Monsoon Update june 2026: इस साल मानसून ने केरल में तय समय से पहले यानी 4 जून को ही दस्तक दे दी थी और महज 13 दिनों के भीतर देश के 19 राज्यों तक पहुंच भी गया।
लेकिन अब इसके आगे बढ़ने की रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया है।
मौसम विभाग (IMD) और प्राइवेट मौसम एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक, मानसून पिछले एक हफ्ते से तेलंगाना के भद्राचलम और पश्चिमी तट पर अटका हुआ है।
इस सुस्ती का सीधा असर यह हुआ है कि देश के करीब 40% हिस्सों में उम्मीद के मुताबिक पानी नहीं गिरा है।
भारत के कुल 723 जिलों में से सिर्फ 103 जिलों में ही अब तक सामान्य बारिश दर्ज की गई है।
सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई चिंता, आसमान साफ
17 जून की सुबह जब INSAT-3DS सैटेलाइट से तस्वीरें ली गईं, तो स्थिति काफी चौंकाने वाली थी।
मध्य और पश्चिमी भारत का एक बहुत बड़ा हिस्सा पूरी तरह साफ नजर आया।
मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक के ऊपर मानसूनी बादलों का नामोनिशान तक नहीं था।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के सुस्त होने की सबसे बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में किसी मजबूत लो-प्रेशर एरिया (कम दबाव का क्षेत्र या डिप्रेशन) का न बनना है।
जब तक वहां कोई मजबूत सिस्टम नहीं बनता, तब तक मानसून को आगे बढ़ने के लिए जरूरी ताकत नहीं मिल पाएगी।
इसके अलावा, वायुमंडल की ऊपरी परत में चलने वाली तेज हवाएं, जिन्हें जेट स्ट्रीम कहा जाता है, उनका पैटर्न भी रुकावट बना हुआ है।
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि अगले 4-5 दिनों में जब ये जेट स्ट्रीम कमजोर होंगी, तब मानसूनी हवाएं एक बार फिर रफ्तार पकड़ेंगी।
मध्य प्रदेश में अगले हफ्ते एंट्री, खरीफ की बोवनी पर संकट
आमतौर पर मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री 15 जून तक हो जाती है।
पिछले साल यानी 2025 में भी यह 16 जून को आ गया था और राज्य में झमाझम बारिश हुई थी।
लेकिन इस बार एमपी के किसानों और आम जनता को अभी और इंतजार करना होगा।
मौसम विभाग का अनुमान है कि अब मध्य प्रदेश में मानसून 21 से 23 जून के बीच ही प्रवेश कर पाएगा।
जून महीने में अब तक राज्य में सामान्य से 35% कम पानी गिरा है।
मानसून के लेट होने से सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को हो रही है। खरीफ की फसलों (जैसे सोयाबीन, उड़द, मूंग और तूअर) की बोवनी का समय आ चुका है, लेकिन खेतों में पर्याप्त नमी नहीं है।
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एस.एस. धाकड़ ने किसानों को सख्त सलाह दी है कि वे जल्दबाजी में बोवनी न करें।
खरीफ की फसलों के लिए कम से कम 100 मिलीमीटर यानी लगभग 4 इंच बारिश होना जरूरी है।
इतनी बारिश के बाद ही मिट्टी के अंदर तक नमी पहुंचती है।
किसानों से यह भी कहा गया है कि वे बोवनी से पहले बीजों का उपचार (सीड ट्रीटमेंट) जरूर कर लें ताकि फसल खराब न हो।
10 राज्यों में अब भी 40 डिग्री का टॉर्चर
एक तरफ जहां बारिश का इंतजार है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर और मध्य भारत के 10 राज्य भीषण गर्मी की चपेट में हैं।
राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, झारखंड और तेलंगाना के कई शहरों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार चल रहा है।
उत्तर प्रदेश का वाराणसी देश में सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 43 डिग्री दर्ज किया गया।
इसके अलावा बांदा, प्रयागराज, खजुराहो और ब्रह्मपुरी में भी तापमान 42 डिग्री से ऊपर बना हुआ है।
हालांकि, दिल्ली-एनसीआर के लोगों को मंगलवार को हुई हल्की बारिश और तेज हवाओं से थोड़ी राहत मिली, जिससे वहां जून का सबसे ठंडा दिन दर्ज किया गया।
अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम का मिजाज?
मौसम विभाग ने राहत देते हुए अगले दो दिनों के लिए कुछ राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया है:
18 जून का अनुमान: बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों (असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश) में भारी बारिश की संभावना है।
बिहार में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है।
वहीं राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में गरज-चमक के साथ धूलभरी हवाएं चलने और हल्की बारिश का अनुमान है।
19 जून का अनुमान: असम, मेघालय और सिक्किम में भारी से बहुत भारी बारिश जारी रहेगी।
इसके साथ ही महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, झारखंड और ओडिशा के कुछ हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां देखने को मिलेंगी।
मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी 40 से 60 किमी की रफ्तार से हवाएं चलने और बौछारें पड़ने की उम्मीद है।
मौसम विभाग को उम्मीद है कि आने वाले 4-5 दिनों में परिस्थितियां बदलेंगी और मानसून एक बार फिर देश को तरबतर करने के लिए आगे बढ़ेगा।
