Madras High Court divorce verdict: पति-पत्नी के रिश्तों को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा फैसला सुनाया है।
अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पत्नी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि पति जहां भी नौकरी या किसी अन्य काम से जाए, पत्नी उसके पीछे-पीछे ही चले।
कोर्ट ने इस सोच की तुलना वोडाफोन के प्रसिद्ध विज्ञापन में दिखने वाले उस पग डॉग से की, जो हर जगह अपने मालिक के पीछे चलता रहता था।
पीठ ने कहा कि शादी का मतलब यह कतई नहीं है कि पत्नी अपनी स्वतंत्रता खो दे या पति के हर फैसले के पीछे आंख मूंदकर चले।

क्या था पूरा मामला?
यह मामला तमिलनाडु के एक दंपति का है, जिनकी शादी करीब 34 साल पहले, सितंबर 1992 में हुई थी। इस शादी से उनके चार बच्चे भी हैं।
वक्त के साथ दोनों के रिश्तों में कड़वाहट बढ़ती गई और वे पिछले 16 सालों से एक-दूसरे से पूरी तरह अलग रह रहे थे। वर्तमान में पति की उम्र 67 वर्ष है।
पति का आरोप था कि वह अपनी नौकरी के सिलसिले में तमिलनाडु के शिवगंगा जिले से मुंबई शिफ्ट हो गया था, लेकिन पत्नी उसके साथ जाने के लिए तैयार नहीं हुई।
इसी बात को आधार बनाते हुए और पत्नी पर किसी अन्य पुरुष के साथ अवैध संबंध का आरोप लगाते हुए, पति ने 2014 में शिवगंगा के फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की थी।

फैमिली कोर्ट ने खारिज की थी अर्जी
सितंबर 2021 में फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पति खुद नौकरी के सिलसिले में मुंबई गया था और उसने पत्नी को साथ ले जाने की उचित पहल नहीं की।
फैमिली कोर्ट का मानना था कि पति अपनी ही गलती का फायदा उठाकर तलाक की मांग नहीं कर सकता।
फैमिली कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ पति ने मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट का रुख और समझौते की नाकाम कोशिश
मद्रास हाईकोर्ट में जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस एम.डी. सुमति की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की।
कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट कम करने और समझौते की संभावना तलाशने के लिए उनसे सीधे बातचीत भी की, लेकिन 16 सालों से बनी दूरी और मनमुटाव के कारण समझौते की कोई गुंजाइश नहीं बची थी।
अदालत ने माना कि इतने लंबे समय तक अलग रहने और कड़वाहट के कारण यह रिश्ता पूरी तरह से टूट चुका है।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक अलग रहना और शादी का व्यावहारिक रूप से खत्म हो जाना भी मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है।

जब रिश्ते में सुधार की कोई गुंजाइश न बचे, तो उसे जबरन खींचने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
अवैध संबंध के आरोपों पर कोर्ट की फटकार
पति ने अपनी याचिका में पत्नी पर किसी दूसरे पुरुष के साथ अवैध संबंध रखने का गंभीर आरोप भी लगाया था।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इस आरोप को सीधे तौर पर खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा कि जिस व्यक्ति के साथ अवैध संबंध का दावा किया गया है, उसे इस केस में पक्षकार (पार्टी) बनाया ही नहीं गया।
नियम के मुताबिक ऐसे गंभीर आरोपों में संबंधित व्यक्ति को मामला दर्ज करते समय शामिल करना जरूरी होता है।

इसके बिना लगाए गए आरोप कानून की नज़र में टिक नहीं सकते।
अंतिम फैसला और गुजारा भत्ता
फैमिली कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने तलाक की मंजूरी दे दी।
इसके साथ ही, अदालत ने पति को आदेश दिया कि वह अपनी पत्नी को 7 लाख रुपये का एकमुश्त गुजारा भत्ता (Alimony) प्रदान करे, ताकि उनके बीच का यह विवाद कानूनी तौर पर समाप्त हो सके।
#MadrasHighCourt #DivorceLaw #CourtVerdict #LegalNews #HighCourtDecision #WomenRights
