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चमत्कार! नेपाल में 9 दिन बाद सुरंग से जिंदा निकले 2 मजदूर, अंधेरे में करते रहे मंत्रों का जाप

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Nepal Flood Rescue: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है।

आपदा के 9 दिन बाद त्रिशूली-3 ‘A’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे 2 मजदूरों को रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।

सुरंग के भीतर से आ रही इंसानी आवाजों को सुनकर नेपाल सेना और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने यह सर्च ऑपरेशन चलाया था।

सुरक्षित निकाले गए मजदूरों की पहचान संजय साह और कबीर महर्जन के रूप में हुई है।

हालांकि, इस राहत के साथ ही चिंता अभी बनी हुई है क्योंकि सुरंग के अंदर करीब 40 से अधिक लोगों के फंसे होने की आशंका है।

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कंट्रोल रूम में फंसे फोरमैन की आपबीती: मंत्रों के जाप से बांधी उम्मीद

यह पूरी घटना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

30 वर्षीय मैकेनिकल फोरमैन संजय साह ने बताया कि जब बाढ़ का पानी और मलबा आया, तब वे कंट्रोल रूम में थे।

वे चाहते तो भाग सकते थे, लेकिन उन्होंने अपने साथियों को बचाने की कोशिश की।

अंधेरे में उम्मीद बनाए रखने के लिए वे लगातार मंत्रों का जाप करते रहे।

संजय के मुताबिक, सुरंग के निचले और गहरे हिस्सों में अभी भी कई लोग जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

आंकड़ों में तबाही: 1,282 मौतें और 5,300 से ज्यादा लापता

नेपाल में इस वक्त हालात बेहद गंभीर हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, आपदा में अब तक 1,282 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5,300 से ज्यादा लोग लापता हैं।

राहत और बचाव टीमों ने अब तक 12,038 लोगों को सुरक्षित निकाला है।

सबसे ज्यादा शव चितवन जिले से बरामद किए गए हैं, जिनमें से 95 की पहचान पूरी हो चुकी है।

मासूमों पर आपदा का कहर: 600 बच्चे और 22 शिक्षक लापता

इस त्रासदी में सबसे दुखद पहलू मासूम बच्चों से जुड़ा है। रसुवा और नुवाकोट जिलों में आई फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) के बाद से लगभग 600 बच्चे लापता बताए जा रहे हैं।

संचार सेवाएं ठप होने के कारण सटीक आंकड़ा जुटाने में मुश्किलें आ रही हैं।

इसके अलावा, बाढ़ की चपेट में आने से 22 शिक्षक और स्कूल कर्मचारी भी लापता हैं।

सरकार का बड़ा राहत पैकेज और अंतर्राष्ट्रीय मदद

आपदा की इस घड़ी में नेपाल सरकार ने प्रभावितों के लिए बड़े राहत पैकेज की घोषणा की है।

नष्ट हुए वाहनों और मशीनों के आयात पर कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है, लोन की किस्तों को आगे बढ़ाया गया है, और बीमा कंपनियों को 50% एडवांस क्लेम जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

आपदा में जान गंवाने वाले रेस्क्यू कर्मियों के परिवारों को 10 लाख नेपाली रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी मदद के हाथ उठे हैं; अमेरिकी टेक कंपनी एनवीडिया (NVIDIA) ने नेपाल को 1 करोड़ डॉलर (करीब 1.5 अरब नेपाली रुपये) की सहायता राशि प्रदान की है।

UNGA में उठेगा पर्वतीय क्षेत्रों पर जलवायु परिवर्तन का मुद्दा

इस बीच, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में जलवायु परिवर्तन और पर्वतीय क्षेत्रों पर इसके विनाशकारी प्रभावों का मुद्दा उठाने की तैयारी कर रहे हैं।

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