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नवरात्रि से पहले MP मुस्लिम त्योहार कमेटी की मुस्लिम युवाओं से खास अपील: रील्स के लिए गरबा में जाने से बचें, प्रशासन से भी की खास मांग

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Reel Culture In Garba: भोपाल। मध्यप्रदेश में आगामी त्योहारों और नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा आयोजनों को देखते हुए सामाजिक और धार्मिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में एक अहम पहल की गई है।

मध्यप्रदेश मुस्लिम त्योहार कमेटी ने प्रदेश के मुस्लिम युवाओं के लिए एक विशेष मार्गदर्शन और अपील जारी की है।

कमेटी का कहना है कि युवा किसी भी तरह के उकसावे, विवाद या सोशल मीडिया की होड़ से दूर रहें और कानून तथा धार्मिक मर्यादाओं का पूरी तरह से पालन करें।

क्यों जारी की गई यह खास अपील?

11 अक्टूबर से नवरात्रि सहित कई प्रमुख धार्मिक कार्यक्रमों और गरबा आयोजनों की शुरुआत हो रही है।

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त्योहारों के इस माहौल में किसी भी प्रकार की अनहोनी, आपसी मनमुटाव या शांति भंग होने जैसी स्थिति से बचने के लिए मुस्लिम त्योहार कमेटी आगे आई है।

कमेटी ने युवाओं को जिम्मेदारी से व्यवहार करने और किसी भी विवादित माहौल से खुद को अलग रखने की सलाह दी है।

इस पूरे मामले पर मध्यप्रदेश मुस्लिम त्योहार कमेटी के अध्यक्ष जीशान रहमान (शानू) ने अपनी बात रखते हुए कहा कि आज के समय में हर नौजवान को अत्यधिक शांति, संयम और समझदारी बरतने की जरूरत है।

उन्होंने युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि जब कोई एक व्यक्ति या युवा गलती करता है, तो उसका असर केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता।

कई बार एक छोटी सी लापरवाही या नादानी का खामियाजा उसके परिवार और पूरे समाज को भुगतना पड़ता है।

इसलिए समझदारी इसी में है कि हर तरह के अनावश्यक विवाद, हंगामे या भीड़भाड़ वाली जगहों से दूरी बनाई रखे।

‘रील्स, लाइक्स और व्यूज के चक्कर में न जाएं’

आजकल युवाओं के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम और फेसबुक पर रील्स बनाने, ज्यादा से ज्यादा लाइक्स और व्यूज हासिल करने का जबर्दस्त क्रेज देखा जाता है।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए कमेटी ने युवाओं को विशेष हिदायत दी है।

कमेटी ने स्पष्ट किया कि केवल सोशल मीडिया पर अटेंशन या व्यूज पाने की होड़ में किसी भी गरबा स्थल या अन्य धार्मिक आयोजनों में बेवजह शामिल होने से बचें।

अध्यक्ष जीशान रहमान ने साफ किया कि यह अपील किसी समुदाय के विरोध या नकारात्मकता में नहीं, बल्कि धार्मिक मर्यादा, सामाजिक ताने-बाने की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करने के लिए की गई है।

इसी संदर्भ में वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज की प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

उनका मानना है कि यदि कोई मुस्लिम युवा किसी आयोजन में जाता है तो वह पारदर्शी तरीके से अनुमति लेकर ही जाए।

पहचान छिपाकर या अनुचित तरीके से प्रवेश करने वालों पर प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

कॉलेजों और हॉस्टलों तक जागरूकता फैलाने की मांग

मुस्लिम त्योहार कमेटी ने केवल युवाओं से अपील करके ही अपनी जिम्मेदारी खत्म नहीं मानी, बल्कि प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन से भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है।

कमेटी ने मध्यप्रदेश शासन और प्रशासन को एक पत्र भेजकर गुजारिश की है कि 11 अक्टूबर से पहले राज्य के सभी विश्वविद्यालयों, डिग्री कॉलेजों, मेडिकल व टेक्निकल संस्थानों और छात्र हॉस्टलों में जागरूकता अभियान चलाया जाए।

प्रशासन ऐसे प्रभावी कदम उठाए जिससे छात्रों और युवाओं तक सही समय पर यह संदेश पहुंचे और वे किसी भी बहकावे में आने से बच सकें।

जीशान रहमान ने यह भी जानकारी दी कि वे जल्द ही स्वयं मंत्रालय जाकर वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों से मुलाकात करेंगे, ताकि त्योहारों के दौरान पूरे प्रदेश में शांति, सुरक्षा और सौहार्द का माहौल बना रहे।

सकारात्मक पहल: गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग भी दोहराई

मध्यप्रदेश में मुस्लिम समुदाय द्वारा सामाजिक सौहार्द और परस्पर सम्मान की दिशा में यह पहली पहल नहीं है।

इससे पहले भी भोपाल के ऐतिहासिक इतवारा चौक पर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार समिति के बैनर तले मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक अनोखा प्रदर्शन किया था।

उस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से मांग की थी कि गाय को भारत का ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित किया जाए।

मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने गाय के सांस्कृतिक, पौराणिक और भावनात्मक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा था कि अगर समाज का एक बड़ा वर्ग गाय को मां के समान पूजता और सम्मान देता है, तो उसे राष्ट्रीय स्तर पर भी आधिकारिक दर्जा मिलना चाहिए।

रैली के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया था कि इस्लामी मान्यताओं के अनुसार भी समाज में शांति और दूसरों की आस्था का सम्मान करना महत्वपूर्ण है।

उन्होंने गोवंश के संरक्षण, सुरक्षा और संवर्धन के प्रति अपनी एकजुटता जताई थी।

ये खबर क्यों जरूरी: त्योहारों का मौसम खुशियां और आपसी भाईचारा बांटने का समय होता है।

ऐसे में मध्यप्रदेश मुस्लिम त्योहार कमेटी की यह पहल अत्यंत प्रासंगिक और जरूरी मानी जा रही है।

सोशल मीडिया के इस दौर में जहां एक छोटी सी अनजाने में बनाई गई रील या विवादित हरकत माहौल बिगाड़ सकती है, वहां युवाओं को संयम, कानून-पालन और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाना एक सकारात्मक कदम है।

इससे न केवल त्योहारों के दौरान शांति व्यवस्था बनी रहेगी, बल्कि समाज में आपसी विश्वास और सौहार्द को भी मजबूती मिलेगी।

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