Mahakal Light and Sound Show Ticket: मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल के मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए एक बड़ी खबर है।
अगर आप उज्जैन जाकर महाकाल लोक (कॉरिडोर) में होने वाले शानदार ‘लाइट एंड साउंड शो’ को देखने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो अब आपको अपनी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करनी होगी।
मंदिर प्रबंध समिति ने फैसला लिया है कि अब इस शो को देखने के लिए हर व्यक्ति को 100 रुपए का टिकट लेना होगा।
पिछले करीब 7 महीनों से यह शो आम जनता और श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह मुफ्त चल रहा था।
लेकिन अब मंदिर प्रशासन ने इस नए नियम को मंजूरी दे दी है।

इस फैसले के बाद से उन आम श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ गई है जो एक तय बजट के साथ बाबा महाकाल के दर्शन करने उज्जैन आते हैं।
शो की टाइमिंग और क्या हैं खूबियां?
उज्जैन के इस पहले और बेहद भव्य लाइट एंड साउंड शो की शुरुआत साल 2025 में दीपावली के पावन मौके पर (25 अक्टूबर 2025) हुई थी।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसका लोकार्पण किया था।
इसे महाकाल कॉरिडोर के पास रुद्रसागर के समीप बनाया गया है।

इस पूरे प्रोजेक्ट को तैयार करने में करीब 18 करोड़ 7 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि खर्च हुई है।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (MP Tourism) ने इसे तैयार किया है।
आइए जानते हैं इस शो में क्या खास है:
- 25 मिनट का रोमांच: यह पूरा शो करीब 25 मिनट का होता है।
- अत्याधुनिक तकनीक: इसमें हाई-टेक लेजर लाइट्स और बेहतरीन सराउंड साउंड सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है।
- वॉटर स्क्रीन और फाउंटेन: पानी की फुहारों से बनी स्क्रीन (Water Screen) पर जब लेजर लाइट पड़ती है, तो नजारा अद्भुत हो जाता है।
- इतिहास और भक्ति का संगम: इस शो के माध्यम से भगवान महाकाल की महिमा, पवित्र मां क्षिप्रा की कहानी और प्राचीन अवंतिका नगरी (उज्जैन) के गौरवशाली इतिहास को जीवंत रूप में दिखाया जाता है।

मंदिर समिति ने क्यों लगाया टिकट? (कमाई का गणित)
अचानक इस मुफ्त शो पर टिकट लगाने के पीछे मंदिर प्रशासन ने मेंटेनेंस यानी रख-रखाव का हवाला दिया है।
मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक के मुताबिक, इस हाई-टेक शो को रोजाना सुचारू रूप से चलाना काफी खर्चीला काम है।
- हर महीने का खर्च: शो के रख-रखाव और बिजली आदि पर हर महीने करीब 1.5 लाख रुपए का खर्च आता है। सालभर का यह खर्च करीब 18 लाख रुपए बैठता है।
- कमाई का अनुमान: प्रशासन का कहना है कि वर्तमान में रोजाना लगभग 500 श्रद्धालु इस शो को देखते हैं। अगर हर व्यक्ति से 100 रुपए लिए जाएंगे, तो रोज की कमाई 50 हजार रुपए होगी।
- इस हिसाब से मंदिर समिति को हर महीने करीब 15 लाख रुपए और सालभर में लगभग 1.8 करोड़ रुपए का राजस्व (कमाई) मिलेगा।
प्रशासन का तर्क है कि व्यवस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाए रखने के लिए यह फीस बेहद जरूरी है।

महाकाल में पहले से ही हैं कई सशुल्क व्यवस्थाएं
यह पहली बार नहीं है जब महाकाल मंदिर में किसी सुविधा के लिए शुल्क (फीस) तय की गई है। इससे पहले भी मंदिर समिति ने कई बड़े बदलाव किए हैं:
1. आरती पर शुल्क: इसी साल 19 फरवरी 2026 से नया नियम लागू किया गया था, जिसके तहत शाम को होने वाली संध्या आरती और शयन आरती के लिए ₹250 प्रति व्यक्ति का शुल्क तय कर दिया गया। पहले ये दोनों आरतियां सबके लिए मुफ्त थीं।
2. शीघ्र दर्शन और भस्म आरती: मंदिर में वीआईपी एंट्री या शीघ्र दर्शन (VIP Darshan) के लिए पहले से ही अलग से रसीद कटती है।
वहीं, सुबह होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के लिए भी ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग की एक तय व्यवस्था है, जिसमें रोजाना करीब 1700 लोग शामिल होते हैं।

फैसले पर क्या है आम भक्तों की राय?
बाबा महाकाल के दर्शन के लिए देश-विदेश से हर दिन हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।
मंदिर समिति के इस नए फैसले को लेकर आम भक्तों के बीच नाराजगी और निराशा का माहौल देखा जा रहा है।
भक्तों के एक बड़े वर्ग का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर भगवान की महिमा और इतिहास दिखाने वाली चीजों को व्यापार का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए।

जो गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार दूर-दराज के गांवों या शहरों से पूरे परिवार के साथ आते हैं, उनके लिए अब उज्जैन यात्रा काफी महंगी हो जाएगी।
उदाहरण के लिए, यदि 5 सदस्यों का एक परिवार आता है, तो सिर्फ लाइट शो देखने के लिए उन्हें ₹500 अलग से खर्च करने होंगे।
भक्तों का मानना है कि जब मंदिर को अन्य माध्यमों और दान से भारी आय होती है, तो ₹1.5 लाख महीने का मेंटेनेंस खर्च मंदिर समिति अपने खजाने से भी वहन कर सकती थी।
#UjjainMahakal #MahakalTemple #LightAndSoundShow #MahakalCorridor #UjjainNews #Mahakaleshwar #MadhyaPradeshTourism
