Maharashtra TET Paper Leak: महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के रद्द होने के पीछे की एक बेहद हैरान करने वाली साजिश का पर्दाफाश हुआ है।
जांच में जुटी ठाणे पुलिस ने मामले की परतें खोलते हुए बताया है कि इस बड़ी धांधली के तार उत्तर प्रदेश के आगरा शहर से जुड़े हुए हैं।
परीक्षा का गोपनीय पेपर किसी टेक हैकिंग या ऑनलाइन लीक के जरिए नहीं, बल्कि बहुत ही अजीब तरीके से जूतों के नीचे छिपाकर बाहर लाया गया था।
3,500 पन्नों की चार्जशीट में बड़ा पर्दाफाश
ठाणे पुलिस ने भिवंडी की स्थानीय अदालत में इस मामले को लेकर 3,500 पन्नों की एक विशाल चार्जशीट दाखिल की है। इसमें इस पूरे घोटाले की पूरी कहानी दर्ज है।
पुलिस के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता है, जिसके खिलाफ पहले से ही ओडिशा में हुए एक अन्य पेपर लीक का मामला दर्ज है।
पुलिस ने बिजेंद्र सहित कुल 18 लोगों को इस केस में आरोपी बनाया है।
इनमें से 16 आरोपियों को पहले ही सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है, जबकि दो आरोपी अशोक साव और प्रकाश मिसाल अभी भी फरार चल रहे हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।
जूते का सोल बना चोरी का जरिया
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र TET का गोपनीय पेपर आगरा की ‘महीम पटरन प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की प्रिंटिंग प्रेस में छापा जा रहा था।
परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो, इसके लिए प्रश्न-पत्रों के चार अलग-अलग सेट तैयार किए गए थे।
15 से 17 जून के बीच, इस प्रिंटिंग प्रेस में काम करने वाले दो मौजूदा कर्मचारियों और एक पूर्व कर्मचारी ने मिलकर एक गहरी साजिश रची।
प्रिंटिंग प्रेस के गेट पर सुरक्षा गार्ड कर्मचारियों की तलाशी तो लेते थे, लेकिन वे कपड़ों की जांच तक ही सीमित रहते थे और जूतों पर किसी का ध्यान नहीं जाता था।
आरोपियों ने सुरक्षा की इसी ढिलाई का फायदा उठाया। उन्होंने प्रश्नपत्र के पन्नों को बहुत बारीक तरीके से मोड़ा और अपने जूतों के सोल के नीचे छिपाकर बाहर ले आए।
आरोपियों ने चारों सेटों के पेपर इसी तरह बाहर निकाल लिए।
₹8 हजार और जमीन के प्लॉट का लालच
इस बेहद गोपनीय काम को अंजाम देने के लिए आरोपियों को सिर्फ ₹8,000 नगद दिए गए थे।
इसके अलावा उन्हें आगरा में जमीन का एक प्लॉट देने का भी बड़ा लालच दिया गया था।
इस घोटाले का भंडाफोड़ तब हुआ जब डीसीपी पवन बंसोड़ को गुप्त सूचना मिली कि भिवंडी के कोंगांव इलाके में तीन लोग TET परीक्षा का असली पेपर किसी को बेचने की कोशिश कर रहे हैं।
पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए मौके पर छापा मारा और तीनों को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से प्रश्न-पत्र के 4 सेट बरामद हुए।
जब महाराष्ट्र स्टेट काउंसिल ऑफ एग्जामिनेशन (MSCE) के अधिकारियों ने इन सेटों की जांच की, तो पुष्टि हुई कि ये वही असली पेपर हैं जो परीक्षा में आने वाले थे। इसके चलते 28 जून को होने वाली परीक्षा को तुरंत रद्द करना पड़ा था।
TET परीक्षा क्या है और क्यों है यह जरूरी?
टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) एक ऐसी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा है, जो यह तय करती है कि कोई उम्मीदवार पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने के लायक है या नहीं।
साल 2010 में नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने इसे शिक्षकों के लिए अनिवार्य कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
शिक्षकों की TET अनिवार्यता को लेकर लंबे समय से कानूनी बहस चल रही थी।
मद्रास हाईकोर्ट ने पुराने शिक्षकों को इसमें कुछ राहत दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर पूरी तरह से रुख स्पष्ट कर दिया है।
अदालत ने निर्देश दिया है कि सेवा में बने रहने और भविष्य में पदोन्नति (Promotion) पाने के लिए हर शिक्षक को TET परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा।
जिन शिक्षकों की नौकरी में 5 साल से अधिक का समय बचा है, वे सभी इस दायरे में आएंगे।
कोर्ट ने परीक्षा पास करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है।
जो शिक्षक इस अवधि में परीक्षा पास करने में असमर्थ रहेंगे, उन्हें या तो इस्तीफा देना पड़ेगा या फिर वे अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement)
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