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MP में हुस्न का जाल और ब्लैकमेलिंग का खेल: अब जान का भी खतरा, महिला आरोपी निकली HIV पॉजिटिव

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Honeytrap Accused HIV Positive: मध्यप्रदेश के भिंड जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है।

यहाँ पुलिस ने एक शातिर ‘हनीट्रैप गैंग’ (हुस्न के जाल में फंसाकर ठगने वाला गिरोह) का पर्दाफाश किया है।

पुलिस ने इस मामले में दो महिलाओं और दो पुरुषों समेत कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

यह गिरोह अमीर और रसूखदार लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनसे लाखों रुपये वसूलता था।

लेकिन इस कहानी में एक ऐसा मोड़ आया है, जिसने पीड़ितों के होश उड़ा दिए हैं।

गिरफ्तार की गई महिलाओं में से एक महिला आरोपी मेडिकल जांच में HIV पॉजिटिव पाई गई है।

कैसे काम करता था यह शातिर गिरोह?

भिंड की देहात थाना पुलिस के मुताबिक, इस गैंग का काम करने का तरीका बेहद शातिराना था।

गिरोह की महिलाएं पहले समाज के रसूखदार, अमीर या सीधे-साधे लोगों को अपने प्रेमजाल में फंसाती थीं।

जब पीड़ित उनके करीब आ जाता था, तो गिरोह के अन्य सदस्यों की मदद से उनके आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें चुपके से रिकॉर्ड कर ली जाती थीं।

इसके बाद असली खेल शुरू होता था। आरोपी इन वीडियो और तस्वीरों के दम पर पीड़ितों को डराते-धमकाते थे।

उन्हें समाज में बदनाम करने और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी जाती थी।

बदनामी के डर से पीड़ित चुपचाप लाखों रुपये गिरोह के हवाले कर देते थे। अब तक यह गैंग कई लोगों को अपना शिकार बना चुका है।

पैसे की उगाही से ‘जिंदगी और मौत’ का मामला बना

पुलिस ने जब आरोपियों को पकड़ा, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत जिला अस्पताल में उनका मेडिकल टेस्ट कराया गया।

इस जांच की रिपोर्ट आते ही पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

गिरोह के लिए काम करने वाली एक महिला आरोपी खतरनाक बीमारी एचआईवी (HIV) से संक्रमित पाई गई।

पूछताछ में एक और चौंकाने वाला सच सामने आया कि वह महिला पिछले तीन साल से इस बीमारी का इलाज करवा रही थी

इसका सीधा मतलब यह है कि जब वह लोगों को अपने जाल में फंसा रही थी और उनके साथ शारीरिक संपर्क में थी, तब भी वह इस जानलेवा संक्रमण से पीड़ित थी।

अब यह मामला सिर्फ पैसों की धोखाधड़ी या ब्लैकमेलिंग का नहीं रह गया है, बल्कि यह पीड़ितों की जिंदगी और मौत से जुड़ गया है।

पीड़ितों की तलाश में जुटी पुलिस, खंगाला जा रहा डिजिटल डेटा

इस खुलासे के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों की पहचान करना है जो इस गैंग का शिकार बने थे।

पुलिस ने आरोपियों के पास से कई मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त किए हैं।

इन डिवाइस में भारी मात्रा में आपत्तिजनक तस्वीरें, वीडियो और पैसों के लेनदेन (फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन) से जुड़े दस्तावेज मिले हैं।

पुलिस इन डिजिटल सबूतों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस महिला के संपर्क में कितने लोग आए थे।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जो भी लोग इस गिरोह के चंगुल में फंसे थे, उन्हें बिना देरी किए तुरंत अपनी मेडिकल जांच करानी चाहिए, क्योंकि समय पर इलाज ही बचाव का एकमात्र रास्ता है।

जांच के दायरे में वकील; कई जिलों तक फैला है नेटवर्क

इस पूरे मामले में एक स्थानीय वकील (अधिवक्ता) की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।

पुलिस को शक है कि ब्लैकमेलिंग के जरिए वसूली गई मोटी रकम के बंटवारे और कानूनी दांव-पेंचों से बचने में इस वकील ने गिरोह की मदद की थी।

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस उगाही के नेटवर्क के तार मध्यप्रदेश के किन-किन अन्य जिलों से जुड़े हुए हैं।

फिलहाल, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस बेहद सतर्कता से आगे बढ़ रही है।

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