IVF Center AIIMS Bhopal: मध्य प्रदेश के उन हजारों परिवारों के लिए एक उम्मीद की किरण जागी है, जो लंबे समय से माता-पिता बनने का सपना देख रहे हैं।
भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में राज्य का पहला सरकारी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) सेंटर पूरी तरह सज-धज कर तैयार है।
मशीनें आ चुकी हैं और एक्सपर्ट्स की तैनाती भी हो गई है, बस अब इंतजार है तो सरकार की ओर से मिलने वाले अंतिम लाइसेंस का।
लाखों का इलाज अब हजारों में
निसंतानता का इलाज आज के दौर में बहुत महंगा हो गया है।
निजी अस्पतालों में एक बार के आईवीएफ (IVF Cycle) का खर्च 1.5 लाख से 3 लाख रुपए तक आता है।
आम आदमी के लिए यह रकम जुटाना किसी चुनौती से कम नहीं है।

लेकिन भोपाल AIIMS में यही इलाज महज 50 हजार से 75 हजार रुपए में उपलब्ध होगा।
दिल्ली और रायपुर के बाद भोपाल देश का तीसरा ऐसा एम्स होगा जहाँ यह सुविधा शुरू हो रही है।
केंद्र सरकार ने इसके लिए 20 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट दिया है।
क्यों बढ़ रही है IVF की जरूरत?
आंकड़े बताते हैं कि पिछले 10 सालों में मध्य प्रदेश में प्रजनन क्षमता (Fertility Rate) में 12.58 प्रतिशत की गिरावट आई है।
बदलती लाइफस्टाइल, देर से शादी और बढ़ता तनाव इसके बड़े कारण हैं।
जब प्राकृतिक रूप से गर्भधारण नहीं हो पाता, तब आईवीएफ तकनीक का सहारा लिया जाता है।

क्या होता है IVF? आसान भाषा में समझें
IVF यानी ‘इन विट्रो फर्टिलाइजेशन’ को बोलचाल की भाषा में ‘टेस्ट ट्यूब बेबी’ भी कहते हैं।
इसमें महिला के शरीर से अंडाणु (Eggs) और पुरुष के शुक्राणु (Sperms) को बाहर निकालकर लैब में एक खास वातावरण में मिलाया जाता है।
जब लैब में भ्रूण (Embryo) बन जाता है, तो उसे वापस महिला के गर्भाशय में इम्प्लांट कर दिया जाता है।
AIIMS सेंटर की हाईटेक खासियतें
यह सेंटर केवल सस्ता ही नहीं, बल्कि तकनीक के मामले में भी बहुत उन्नत है:
- एआई बेस्ड सिम्युलेटर: यहां डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डिजिटल लैब बनाई गई है।
- एडवांस लैब: यहां भ्रूण को फ्रीज करने (Embryo Freezing) और हाई-एंड इनक्यूबेटर की सुविधा है।
- अनुभवी टीम: भ्रूण को इम्प्लांट करने के लिए विशेष एम्ब्रायोलॉजिस्ट की नियुक्ति की जा चुकी है।

उम्र और सफलता का गणित
डॉक्टरों का मानना है कि आईवीएफ की सफलता में ‘उम्र’ सबसे बड़ा फैक्टर है।
- 21-30 साल की उम्र में सफलता की उम्मीद 65-70% तक होती है।
- जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है (खासकर 35 के बाद), सफलता की दर घटकर 30% तक आ जाती है और खर्च भी बढ़ जाता है। इसलिए विशेषज्ञों की सलाह है कि इलाज में देरी न करें।
नियमों की सख्ती
अब आईवीएफ के नियम काफी कड़े कर दिए गए हैं।
महिला के लिए अधिकतम उम्र 50 साल और पुरुष के लिए 55 साल तय है।
एक बार में केवल दो ही भ्रूण ट्रांसफर किए जा सकते हैं ताकि जच्चा और बच्चा दोनों की जान को खतरा न हो।
