MP heavy rain alert: देशभर में मानसून का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है।
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश के कारण नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं, जिससे बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।
दूसरी तरफ, हिमाचल प्रदेश में बारिश, भूस्खलन और हादसों में अब तक 219 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि राजस्थान में बारिश न होने से तापमान 40 डिग्री पार पहुंच गया है।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में 16 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

मध्य प्रदेश में भारी बारिश और बाढ़ के हालात
मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में एक मजबूत मानसूनी सिस्टम एक्टिव है, जिसके चलते डिंडौरी, पन्ना, रीवा, सतना और छतरपुर समेत कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
नर्मदा और मंदाकिनी जैसी प्रमुख नदियां अपने खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
जलभराव और सुरक्षा को देखते हुए मैहर, डिंडौरी और पन्ना जिलों में स्कूलों और आंगनवाड़ियों को बंद कर दिया गया है।
पन्ना जिले में केन, मिढ़ासन, व्यारमा और पतने नदियां विकराल रूप ले चुकी हैं।
पानी के दबाव को कम करने के लिए तेंदुघाट बांध के 5 गेट खोले गए हैं, जबकि उमरिया में संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जोहिला डैम के 2 गेट खोलकर पानी की निकासी की जा रही है।

बारिश की वजह से कई दुर्घटनाएं और आवागमन में रुकावट की खबरें भी सामने आ रही हैं:
* मैहर में रेस्क्यू: मर्जुआ नाले को पार करते समय एक ट्रक करीब 7 फीट गहरे पानी में फंस गया। पुलिस अधिकारी ने ग्रामीणों की मदद से रस्सा बांधकर ट्रक ड्राइवर और क्लीनर को सुरक्षित बाहर निकाला।
* सड़कें और तालाब क्षतिग्रस्त: सतना में सेमरावल नदी उफान पर होने से सेमरिया रोड बंद हो गई है। पवैया बिजली सब-स्टेशन में पानी भर गया है, वहीं अलहा तालाब की मेड़ टूटने से गांव की बस्ती में पानी घुस गया है।
* 30 गांवों का संपर्क टूटा: सीधी के रामपुर नैकिन में भवरसेन पहाड़ी से मलबा सड़क पर आ गिरा, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
मौसम विभाग ने निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर समेत 16 जिलों में अगले 24 घंटों के भीतर 4 से 8 इंच तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, गुना, विदिशा, रायसेन, सागर और सिवनी जैसे जिलों में भी अलर्ट जारी किया गया है।
उत्तर प्रदेश का हाल बेहाल
उत्तर प्रदेश के भी लगभग 13 जिले बाढ़ की चपेट में हैं।
राज्य की प्रमुख नदियां जैसे गंगा, घाघरा, शारदा, टोंस, सोन और मंदाकिनी खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं।
निचले इलाकों में पानी भर जाने से तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।
हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और हादसे
पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में इस मानसूनी सीजन में काफी तबाही हुई है।
बारिश, भूस्खलन (लैंडस्लाइड), अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) और सड़क हादसों के चलते अब तक 219 लोगों की मौत हो चुकी है।
चिंताजनक बात यह है कि इनमें से सबसे अधिक 131 मौतें बारिश के कारण हुई सड़क दुर्घटनाओं की वजह से हुई हैं।
राजस्थान में गर्मी की वापसी
पहाड़ी और मैदानी राज्यों में हो रही मूसलाधार बारिश के विपरीत, राजस्थान के ज्यादातर इलाकों में बारिश का दौर थम गया है।
बारिश न होने के कारण तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
श्रीगंगानगर में तापमान 40.1 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया, जिससे यह राज्य का सबसे गर्म शहर दर्ज किया गया।
Mp में मानसून के आंकड़े
मध्य प्रदेश में जून महीने में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी।
हालांकि जुलाई की शुरुआत में हुई अच्छी बारिश ने इस कमी को कुछ हद तक पूरा किया, लेकिन बीच-बीच में मानसून के सुस्त पड़ने से जून की पूरी भरपाई नहीं हो सकी।
इसके बावजूद जुलाई का कोटा पूरा हो चुका है और अगस्त के इस मजबूत सिस्टम से जल निकायों में जलस्तर काफी बढ़ गया है।
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