Mayawati Akash Anand dispute: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के भीतर का पारिवारिक और राजनीतिक तनाव अब एक बड़े संकट के रूप में सामने आ चुका है।
पार्टी की सर्वोच्च नेता मायावती ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए अपने भतीजे आकाश आनंद को बसपा से पूरी तरह निष्कासित कर दिया है।
दिलचस्प और हैरान करने वाली बात यह है कि मायावती ने यह कदम तब उठाया जब आकाश आनंद के ससुर और पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ ने मायावती की शर्त के मुताबिक राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेने की घोषणा कर दी थी।
इसके बावजूद मायावती ने आकाश पर पार्टी से ज्यादा अपने ससुर और पारिवारिक हितों के प्रति निष्ठा रखने का आरोप लगाते हुए उन्हें पार्टी के बाहर का रास्ता दिखा दिया।

ससुर के संन्यास से लेकर निष्कासन तक
इस पूरे सियासी नाटक की शुरुआत तब हुई जब मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी में दोबारा जिम्मेदारी देने के लिए एक बड़ी शर्त रखी।
मायावती का मानना था कि आकाश अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में आकर पार्टी के सिद्धांतों से भटक रहे हैं।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि अगर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास ले लेते हैं, तो आकाश के राजनीतिक भविष्य पर विचार किया जा सकता है।
मायावती की इस शर्त के महज 17 घंटे के भीतर अशोक सिद्धार्थ ने सोशल मीडिया पर बेहद भावुक संदेश जारी करते हुए राजनीति छोड़ने का ऐलान कर दिया।

उन्होंने लिखा कि बहनजी (मायावती) का आदेश उनके लिए सर्वोपरि है और वह पार्टी तथा आंदोलन के हित में राजनीति से दूर हो रहे हैं।
अशोक सिद्धार्थ के इस त्याग के बाद राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा था कि मायावती का गुस्सा शांत हो जाएगा और वे आकाश आनंद को माफ करके पार्टी में उनका पद वापस दे देंगी।
लेकिन इसके विपरीत, मायावती ने गुरुवार सुबह एक लंबा बयान जारी कर आकाश को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से ही आजाद (निष्कासित) कर दिया।

मायावती ने लगाए गंभीर आरोप: कहा- ‘डबल माइंड’ हो गए हैं आकाश
मायावती ने अपने आधिकारिक बयान में आकाश आनंद पर कई कड़े और गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा:
* ससुर से अत्यधिक लगाव: मायावती के अनुसार, आकाश को बसपा और बहुजन आंदोलन की चिंता कम है और अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ से लगाव ज्यादा है।
* सोशल मीडिया पर दूरी: मायावती ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि आकाश ने 3 सितंबर के बाद से उनके ‘X’ (ट्विटर) पोस्ट को रिपोस्ट तक नहीं किया, जबकि इससे पहले वे लगातार ऐसा करके अपनी वफादारी साबित करते थे।
* पारिवारिक स्वार्थ: उन्होंने आरोप लगाया कि अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद दोनों ही पार्टी के बजाय अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों को तरजीह दे रहे हैं।
* ‘डबल माइंडेड’ रवैया: मायावती ने कहा कि जो व्यक्ति दोहरी मानसिकता (डबल माइंड) में हो, वह पार्टी और बहुजन समाज का भला कभी नहीं कर सकता। अगर आकाश पार्टी में स्वतंत्र रहना चाहते हैं, तो उन्हें पूरी तरह आजाद कर दिया जाता है।

पर्दे के पीछे की कहानी: आकाश ने क्यों नहीं मानी मायावती की बात?
पार्टी के भीतर के सूत्रों का कहना है कि अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं और खुद आकाश के पिता आनंद कुमार ने आकाश को मनाने की कोशिश की थी।
उनसे कहा गया था कि वे मायावती की सोशल मीडिया पोस्ट को रिपोस्ट करें और सार्वजनिक रूप से उनका आभार व्यक्त करें।
लेकिन आकाश आनंद इसके लिए तैयार नहीं हुए। आकाश का मानना था कि वे चाहे कुछ भी कर लें, मायावती को उन पर भरोसा नहीं रहेगा।
इसके अलावा, मायावती द्वारा अपने पोस्ट में ससुर-दामाद के रिश्ते को लेकर की गई टिप्पणियों से भी आकाश आहत थे।

आकाश ने स्पष्ट कर दिया कि वे बिना किसी पद के एक साधारण कार्यकर्ता की तरह स्वतंत्र रूप से काम करने को तैयार हैं, लेकिन पद पाने के लिए वे गिड़गिड़ाएंगे नहीं।
जब यह बात मायावती तक पहुंची, तो उनका गुस्सा और बढ़ गया और उन्होंने निष्कासन का फैसला ले लिया।
3 साल में कई बार बदले फैसले: आकाश का घटता-बढ़ता कद
यह पहला मौका नहीं है जब मायावती ने आकाश आनंद को लेकर अपने फैसले बदले हैं। पिछले 3 सालों में आकाश को कई बार पद दिए गए और वापस लिए गए:
* दिसंबर 2023: मायावती ने आकाश आनंद को अपना आधिकारिक उत्तराधिकारी और नेशनल कोऑर्डिनेटर घोषित किया।
* मई 2024: चुनाव प्रचार के दौरान अनुचित बयानबाजी का हवाला देते हुए मायावती ने आकाश से सभी पद छीन लिए और उन्हें ‘अपरिपक्व’ बताया।
* जून 2024: महज 47 दिनों के बाद मायावती ने फिर से फैसला बदला और आकाश को दोबारा उत्तराधिकारी और नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया।

* मार्च 2025: मायावती ने एक बार फिर आकाश को सभी पदों से हटाकर पार्टी से बाहर कर दिया, यह कहते हुए कि वे ससुर के बहकावे में आ गए हैं।
* मई 2025: आकाश को माफी देते हुए चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया।
* अगस्त-सितंबर 2026: पहले 29 अगस्त को आकाश को ‘राष्ट्रीय संयोजक’ बनाया गया, फिर 3 सितंबर को इस पद से हटाया गया और अब आखिरकार पूरी तरह पार्टी से निकाल दिया गया।

कौन संभालेगा अब बसपा का भविष्य? ईशान आनंद पर टिकीं निगाहें
आकाश आनंद के निष्कासन के बाद अब बहुजन समाज पार्टी के अगले नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मायावती अब आकाश के छोटे भाई ईशान आनंद को बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती हैं।
हाल ही में मायावती ने ईशान आनंद को 19 राज्यों की संगठनात्मक समीक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी थी।
हालांकि, उन्हें अभी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्यों से दूर रखा गया है।
माना जा रहा है कि मायावती पहले ईशान के काम करने के तरीके और उनकी क्षमता को परखना चाहती हैं।

यदि ईशान इस परीक्षा में सफल रहते हैं, तो मायावती उन्हें पार्टी का नया राष्ट्रीय संयोजक और अपना उत्तराधिकारी घोषित कर सकती हैं।
बसपा के लिए आगे की राह
उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले बसपा के शीर्ष नेतृत्व में यह खींचतान पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
एक तरफ जहां मायावती पार्टी के अनुशासन और ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के अपने सिद्धांतों से कोई समझौता न करने का संदेश दे रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बार-बार बड़े चेहरों को बाहर करने से पार्टी के संगठन पर असर पड़ सकता है।

अब देखना यह होगा कि क्या ईशान आनंद बसपा को नई दिशा दे पाएंगे या पार्टी का यह अंदरूनी संकट चुनावों में उसके प्रदर्शन को प्रभावित करेगा।
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