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लखपति दीदियों की डूबी कमाई: MP में सवा लाख से ज्यादा महिलाओं की आय हजारों में सिमटी, जानिए क्या है वजह

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP lakhpati didi income drop: मध्य प्रदेश से महिलाओं की आर्थिक स्थिति को लेकर एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है।

राज्य सरकार ने महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए ‘लखपति दीदी योजना’ की शुरुआत की थी।

इस योजना का मकसद स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) से जुड़ी महिलाओं की कमाई को बढ़ाना था।

नियम के अनुसार, अगर कोई महिला लगातार तीन साल तक सालाना 1 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई करती है, तो उसे ‘लखपति दीदी’ का दर्जा दिया जाता है।

साल 2023 में मध्य प्रदेश में करीब 15 लाख महिलाएं इस कैटेगरी में शामिल थीं। केंद्र सरकार के हालिया आंकड़ों को देखें तो साल 2026 में यह संख्या बढ़कर 16.44 लाख तक पहुंच गई थी।

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लेकिन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की 16 जून को आई एक ताजा रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश की सवा लाख से ज्यादा लखपति दीदियों की कमाई में भारी गिरावट आई है।

जो महिलाएं पहले साल में एक लाख से ज्यादा कमा रही थीं, उनकी आय अब महज कुछ हजार रुपयों में सिमट कर रह गई है।

कमाई गिरने के चौंकाने वाले आंकड़े

पिछले तीन साल के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चला कि कुल 1.35 लाख महिलाएं ऐसी हैं, जो लगातार तीन साल तक लखपति दीदी की लिस्ट में शामिल थीं, लेकिन अब उनकी माली हालत खराब हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार:

  • लगभग 31 हजार 867 महिलाओं की सालाना कमाई अब 25 हजार रुपये से भी कम बची है।
  • वहीं, 1 लाख से ज्यादा महिलाओं की सालाना आय घटकर 25 हजार से 60 हजार रुपये के बीच रह गई है।

आसान शब्दों में कहें तो योजना से जुड़ी करीब एक-तिहाई महिलाओं की आर्थिक स्थिति पटरी से उतर चुकी है।

साल 2023-24 के सर्वे में जो महिलाएं लखपति बनी थीं, उनमें से 70 फीसदी की कमाई अब 1 लाख से नीचे आ गई है।

मुरैना और भोपाल जैसे जिलों में यह गिरावट 45 प्रतिशत तक दर्ज की गई है।

इसके अलावा पांढुर्ना में 42%, भिंड में 41% और आलीराजपुर में 39% महिलाओं की आय कम हुई है।

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क्यों बंद हुई दीदियों की मोटी कमाई?

धरातल पर काम करने वाली महिलाओं (दीदियों) का दर्द कुछ और ही कहानी बयां करता है।

बड़वानी जिले की वैशाली चौधरी ‘प्रेरणा शक्ति स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ी हैं। उनका कहना है कि पहले उन्हें स्कूलों के लिए यूनिफॉर्म (गणवेश) सिलने का बड़ा काम मिलता था।

इसके अलावा वे मसाले, पापड़, आटा और दाल जैसी चीजें बनाकर स्कूल-हॉस्टलों में बेचती थीं। सरकार की तरफ से मेले भी लगाए जाते थे, जिससे उनकी अच्छी बिक्री हो जाती थी।

लेकिन अब ये सब काम बंद हो चुके हैं और सबसे बड़ी समस्या उनके प्रोडक्ट्स की सही तरीके से मार्केटिंग न होना है।

इसी तरह हाटपिपल्या की सुनीता गोस्वामी, जो ‘ओम नमः स्वयं सहायता समूह’ का हिस्सा हैं, बताती हैं कि उनकी कमाई अब बहुत कम हो गई है।

सरकार ने सिलाई और महिला रोजगार से जुड़े कई काम बंद कर दिए हैं, जिससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ा है।

महिलाओं की मांग है कि राज्य आजीविका मिशन को इस ओर तुरंत ध्यान देना चाहिए।

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आजीविका मिशन में प्रशासनिक संकट

एक तरफ जहां महिलाएं आर्थिक संकट से जूझ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश राज्य आजीविका मिशन खुद एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल के दौर से गुजर रहा है।

मिशन की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) हर्षिका सिंह का तबादला हो चुका है और उनकी जगह विनय निगम को नया सीईओ बनाया गया है।

लेकिन विनय निगम ने अभी तक अपना पद नहीं संभाला है क्योंकि उनकी पुरानी जगह (पाठ्यपुस्तक निगम) में नए एमडी रोहित सिंह ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है।

इस खींचतान की वजह से आजीविका मिशन फिलहाल बिना मुखिया (सीईओ) के चल रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर फैसले लेने में देरी हो रही है।

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सरकार का अगला प्लान: ‘मैन-टू-मैन मैपिंग’

इस पूरे मामले पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अतिरिक्त सचिव दिनेश जैन का कहना है कि सरकार इस स्थिति को सुधारने के लिए गंभीर है।

सरकार अब उन सभी महिलाओं की ‘मैन-टू-मैन मैपिंग’ (व्यक्तिगत समीक्षा) करेगी, जो पहले लखपति दीदी थीं लेकिन अब इस लिस्ट से बाहर हो गई हैं।

इसके लिए अलग-अलग सरकारी विभागों के साथ तालमेल बिठाया जाएगा ताकि महिलाओं को फिर से रोजगार के साधन मिल सकें।

जिला पंचायतों के सीईओ को हर महिला की आय की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है।

हालांकि, जानकारों का मानना है कि जब तक महिलाओं के प्रोडक्ट्स के लिए बाजार और बेहतर मार्केटिंग की व्यवस्था नहीं की जाएगी, तब तक उनकी कमाई को दोबारा बढ़ाना एक बड़ी चुनौती रहेगा।

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