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मध्य प्रदेश में कोचिंग सेंटरों के लिए सख्त नियम: 90 दिन में रजिस्ट्रेशन जरूरी, फीस से लेकर टीचर्स की योग्यता तक सब कुछ होगा ऑनलाइन

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP coaching center new rules: मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर रोक लगाने और विद्यार्थियों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखने के लिए नए और कड़े नियम लागू कर दिए हैं।

उच्च शिक्षा विभाग ने ‘मध्य प्रदेश कोचिंग केंद्र (पंजीयन एवं विनियमन) नियम, 2026’ का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।

इन नए नियमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोचिंग सिर्फ बिजनेस न रहे, बल्कि स्टूडेंट्स के लिए एक सुरक्षित, पारदर्शी और तनावमुक्त शैक्षणिक माहौल बने।

आइए जानते हैं कि इन नए नियमों में क्या-क्या खास बातें तय की गई हैं:

1. 90 दिन में रजिस्ट्रेशन और हर 3 साल में रिन्यूअल

अब से मध्य प्रदेश में कोई भी कोचिंग सेंटर बिना रजिस्ट्रेशन के नहीं चल पाएगा।

नए नियमों के मुताबिक, सभी संस्थानों को 90 दिनों के भीतर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।

* 3 साल की वैधता: यह रजिस्ट्रेशन हमेशा के लिए नहीं होगा, बल्कि इसकी वैधता सिर्फ 3 साल होगी। इसके बाद हर तीन साल पर इसका नवीनीकरण (रिन्यूअल) कराना होगा।

 * अलग-अलग ब्रांच: अगर किसी कोचिंग संस्थान की शहर में कई शाखाएं (ब्रांच) हैं, तो हर ब्रांच को अलग कोचिंग सेंटर मानकर उसके लिए अलग से पंजीयन की शर्तें पूरी करनी होंगी। एक ही रजिस्ट्रेशन पर पूरी चेन नहीं चलाई जा सकेगी।

* अधिकारियों की जिम्मेदारी: शहरी क्षेत्रों में नगर निगम आयुक्त या उनके द्वारा नामित अधिकारी और ग्रामीण क्षेत्रों में जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) इस पूरी प्रक्रिया के प्रभारी होंगे।

2. फीस, रिजल्ट और शिक्षकों की जानकारी वेबसाइट पर होगी सार्वजनिक

अक्सर स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को एडमिशन के बाद फीस या सुविधाओं को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ता था।

इस पर लगाम कसने के लिए सरकार ने निर्देश दिए हैं कि हर कोचिंग संस्थान को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर पूरी जानकारी देनी होगी:

* फीस का पूरा ब्योरा: किस कोर्स की कितनी फीस है, इसकी स्पष्ट जानकारी पहले ही देनी होगी।

 * शिक्षकों की योग्यता: पढ़ाने वाले टीचर्स की शैक्षणिक योग्यता क्या है, यह भी बताना होगा। नए नियमों के अनुसार, कोचिंग में पढ़ाने वाले ट्यूटर के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक (Graduation) तय की गई है। साथ ही, आपराधिक रिकॉर्ड वाले किसी भी स्टाफ की नियुक्ति पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।

 * पिछले 5 साल का रिजल्ट: संस्थानों को अपने पिछले 5 साल के परीक्षा परिणाम भी वेबसाइट पर दिखाने होंगे ताकि छात्र सही फैसला ले सकें।

3. हॉस्टल में सीलिंग फैन पर बैन और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

विद्यार्थियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए हॉस्टल्स और कोचिंग परिसरों के लिए कड़े निर्देश जारी किए गए हैं:

 * सीलिंग फैन बैन: हॉस्टलों में सुरक्षा कारणों के चलते सीलिंग फैन (छत वाले पंखे) लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

* सीसीटीवी कैमरे: कोचिंग परिसर में उचित स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।

हालांकि, विद्यार्थियों की निजता का ध्यान रखते हुए शौचालय, चेंजिंग रूम और परामर्श कक्ष जैसे संवेदनशील स्थानों पर कैमरे नहीं लगाए जाएंगे।

 * बेसिक सुविधाएं: कोचिंग सेंटरों में बैठने की उचित व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, नियमित साफ-सफाई, प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) बॉक्स और अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) होना बेहद जरूरी है।

इसके अलावा छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय और विजिटर्स का पूरा रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य है।

4. मानसिक तनाव से निपटने के लिए काउंसलिंग और हेल्पलाइन नंबर

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान बच्चों पर पढ़ाई का भारी मानसिक दबाव रहता है।

इसे कम करने के लिए नियमों में विशेष प्रावधान किए गए हैं:

* काउंसलर की नियुक्ति: संस्थानों को मानसिक स्वास्थ्य और करियर काउंसलिंग के लिए योग्य काउंसलर की व्यवस्था करनी होगी।

 * हेल्पलाइन नंबर डिस्प्ले: कोचिंग सेंटर्स और हॉस्टल्स में प्रमुखता से टेली मानस (14416), उमंग (1800-11-5246) और चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर (1098) प्रदर्शित करने होंगे ताकि जरूरत पड़ने पर छात्र तुरंत मदद ले सकें।

5. भेदभाव पर रोक और अन्य नियम

* भेदभाव नहीं: प्रवेश या पढ़ाई के दौरान धर्म, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर किसी भी छात्र के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। ऐसे आधारों पर अलग-अलग बैच बनाना भी प्रतिबंधित रहेगा। दिव्यांग छात्रों के लिए परिसर को सुगम (दिव्यांग-अनुकूल) बनाना होगा।

 * निगरानी समिति: नियमों के पालन पर कड़ी नजर रखने के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति बनाई जाएगी, जो समय-समय पर कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण करेगी।

 * अपील का अधिकार: यदि किसी संस्थान का रजिस्ट्रेशन रद्द या अस्वीकार किया जाता है, तो संचालक आदेश मिलने के 30 दिनों के भीतर संभागायुक्त के समक्ष अपील कर सकेंगे, जिसका निपटारा 45 दिनों के भीतर किया जाएगा।

कुल मिलाकर, इन नए नियमों का उद्देश्य कोचिंग संस्थानों की जवाबदेही तय करना और स्टूडेंट्स को एक सुरक्षित, पारदर्शी और तनावमुक्त माहौल देना है ताकि वे बिना किसी मानसिक दबाव के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।

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