि दुकानों के फ्रीजर खाली पड़े हैं।
प्रदेश में इस वक्त बियर का ऐसा अकाल पड़ा है कि शराब ठेकेदारों से लेकर शौकीनों तक, हर कोई परेशान है।
हालात ये हैं कि डिमांड और सप्लाई का गणित पूरी तरह बिगड़ चुका है।

डिमांड 1.40 लाख, सप्लाई सिर्फ 1 लाख से कम
आंकड़ों की जुबानी समझें तो मध्य प्रदेश में हर दिन करीब 1 लाख 40 हजार पेटी बियर की जरूरत है।
लेकिन वर्तमान में सप्लाई का आंकड़ा 1 लाख पेटी के नीचे सिमट गया है। यानी रोजाना 40 से 50 हजार पेटी की भारी कमी बनी हुई है।
शराब ठेकेदारों के लिए अप्रैल से जून तक का समय ‘पीक सीजन’ होता है।
इसी वक्त बियर बेचकर वे अपनी एक्साइज ड्यूटी का बड़ा हिस्सा चुकाते हैं, लेकिन स्टॉक न होने से उन्हें आर्थिक चपत लग रही है।
सोम डिस्टिलरीज का हाथ खिंचना पड़ा भारी
जानकारों का मानना है कि इस संकट के पीछे एक बड़ी वजह सोम डिस्टिलरीज से सप्लाई बंद होना है।
पहले प्रदेश की कुल खपत का लगभग 30 से 35 प्रतिशत हिस्सा इसी कंपनी से आता था।
अब यह सप्लाई पूरी तरह ठप होने से बाजार में बड़ा गैप आ गया है।
गुजरात कनेक्शन और ब्लैक मार्केटिंग का खेल
खबर यह भी है कि बियर की किल्लत के पीछे ‘गुजरात लाइन’ का भी बड़ा हाथ है।
शराब माफियाओं ने अब इंदौर के बजाय नए रूट तलाश लिए हैं, जिससे मध्य प्रदेश के कोटे की बियर अवैध तरीके से गुजरात भेजी जा रही है।
स्थानीय ठेकेदारों का आरोप है कि उनका माल डाइवर्ट हो रहा है, जिससे उन्हें कोटे के मुताबिक स्टॉक नहीं मिल पा रहा।
आबकारी विभाग की कवायद
बढ़ते दबाव को देखते हुए आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने कमान संभाली है।
उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि कम से कम 98 हजार पेटी बियर हर हाल में दुकानों तक पहुंचाई जाए।
प्रदेश के 14 प्रमुख वेयरहाउस (गोदामों) का कोटा तय कर दिया गया है।
ग्वालियर, सिवनी और रतलाम जैसे बड़े वेयरहाउस को रोजाना 5-5 हजार पेटी सप्लाई सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।
