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खामेनेई की मौत से दहला पाकिस्तान: कराची में अमेरिकी दूतावास पर हमला, हिंसा में अब तक 35 की मौत

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Pakistan PoK Protest Khamenei: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की आग पाकिस्तान और भारत के कुछ हिस्सों तक पहुंच गई है।

ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता (Supreme Leader) अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर ने मुस्लिम जगत, खासकर शिया समुदाय को झकझोर कर रख दिया है।

पाकिस्तान में इस खबर के फैलते ही गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा।

कराची से इस्लामाबाद और लाहौर से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) तक, हर तरफ आगजनी, पत्थरबाजी और गोलीबारी का मंजर है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस देशव्यापी हिंसा में अब तक 35 लोगों की जान जा चुकी है।

कराची: अमेरिकी दूतावास बना जंग का मैदान

हिंसा की सबसे भयानक तस्वीर कराची से सामने आई।

यहां शिया समुदाय के हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और ‘इमामिया छात्र संगठन’ के नेतृत्व में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास (Consulate) के सामने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारे लगा रहे थे।

देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई और दूतावास परिसर में घुसने की कोशिश करने लगी।

हालात तब बिगड़ गए जब प्रदर्शनकारियों ने दूतावास के बाहर आगजनी शुरू कर दी।

सुरक्षा के लिए तैनात अमेरिकी मरीन और स्थानीय सुरक्षाबलों ने पहले आंसू गैस और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया,

लेकिन जब भीड़ ने दूतावास के अंदर घुसपैठ की कोशिश की, तो सुरक्षाबलों को गोलियां चलानी पड़ीं।

अकेले कराची में ही इस झड़प के दौरान करीब 23 लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हैं।

PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान में हाहाकार

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान में स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है।

सोमवार सुबह प्रदर्शनकारियों ने अपना गुस्सा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर निकाला।

गिलगित में संयुक्त राष्ट्र (UN) के कार्यालय, विशेष रूप से यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) के दफ्तर को आग के हवाले कर दिया गया।

स्कर्दू में गुस्साए लोगों ने पुलिस अधीक्षक (SP) के दफ्तर और कई अन्य सरकारी इमारतों को फूंक दिया।

यहां प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई सीधी मुठभेड़ में 7 लोगों की मौत हो गई।

अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है और पूरे इलाके में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है ताकि अफवाहों को रोका जा सके।

बड़े शहरों का हाल: ठप पड़ा कामकाज

  • इस्लामाबाद: पाकिस्तान की राजधानी में अमेरिकी दूतावास की ओर बढ़ रही रैली पर पुलिस ने भारी आंसू गैस के गोले दागे। यहां सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी कर दी गई है कि दूतावास ने अपने सभी वीजा अपॉइंटमेंट रद्द कर दिए हैं।

  • लाहौर: यहां भी अमेरिकी दूतावास के बाहर पत्थरबाजी हुई, जिसमें 10 लोगों के मारे जाने की अपुष्ट खबरें हैं। जर्मनी के दूतावास ने भी सुरक्षा कारणों से अपना कामकाज बंद कर दिया है।

  • पेशावर: सीमावर्ती शहर पेशावर में भी शिया समुदाय ने बड़ी रैली निकाली और अमेरिका विरोधी जमकर नारेबाजी की।

कश्मीर और पुणे तक: भारत में भी दिखा असर

खामेनेई की मौत का असर सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहा।

भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में भी लगातार दूसरे दिन विरोध प्रदर्शन देखने को मिले।

  • श्रीनगर: यहां के बेमिना इलाके में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया। भीड़ को हटाने के लिए सुरक्षाबलों को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। एहतियात के तौर पर कई लोगों को हिरासत में लिया गया है।

  • शोपियां और बांदीपोरा: इन इलाकों में शिया बाहुल्य बस्तियों में पूरी तरह से बाजार बंद रहे। हालांकि, सड़कों पर निजी वाहनों की आवाजाही सामान्य रखने की कोशिश की गई, लेकिन तनाव साफ देखा जा सकता था। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।

  • महाराष्ट्र: पुणे के कोंधवा इलाके में भी खामेनेई की याद में बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए और उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

  • लखनऊ में 3 दिन का शोक- पुराने लखनऊ में ईरानी नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर तीन दिनों का शोक मनाया गया। आज क्षेत्र के सभी प्रमुख बाजार पूरी तरह बंद रहे।

क्यों भड़का है शिया समुदाय?

अयातुल्ला अली खामेनेई न केवल ईरान के नेता थे, बल्कि दुनिया भर के शिया मुसलमानों के लिए एक बड़े धार्मिक मार्गदर्शक (Marja) भी थे।

उनकी मौत को समुदाय अपने अस्तित्व और धार्मिक अस्मिता पर हमले के रूप में देख रहा है।

पाकिस्तान की जनता का एक बड़ा हिस्सा अपनी सरकार की तटस्थता से नाराज है और वो चाहते हैं कि सरकार खुलकर ईरान का साथ दे।

यही कारण है कि जनता का गुस्सा अब अपनी ही सरकार और अमेरिकी ठिकानों पर निकल रहा है।

मौजूदा हालात

फिलहाल पाकिस्तान के कई प्रमुख शहरों में कर्फ्यू जैसे हालात हैं।

इंटरनेट बंद होने से सूचनाओं का आदान-प्रदान मुश्किल हो गया है।

अमेरिकी और यूरोपीय दूतावासों ने अपनी सुरक्षा बढ़ा दी है और नागरिकों को बाहर न निकलने की सलाह दी है।

पाकिस्तान में शोक और आक्रोश का माहौल है, जो आने वाले दिनों में और भी हिंसक रूप ले सकता है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि मिडिल ईस्ट की यह चिंगारी अब दक्षिण एशिया में एक बड़ी आग का रूप ले चुकी है।

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