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NEET का पुराना सिस्टम खत्म: अगले साल से कंप्यूटर पर होगा एग्जाम, पेपर लीक रोकने के लिए सरकार का मास्टरप्लान

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

NEET UG 2026 Re-exam: मेडिकल की पढ़ाई का सपना देख रहे लाखों छात्रों के लिए एक बड़ी खबर आई है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की है कि नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) के मौजूदा स्वरूप में अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है।

सालों से चली आ रही पेन-पेपर और ओएमआर (OMR) शीट आधारित परीक्षा अब इतिहास बन जाएगी।

सरकार ने फैसला लिया है कि अगले साल यानी 2027 से नीट की परीक्षा भी इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा (JEE) की तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी।

यह कदम पिछले कुछ समय से नीट परीक्षा में लग रहे पेपर लीक के आरोपों और गड़बड़ियों को जड़ से खत्म करने के लिए उठाया गया है।

क्यों बदला जा रहा है सिस्टम?

वर्तमान में नीट परीक्षा ऑफलाइन होती है।

ऑफलाइन परीक्षा का मतलब है—लाखों प्रश्नपत्रों की छपाई, उन्हें ट्रकों के जरिए देशभर के हजारों केंद्रों तक पहुंचाना और फिर OMR शीट को वापस जमा करना।

इस लंबी प्रक्रिया में कई ‘लीक पॉइंट्स’ होते हैं। प्रिंटिंग प्रेस से लेकर ट्रांसपोर्ट एजेंसी तक, कहीं भी सेंधमारी का खतरा बना रहता है।

इसके विपरीत, ऑनलाइन परीक्षा (CBT) में फिजिकल पेपर की जरूरत नहीं होती।

प्रश्नपत्र सीधे सर्वर से परीक्षा के समय ही छात्र के कंप्यूटर स्क्रीन पर खुलता है।

इससे पेपर चोरी होने या लीक होने की गुंजाइश लगभग शून्य हो जाती है।

NEET UG 2026: रद्द हुई परीक्षा और 21 जून को दोबारा मौका

3 मई 2026 को हुई नीट परीक्षा में धांधली की खबरों के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।

जांच में पाया गया कि राजस्थान के सीकर, जयपुर और अन्य राज्यों में पेपर के कुछ हिस्से परीक्षा से पहले ही व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर वायरल हो गए थे।

माफियाओं ने एमबीबीएस छात्रों और गिरोहों के जरिए छात्रों तक ‘गेस पेपर’ पहुंचाए थे, जो असली पेपर से काफी हद तक मेल खा रहे थे।

छात्रों के भविष्य और परीक्षा की पवित्रता को देखते हुए, सरकार ने इस साल की परीक्षा को रद्द कर 21 जून को दोबारा परीक्षा (Re-Exam) कराने का फैसला किया है।

री-एग्जाम देने वाले छात्रों के लिए खास सुविधाएं

सरकार जानती है कि दोबारा परीक्षा देना छात्रों के लिए मानसिक और आर्थिक रूप से कठिन होता है।

इसलिए शिक्षा मंत्री ने छात्रों के लिए कई राहतों का ऐलान किया है:

  •  कोई फीस नहीं: दोबारा परीक्षा के लिए छात्रों से एक भी रुपया नहीं लिया जाएगा।
  •  मनपसंद शहर: छात्र अपनी सुविधा के अनुसार परीक्षा केंद्र का शहर चुन सकेंगे।
  • अतिरिक्त समय: परीक्षा की अवधि में 15 मिनट का इजाफा किया गया है ताकि छात्र तनावमुक्त होकर पेपर हल कर सकें।
  • मुफ्त यात्रा: छात्रों के आने-जाने के लिए विशेष प्रबंध किए जाएंगे ताकि उन पर आर्थिक बोझ न पड़े।
  • जल्द एडमिट कार्ड: 14 जून तक नए एडमिट कार्ड जारी कर दिए जाएंगे।

नॉर्मलाइजेशन: सबको मिलेगा बराबरी का मौका

जब परीक्षा कंप्यूटर पर कई शिफ्टों में होती है, तो किसी शिफ्ट का पेपर आसान और किसी का कठिन हो सकता है।

इसे बैलेंस करने के लिए सरकार नीट में भी ‘नॉर्मलाइजेशन’ प्रक्रिया लागू करेगी।

यह एक वैज्ञानिक तरीका है जिससे अलग-अलग कठिनाई स्तर वाले पेपर देने वाले छात्रों के अंकों को एक समान धरातल पर लाया जाता है।

इससे प्रतिभाशाली छात्रों को नुकसान नहीं होगा।

सीबीआई जांच और माफियाओं पर प्रहार

शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि एनटीए (NTA) के भीतर जो भी कमियां हैं, उन्हें सुधारा जा रहा है।

पेपर लीक मामले की जांच अब सीबीआई (CBI) कर रही है।

अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच की आंच उन अधिकारियों तक भी पहुंच सकती है जिन्होंने सिस्टम में सेंध लगाने में मदद की।

सरकार का संदेश साफ है—”छात्रों के हक पर डाका डालने वाले माफियाओं को बख्शा नहीं जाएगा।”

नीट और जेईई: अब कम होगा फासला

अब तक नीट और जेईई के बीच सबसे बड़ा अंतर ‘मोड ऑफ एग्जाम’ का था।

नीट के ऑफलाइन होने की वजह से सुरक्षा चुनौतियां अधिक थीं।

अब दोनों परीक्षाओं का स्तर डिजिटल होने से पारदर्शिता बढ़ेगी।

डिजिटल मोड न केवल सुरक्षित है बल्कि ‘एरर-फ्री’ (गलती रहित) भी है, क्योंकि इसमें ओएमआर भरने में होने वाली मानवीय गलतियों की संभावना खत्म हो जाती है।

23 लाख छात्रों और महज 1 लाख सीटों के बीच का यह मुकाबला अब तकनीक के सहारे और भी निष्पक्ष होने जा रहा है।

2026 का री-एग्जाम छात्रों के लिए एक ‘फेयर चांस’ है, वहीं 2027 से लागू होने वाला ऑनलाइन सिस्टम देश की मेडिकल शिक्षा प्रणाली में विश्वास बहाली की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

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