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“चोर-डाकू से भी बदतर हैं ये लोग…” धीरेंद्र शास्त्री से ‘शक्तिमान’ तक राम मंदिर दान चोरी पर भड़का इनका गुस्सा

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के राम मंदिर के दान पात्र से चढ़ावे की चोरी का एक बड़ा घोटाला उजागर हुआ है।

इस मामले के सामने आने के बाद न सिर्फ संतों और फिल्मी सितारों में भारी गुस्सा है, बल्कि देश की राजनीति भी पूरी तरह गरमा गई है।

इस मामले में अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कई बड़े चेहरों को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा है।

मुकेश खन्ना का फूटा गुस्सा: “भगवान को लूट रहे हैं ये लोग, चढ़ावा चढ़ाना बंद करो”

‘शक्तिमान’ और ‘भीष्म पितामह’ के किरदार से घर-घर में मशहूर हुए सीनियर एक्टर मुकेश खन्ना इस घटना से बेहद आहत हैं।

उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक लंबा पोस्ट लिखकर अपना गुस्सा जाहिर किया।

मुकेश खन्ना ने लिखा, “क्या आप जानते हैं कि मंदिरों में जो कैश आप चढ़ाते हैं, वह भगवान तक नहीं पहुंचता। वह बीच में ही गायब हो जाता है। चारों तरफ लूट मची हुई है। मैंने कभी कहा था कि देश में चोर, डाकू भरे पड़े हैं, लेकिन राम मंदिर के इन चोरों को मैं क्या नाम दूं? ये लोग चोर-डाकू से भी ऊपर हैं। ये सिर्फ भक्तों को नहीं, बल्कि खुद भगवान को लूट रहे हैं।”

मुकेश खन्ना ने भक्तों को एक अनोखी सलाह देते हुए कहा कि यदि घोटाला रोकना है तो मंदिर में पैसा और जेवर चढ़ाना ही बंद कर देना चाहिए। ना रहेगा बांस और ना बजेगी बांसुरी।

जब चढ़ावा ही नहीं चढ़ेगा, तो घोटाला भी नहीं होगा। उन्होंने कहा कि बिना पैसों के भी भगवान खुश रहेंगे।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बोले: “ये आज के रावण हैं, मछलियां पकड़ी गई हैं, अब मगरमच्छों की बारी”

बागेश्वर धाम के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी इस घटना पर बहुत कड़ी आपत्ति जताई है।

इस समय वे इंडोनेशिया में एक धार्मिक कार्यक्रम में हैं, लेकिन वहीं से उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी।

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि राम मंदिर के दान पात्र से सिर्फ पैसा चोरी नहीं हुआ है, बल्कि करोड़ों सनातनी भाई-बहनों का भरोसा और आस्था चोरी हुई है।

उन्होंने कहा, “अभी तो सिर्फ छोटी मछलियां पकड़ी गई हैं, पुलिस को उन मगरमच्छों को भी पकड़ना चाहिए जो इस पूरे खेल के पीछे हैं।”

रावण से की तुलना- उन्होंने इस चोरी की तुलना रामायण काल से करते हुए कहा कि रावण ने तो सिर्फ माता सीता का हरण किया था, जिसके बदले में उसका पूरा खानदान तबाह हो गया।

लेकिन जिन लोगों ने प्रभु राम के मंदिर का पैसा चुराया है, उन्हें भारत का कानून तो सजा देगा ही, साथ ही भगवान श्री राम का ऐसा महादंड मिलेगा कि उनकी पीढ़ियां याद रखेंगी।

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शास्त्री ने कहा कि देश का कानून मकड़ी के जाले जैसा है, जिसमें छोटे फंस जाते हैं और बड़े निकल जाते हैं, लेकिन भगवान के घर देर है अंधेर नहीं।

दिग्विजय सिंह का सीधा हमला: “चंपत राय पर हो FIR, RSS-विहिप को सिर्फ सत्ता से मतलब”

इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक रूप भी ले लिया है।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्र सरकार, आरएसएस (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) पर तीखे बाण चलाए।

प्रधानमंत्री पर मढ़ा दोष

दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था, इसलिए इस घोटाले की नैतिक जिम्मेदारी भी उन्हीं की बनती है।

उन्होंने मांग की कि चंपत राय को सिर्फ पद से हटाना काफी नहीं है, बल्कि उनके खिलाफ तुरंत Fir दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए।

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लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि, “चंपत राय संघ के प्रचारक रहे हैं, उनका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। वे सादगी का केवल नाटक करते हैं। मंदिर में आई चांदी की ईंटें, सोने के जेवर, कैश और विदेशों से मिले चंदे में भारी हेराफेरी की गई है। आरएसएस और विहिप को धर्म से कोई मतलब नहीं है, वे केवल सनातनियों को ठगकर सत्ता हासिल करना चाहते हैं।”

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प्राण प्रतिष्ठा पर भी उठाए सवाल

दिग्विजय सिंह यहीं नहीं रुके, उन्होंने मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय की बात उठाते हुए कहा कि उस धार्मिक अनुष्ठान में भी परंपराओं को तोड़ा गया।

नियमों के मुताबिक पूजा में जोड़े (पति-पत्नी) को बैठना चाहिए था, लेकिन वहां एक कुंवारा और एक तलाकशुदा व्यक्ति पूजन में बैठ गया।

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कांग्रेस का बड़ा प्लान: घर-घर जाकर बताएगी घोटाला

दिग्विजय सिंह ने एलान किया कि कांग्रेस इस मुद्दे को दबाने नहीं देगी।

उन्होंने बताया कि उज्जैन जिले की ही 609 पंचायतों में कांग्रेस ने विशेष मंडल कमेटियां बनाई हैं।

ये कमेटियां गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों को यह बताएंगी कि किस तरह राम मंदिर के नाम पर आए दान में चोरी की गई है। कांग्रेस इस मुद्दे को पूरे देश में भुनाने की तैयारी में है।

कैसे सामने आया पूरा मामला?

यह पूरा विवाद इसी महीने 7 जून को शुरू हुआ, जब राम मंदिर के दान पात्र में आने वाले चढ़ावे में हेराफेरी और अनियमितताओं की बात सामने आई।

मामला सीधे करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा था, इसलिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए इस मामले की जांच के लिए एक एसआईटी (SIT – विशेष जांच दल) का गठन कर दिया।

लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत को इस एसआईटी का प्रमुख बनाया गया। उन्होंने 23 जून को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी।

इस रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि मंदिर के दान-पुण्य और इसके मैनेजमेंट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है।

रिपोर्ट मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाई और नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की।

अब तक कौन-कौन हुआ गिरफ्तार?

पुलिस और एसआईटी की टीम ने इस मामले में अब तक 8 लोगों को धर दबोचा है। गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम इस प्रकार हैं:

  1.  अविनाश शुक्ला
  2.  अनुकल्प मिश्रा
  3.  लवकुश मिश्रा
  4.  मनीष कुमार यादव
  5.  करुणेश पांडेय
  6. रमाशंकर मिश्रा
  7.  श्रीवास्तव
  8.  रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू

फिलहाल इन सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया है और पुलिस इनसे कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि इस रैकेट के पीछे छुपे अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।

ट्रस्ट में बड़ा फेरबदल: चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा

इस घोटाले की आंच राम मंदिर के रख-रखाव की जिम्मेदारी संभालने वाले ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ तक पहुंच गई है।

बदनामी और बढ़ते दबाव के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।

इतना ही नहीं, मंदिर निर्माण के प्रभारी गोपाल राव को भी मैनेजमेंट की व्यवस्थाओं से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

अयोध्या का राम मंदिर देश के हर नागरिक के लिए गर्व और श्रद्धा का प्रतीक है।

ऐसे पवित्र स्थान पर इस तरह के बड़े घोटाले का सामने आना वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है।

अब देखना यह होगा कि एसआईटी की जांच कहां तक जाती है और क्या इस घोटाले के पीछे छिपे बड़े ‘मगरमच्छ’ सच में कानून के शिकंजे में आ पाते हैं या नहीं।

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