Mobile Recharge Price Hike: महंगाई के इस दौर में आम जनता की जेब पर एक और बड़ा बोझ पड़ने वाला है।
दूध, सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान देशवासियों को अब मोबाइल रीचार्ज के लिए भी अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है।
बाजार के जानकारों और सूत्रों की मानें तो बहुत जल्द मोबाइल रिचार्ज प्लान्स की कीमतों में 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
इस संबंध में टेलीकॉम कंपनियां अगले महीने यानी जून में कोई बड़ा फैसला ले सकती हैं।
अगर ऐसा होता है, तो घर के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी का मंथली बजट बिगड़ना तय है।
पेट्रोल-डीजल का मोबाइल रिचार्ज से क्या कनेक्शन है?
सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से मोबाइल का रिचार्ज क्यों महंगा हो रहा है, लेकिन इसके पीछे एक सीधा गणित है।
दरअसल, हमारे फोन में जो नेटवर्क आता है, वह मोबाइल टॉवरों के जरिए आता है।
इन मोबाइल टॉवरों को बिना रुके 24 घंटे चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली और डीजल की जरूरत होती है।
आंकड़ों के मुताबिक, एक मोबाइल टॉवर को चालू रखने के लिए लगभग 40 प्रतिशत निर्भरता बिजली और डीजल पर होती है।
जब भी देश में डीजल के दाम बढ़ते हैं, तो टेलीकॉम कंपनियों के लिए इन टॉवरों को ऑपरेट करने का खर्च (ऑपरेटिंग कॉस्ट) बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।
कंपनियां हर साल इन टॉवरों को चलाने के लिए करोड़ों रुपये का डीजल खरीदती हैं।
ऐसे में डीजल महंगा होने का सीधा असर कंपनियों की जेब पर पड़ता है, और वे इस बढ़े हुए खर्च का बोझ ग्राहकों पर डाल देती हैं।
5G टेक्नोलॉजी ने बढ़ाई मुसीबत
आजकल देश में तेजी से 5G नेटवर्क का विस्तार हो रहा है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि 5G टॉवरों को चलाने के लिए सामान्य टॉवरों के मुकाबले बहुत ज्यादा बिजली और डीजल की जरूरत होती है।
एक तरफ तो 5G के कारण कंपनियों का खर्च पहले ही बढ़ चुका था, और ऊपर से डीजल के दामों में लगी आग ने उनकी मुसीबत और बढ़ा दी है।
वैश्विक संकट भी है एक बड़ी वजह
सिर्फ देश के अंदरूनी हालात ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कारण भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में चल रहे तनाव और युद्ध की स्थिति के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की सप्लाई प्रभावित हुई है।
इस वजह से कंपनियों के अन्य बिजनेस और वेंचर्स की लागत भी बढ़ गई है।
टेलीकॉम कंपनियां काफी समय से भारतीय बाजार में टैरिफ प्लान महंगे करने की प्लानिंग कर रही थीं, और मौजूदा हालातों ने इसे और हवा दे दी है।
जून में आ सकता है आखिरी फैसला
कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत से उबरने के लिए रिचार्ज प्लान्स को महंगा करने की पूरी तैयारी में हैं।
हालांकि, इसके लिए उन्हें केंद्रीय मंत्रालय और संबंधित सरकारी विभागों से मंजूरी लेनी होगी।
माना जा रहा है कि जून के महीने में इस पर अंतिम मुहर लग सकती है।
इसलिए, अगर आप भी अपना बजट संभालना चाहते हैं, तो अगले महीने से पहले ही कोई लंबा वैलिडिटी वाला प्लान रिचार्ज कराने के बारे में सोच सकते हैं।
