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कांग्रेस को घेरने की तैयारी: महिला आरक्षण बिल को लेकर मोहन सरकार बुलाएगी विधानसभा का विशेष सत्र

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP Assembly Special Session: मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों पारा चढ़ा हुआ है। वजह है—महिला आरक्षण बिल।

हाल ही में लोकसभा में इस बिल को लेकर जो गतिरोध (Deadlock) पैदा हुआ, उसकी गूंज अब दिल्ली से निकलकर भोपाल की सड़कों तक पहुंच गई है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार, 19 अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कर दिया है कि उनकी सरकार इस मुद्दे पर चुप बैठने वाली नहीं है।

विधानसभा का विशेष सत्र और बीजेपी की रणनीति

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ऐलान किया है कि महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर मध्य प्रदेश सरकार विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाएगी।

इस सत्र का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों पर चर्चा करना और यह बताना है कि आखिर बिल में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है।

बीजेपी का सीधा आरोप है कि कांग्रेस और विपक्ष की अड़ंगों की वजह से यह ऐतिहासिक कदम रुक गया है।

लेकिन बीजेपी की रणनीति सिर्फ विधानसभा की चारदीवारी तक सीमित नहीं है।

पार्टी इसे ‘जन आंदोलन’ बनाने की तैयारी में है। यानी अब यह मामला सदन से निकलकर सड़क तक जाएगा।

बीजेपी की योजना है कि प्रदेश के हर जिले, हर ब्लॉक और हर पंचायत तक यह बात पहुंचाई जाए कि प्रधानमंत्री मोदी तो महिलाओं को हक देना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस इसमें रोड़ा बन रही है।

कांग्रेस पर तीखा हमला: ‘इतिहास गवाह है’

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस पर कड़ा प्रहार किया।

उन्होंने कहा कि संसद में जो कुछ भी हुआ, वह लोकतंत्र के लिए बेहद दुखद है।

बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस ने हमेशा से महिलाओं के प्रति दोहरा रवैया अपनाया है।

पार्टी अब जनता के बीच जाकर यह नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रही है कि कांग्रेस महिलाओं के सशक्तिकरण की विरोधी है।

प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी पार्टी के ‘ग्राउंड प्लान’ का खुलासा किया।

उन्होंने बताया कि हर जिले में प्रदर्शन किए जाएंगे, पुतले जलाए जाएंगे और रैलियां निकाली जाएंगी।

बीजेपी का मानना है कि महिलाओं का वोट बैंक किसी भी चुनाव में निर्णायक होता है, इसलिए वे इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहते।

2029 का गणित और जनगणना की मजबूरी

विपक्ष अक्सर यह सवाल उठाता है कि अगर बिल पास हो गया है, तो इसे लागू क्यों नहीं किया जा रहा?

इस पर सीएम मोहन यादव ने तकनीकी पक्ष भी सामने रखा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि 2023 के कानून के मुताबिक, महिला आरक्षण का पूरा लाभ 2029 से ही मिल पाएगा।

इसका कारण यह है कि आरक्षण लागू करने के लिए देश में नई जनगणना (Census) और उसके बाद परिसीमन (Delimitation) होना अनिवार्य है।

फिलहाल देश में 2011 की जनगणना के आंकड़े ही उपलब्ध हैं, जिनके आधार पर नई सीटों का निर्धारण संभव नहीं है। बीजेपी इसे ‘संवैधानिक प्रक्रिया’ बता रही है, जबकि विपक्ष इसे ‘चुनावी जुमला’ करार दे रहा है।

असली लड़ाई अब जनता की अदालत में

मध्य प्रदेश में अब एक नई तरह की ‘राजनीतिक जंग’ शुरू हो गई है।

एक तरफ बीजेपी इसे महिला सम्मान और उनके हक की लड़ाई बता रही है, तो दूसरी तरफ यह 2029 के बड़े लक्ष्य और आगामी स्थानीय चुनावों के लिए जमीन तैयार करने की कोशिश भी है।

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विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना एक बड़ा संवैधानिक कदम है, लेकिन असली परीक्षा जनता के बीच होगी।

क्या बीजेपी जनता को यह समझाने में सफल होगी कि देरी के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है?

या फिर कांग्रेस इस ‘विशेष सत्र’ को सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग बताकर पलटवार करेगी?

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