MP Govt Expenses Cut: मध्य प्रदेश में अब सरकारी अफसरों के ठाठ-बाट वाले दिन खत्म होने जा रहे हैं।
राज्य सरकार ने फिजूलखर्ची को रोकने और सरकारी खजाने को बोझ से बचाने के लिए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है।
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की ओर से जारी एक नए आदेश ने वल्लभ भवन (मंत्रालय) से लेकर जिला कलेक्टोरेट तक के गलियारों में खलबली मचा दी है।
वैश्विक आर्थिक मंदी के इस दौर में सरकार ने साफ कर दिया है कि जनता के पैसे की बर्बादी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार का यह फैसला अफसरों की सुख-सुविधाओं और उनके दौरों पर सीधे तौर पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसा है।
पूरा मामला: क्यों लिया गया यह सख्त फैसला?
दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार इस समय वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने में जुटी है।
दुनिया भर में चल रही आर्थिक अनिश्चितता के बीच राज्य सरकार अपने संसाधनों का सही और सीमित इस्तेमाल करना चाहती है।
इसी कड़ी में सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव सचिंद्र राव ने एक सर्कुलर जारी किया है, जिसका मकसद सरकारी खर्चों में भारी कटौती करना है।

आइए जानते हैं कि इस नए आदेश में क्या-क्या कड़े नियम बनाए गए हैं।
1. दिल्ली-मुंबई के हवाई दौरों पर ‘इमर्जेंसी ब्रेक’
अब तक देखा जाता था कि छोटी-मोटी बैठकों या केंद्र सरकार के विभागों में हाजिरी लगाने के नाम पर अफसर तुरंत दिल्ली या मुंबई के लिए हवाई टिकट बुक करा लेते थे।
लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। नए नियमों के मुताबिक, राज्य से बाहर की यात्रा केवल बेहद जरूरी और आपातकालीन परिस्थितियों में ही की जा सकेगी।
इतना ही नहीं, अब सचिव स्तर (Secretary Level) के अधिकारियों को मध्य प्रदेश से बाहर जाने के लिए मुख्य सचिव (CS) से लिखित में मंजूरी लेनी होगी।
साथ ही, बाहर जाने पर महंगे प्राइवेट होटलों में रुकने और वहां का खाना खाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
यह नियम सभी विभागों के अफसरों पर समान रूप से लागू होगा।
2. शाम 7 बजे के बाद दफ्तरों में बंद हो जाएंगे AC और कंप्यूटर
बिजली के भारी-भरकम बिलों से राहत पाने के लिए सरकार ने एक अनोखा और कड़ा कदम उठाया है।
अब हर सरकारी विभाग का ‘एनर्जी ऑडिट’ (Energy Audit) कराया जाएगा।
आदेश के तहत, जैसे ही दफ्तर का समय खत्म होगा यानी शाम के 7 बजेंगे, वैसे ही दफ्तरों के गैर-जरूरी एसी (AC), लाइटें, कंप्यूटर, प्रिंटर और लिफ्ट को सख्ती से बंद करना होगा।
यह आदेश सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एनर्जी ऑडिट के जरिए यह चेक किया जाएगा कि किस विभाग ने कितनी बिजली बचाई और किसने लापरवाही की।
3. बड़ी गाड़ियों का मोह छोड़ना होगा, कार-पूलिंग है जरूरी
मंत्रालय के बड़े अधिकारियों, जिला कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों (HODs) को अब अपनी चमचमाती सरकारी या निजी गाड़ियों को बार-बार निकालने की आजादी नहीं होगी।
सरकार ने साफ कहा है कि ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की खपत को कम करने और पर्यावरण को बचाने के लिए अफसरों को कार-पूलिंग करनी होगी।
इसके अलावा पब्लिक ट्रांसपोर्ट (सार्वजनिक परिवहन) या इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार की इस पहल से यह साफ संदेश गया है कि मुश्किल आर्थिक दौर में अफसरों को भी आम जनता की तरह किफायत बरतनी होगी।
अब देखना यह है कि जमीन पर इस आदेश का पालन कितनी कड़ाई से होता है और इससे सरकारी खजाने को कितनी राहत मिलती है।
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