PM Modi Netherlands Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों नीदरलैंड के दौरे पर हैं।
वहां के ‘द हेग’ शहर में जब वे भारतीय मूल के लोगों (भारतीय समुदाय) से मिलने पहुंचे, तो उनका स्वागत बेहद गर्मजोशी के साथ हुआ।
पूरा हॉल “मोदी-मोदी” के नारों से गूंज उठा।
लोगों का यह हुजूम, उनका प्यार और जोश देखकर पीएम मोदी खुद को रोक नहीं पाए।

ऐसा लग रहा है घर में हूं
उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “यहां का माहौल और आप लोगों का यह उत्साह देखकर मैं कुछ पल के लिए भूल ही गया कि मैं विदेश में हूं। मुझे ऐसा महसूस हो रहा है जैसे मैं भारत के ही किसी बड़े उत्सव या त्योहार का हिस्सा बना हुआ हूं।”
पीएम मोदी ने कहा कि ‘द हेग’ अब भारत और नीदरलैंड की अटूट दोस्ती का जीता-जागता प्रतीक बन चुका है।
उन्होंने डच सरकार (नीदरलैंड के नेताओं) की तारीफ करते हुए कहा कि वहां का नेतृत्व हमेशा भारतीय मूल के लोगों की तारीफ करता है।

प्रवासियों ने अपनी कड़ी मेहनत और काबिलियत के दम पर नीदरलैंड के समाज और वहां की अर्थव्यवस्था में एक खास मुकाम हासिल किया है, जिस पर हर हिंदुस्तानी को गर्व होना चाहिए।
दुनिया के लिए ‘आपदाओं का दशक
अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने दुनिया के मौजूदा हालात पर गहरी चिंता जताई।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह दशक (Decade) पूरी दुनिया के लिए मुसीबतों और आपदाओं का दौर साबित हो रहा है। मानवता आज तीन सबसे बड़े संकटों से एक साथ जूझ रही है:
- पहला: कोरोना महामारी का असर, जिससे दुनिया अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी।
- दूसरा: विभिन्न देशों के बीच छिड़े युद्ध और तनाव।
- तीसरा: इन सब वजहों से पैदा हुआ भयंकर ऊर्जा संकट (Energy Crisis)।

मोदी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर दुनिया के देशों ने मिलकर अपने हालात और काम करने के तरीके नहीं बदले, तो पिछले कई दशकों में गरीबी हटाने के लिए की गई मेहनत पर पानी फिर जाएगा।
दुनिया की एक बहुत बड़ी आबादी दोबारा गरीबी के दलदल में धंस सकती है।

ट्यूलिप और कमल: प्रकृति का खूबसूरत संदेश
नीदरलैंड को दुनिया भर में ‘ट्यूलिप’ के खूबसूरत फूलों के लिए जाना जाता है।
पीएम मोदी ने इस बात को भारत से जोड़ते हुए एक बेहद खूबसूरत उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि जहां नीदरलैंड ट्यूलिप के लिए मशहूर है, वहीं भारत की पहचान ‘कमल’ के फूल से है।
भारत के जम्मू-कश्मीर में भी एशिया का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डन है।

उन्होंने आगे कहा, “ट्यूलिप और कमल, दोनों ही फूल हमें एक बहुत बड़ी सीख देते हैं। इनकी जड़ें चाहे पानी में डूबी हों या मिट्टी के अंदर, अगर इन्हें सही पोषण और माहौल मिले, तो ये अपनी खूबसूरती भी बिखेरते हैं और मजबूती से खड़े भी रहते हैं।”
यही सोच भारत और नीदरलैंड की साझेदारी का असली आधार है। व्यापार के अलावा दोनों देश खेल (जैसे क्रिकेट) के मैदान पर भी मिलकर शानदार काम कर रहे हैं।
पीएम ने कहा कि नीदरलैंड, भारतीय बिजनेस के लिए यूरोप का ‘नेचुरल गेटवे’ (प्राकृतिक प्रवेश द्वार) बनेगा।

भारत की डिजिटल और स्टार्टअप क्रांति
पीएम मोदी ने मंच से भारत की बदलती आर्थिक और तकनीकी तस्वीर भी दुनिया के सामने रखी।
उन्होंने कुछ बेहद चौंकाने वाले और गर्व करने वाले आंकड़े साझा किए:
1. स्टार्टअप्स की बाढ़:
मोदी ने बताया कि साल 2025 में भारत में करीब 44 करोड़ हजार (अथवा रिकॉर्ड स्तर पर) नए स्टार्टअप्स की शुरुआत हुई है।
12 साल पहले जहां देश में महज 500 स्टार्टअप थे, आज उनकी संख्या बढ़कर 2 लाख से पार हो चुकी है।
साल 2014 में भारत में सिर्फ 4 ‘यूनिकॉर्न’ (एक अरब डॉलर से ज्यादा वैल्यू वाली कंपनियां) थे, जो आज बढ़कर 125 हो चुके हैं।

2. चिप मेकिंग (सेमीकंडक्टर):
भारत अब टेक्नोलॉजी के मामले में किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
देश में 12 सेमीकंडक्टर प्लांट्स पर तेजी से काम चल रहा है, जिनमें से 2 में तो प्रोडक्शन (उत्पादन) भी शुरू हो चुका है।
अब माइक्रोचिप भी ‘डिजाइन इन इंडिया’ और ‘मेड इन इंडिया’ होगी।
3. पेटेंट और UPI का दम:
पिछले साल भारत में 1.25 लाख से ज्यादा पेटेंट फाइल किए गए।
इसके अलावा, डिजिटल पेमेंट के मामले में भारत ने इतिहास रच दिया है।
भारत में एक साल में 20 बिलियन (20 अरब) से ज्यादा का UPI ट्रांजैक्शन हुआ है, जो दुनिया के कुल डिजिटल ट्रांजैक्शन के आधे से भी ज्यादा है।

नीदरलैंड ने लौटाया 1000 साल पुराना भारतीय इतिहास
इस दौरे की एक सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि यह रही कि नीदरलैंड सरकार ने भारत को चोल राजवंश के समय की बेहद कीमती तांबे की पट्टिकाएं (Copper Plates) वापस सौंप दी हैं।
11वीं सदी की इन पट्टिकाओं को नीदरलैंड में ‘लीडेन प्लेट्स’ कहा जाता था।

क्या है इन पट्टिकाओं का इतिहास?
* यह धरोहर राजा राजा चोल प्रथम (985-1014 ईस्वी) के शासनकाल की मानी जाती है।
* इन तांबे की प्लेट्स पर नागपट्टिनम के ‘चूडामणि विहार’ बौद्ध मठ को दिए गए भूमि और टैक्स छूट (अनुदान) का पूरा ब्योरा लिखा हुआ है।
* कुल 30 किलो वजन की इन 24 प्लेट्स (21 बड़ी और 3 छोटी) को एक चोल शाही मुहर वाले गोल छल्ले से बांधा गया है।
* राजा राजा चोल प्रथम ने इसका आदेश दिया था, जिसे बाद में उनके बेटे राजेंद्र चोल प्रथम ने तांबे पर हमेशा के लिए खुदवाया था।

इतिहासकारों के मुताबिक, ये पट्टिकाएं प्राचीन समय में भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के बीच मजबूत समुद्री व्यापार, सांस्कृतिक रिश्तों और धार्मिक सद्भाव की गवाही देती हैं।
पीएम मोदी ने इस ऐतिहासिक कदम के लिए नीदरलैंड का आभार जताया।
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