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PM मोदी के काफिले में बड़ी कटौती! जानें उनकी सुरक्षा का ‘बजट’, एक घंटे का खर्च जान रह जाएंगे दंग

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

PM Modi Convoy Reduction: हाल ही में पीएम मोदी ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में कुछ ऐसे बदलाव किए हैं, जो न केवल प्रशासनिक सुधार हैं, बल्कि देश के लिए एक बड़ा संदेश भी हैं।

वैसे अक्सर लोग चर्चा करते हैं कि पीएम मोदी के साथ चलने वाली गाड़ियों के काफिले और उनके आसपास तैनात रहने वाले कमांडोज पर कितना पैसा खर्च होता है।

तो आइए जानते हैं इसके बारे में सब कुछ…

हर घंटे का सुरक्षा बजट: लाखों में है आंकड़ा

प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी विशेष सुरक्षा दल (SPG) के कंधों पर होती है। यह देश की सबसे हाई-टेक और ट्रेंड सुरक्षा एजेंसी है।

अगर हम बजट के आंकड़ों पर नजर डालें, तो साल 2022-23 के लिए एसपीजी का कुल बजट लगभग 385.95 करोड़ रुपये था।

इस गणित को अगर हम देखें, तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं:

  • प्रतिदिन का खर्च: लगभग 1.17 करोड़ रुपये।
  • प्रति घंटे का खर्च: लगभग 4.90 लाख रुपये।

यह भारी-भरकम राशि इसलिए खर्च की जाती है ताकि देश के शीर्ष नेतृत्व को हर पल, हर जगह अचूक सुरक्षा प्रदान की जा सके।

पीएम मोदी की पहल: काफिला हुआ 50% छोटा

हाल ही में हैदराबाद के एक दौरे के दौरान पीएम मोदी ने देश की जनता से ईंधन (पेट्रोल-डीजल) बचाने की अपील की थी।

लेकिन उन्होंने सिर्फ उपदेश नहीं दिया, बल्कि इसकी शुरुआत खुद से की।

प्रधानमंत्री ने एसपीजी को निर्देश दिया कि उनके काफिले में शामिल वाहनों की संख्या को 50 प्रतिशत तक कम कर दिया जाए।

इस फैसले के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

 1. ईंधन की बचत:

गाड़ियों की संख्या कम होने से सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी।

 2. जनता को राहत:

अक्सर वीवीआईपी मूवमेंट की वजह से सड़कों पर लंबा जाम लग जाता है। काफिला छोटा होने से ट्रैफिक मैनेजमेंट आसान होगा और आम लोगों को दिक्कत कम होगी।

 3. इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर:

पीएम ने यह भी कहा है कि अब काफिले में नई गाड़ियां खरीदने के बजाय धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को शामिल किया जाए।

पीएम के इस कदम का असर तुरंत देखने को मिला। उनके बड़ोदरा और गुवाहाटी दौरों के दौरान गाड़ियों की संख्या काफी सीमित रखी गई।

योगी सरकार ने भी अपनाया ‘मोदी मॉडल’

प्रधानमंत्री की इस अपील का असर उत्तर प्रदेश में भी दिखा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश जारी किए हैं कि उनके और उनके मंत्रियों के काफिले में भी गाड़ियों की संख्या 50% कम की जाए।

साथ ही, उन्होंने एक अनोखी पहल करते हुए कहा कि मंत्री, सांसद और विधायक सप्ताह में कम से कम एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट (बस या मेट्रो) का इस्तेमाल करें ताकि जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश जाए।

खुद उठाते हैं अपने खाने का खर्च

एक तरफ जहां उनकी सुरक्षा पर करोड़ों खर्च होते हैं, वहीं पीएम मोदी का निजी जीवन बेहद सादा है।

साल 2015 में एक आरटीआई (RTI) के जरिए यह खुलासा हुआ था कि प्रधानमंत्री अपने भोजन का खर्च स्वयं वहन करते हैं।

भारत सरकार उनके आवास, बिजली, फोन और आधिकारिक यात्राओं का खर्च तो उठाती है, लेकिन उनके किचन का बिल उनकी अपनी जेब से जाता है।

वे शुद्ध शाकाहारी और सादा भोजन पसंद करते हैं और अपनी दिनचर्या में योग और ध्यान को अनिवार्य रूप से शामिल करते हैं।

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देश के नाम 7 बड़ी अपीलें

पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए पीएम मोदी ने देशवासियों से 7 अहम बातें कही हैं:

  • ईंधन की बचत: कम से कम पेट्रोल-डीजल खर्च करें।
  • सोना न खरीदें: एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहे और रुपया मजबूत हो।
  • डिजिटल मीटिंग्स: वर्क फ्रॉम होम और वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा दें ताकि ऑफिस आने-जाने का खर्च और समय बचे।

प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा पर होने वाला खर्च उनके व्यक्तिगत ऐशो-आराम के लिए नहीं, बल्कि भारत के ‘प्रधान सेवक’ की गरिमा और सुरक्षा के लिए है।

वहीं, अपने काफिले को छोटा कर और अपना भोजन खुद के खर्च पर करके उन्होंने यह साबित किया है कि पद बड़ा होने के बावजूद सादगी और अनुशासन से रहा जा सकता है।

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