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नरवणे की किताब पर हंगामा: राहुल गांधी बोले- ‘पब्लिशर झूठ बोल रहा है, Amazon पर उपलब्ध है बुक’

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Rahul Gandhi on Naravane Book: पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की आत्मकथा— ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ (Four Stars of Destiny) पर इन दिनों जबरदस्त हंगामा मचा हुआ है।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस किताब की एक प्रति लहराते हुए सरकार को घेरा।

अब इस मामले में नया मोड़ यह आया है कि राहुल गांधी ने किताब के पब्लिशर ‘पेंगुइन रैंडम हाउस’ पर झूठ बोलने का गंभीर आरोप लगाया है।

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल, जनरल नरवणे ने अपनी इस किताब में सेना प्रमुख के तौर पर अपने कार्यकाल के अनुभवों को साझा किया है।

इसमें विशेष रूप से साल 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ हुई सैन्य झड़प और केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अग्निवीर योजना’ (Agneepath Scheme) को लेकर कुछ ऐसी बातें कही गई हैं, जिन्हें विपक्षी दल सरकार के खिलाफ एक हथियार के रूप में देख रहे हैं।

राहुल गांधी का दावा है कि सरकार इस किताब को जनता के सामने आने से रोकना चाहती है क्योंकि इसमें लिखे तथ्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्रालय के लिए ‘असुविधाजनक’ हो सकते हैं।

पब्लिशर या राहुल गांधी: कौन सच बोल रहा है?

विवाद उस समय और बढ़ गया जब पब्लिशिंग कंपनी ‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया’ ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि यह किताब अभी तक पब्लिश (प्रकाशित) ही नहीं हुई है।

कंपनी का कहना है कि उनके पास किताब के राइट्स सुरक्षित हैं, लेकिन न तो इसकी कोई छपी हुई कॉपी बाजार में आई है और न ही कोई डिजिटल वर्ज़न आधिकारिक तौर पर जारी किया गया है।

इस पर पलटवार करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि पब्लिशर पेंगुइन सरासर झूठ बोल रहा है।

राहुल गांधी ने दलील दी कि खुद जनरल नरवणे ने साल 2023 में एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने अपनी किताब का लिंक साझा करते हुए लिखा था कि “मेरी किताब अब Amazon पर उपलब्ध है, इसे यहां से खरीदें।”

राहुल गांधी ने सवाल उठाया, “मुझे नहीं लगता कि देश का एक पूर्व सेना प्रमुख झूठ बोलेगा। अगर नरवणे खुद कह रहे हैं कि किताब उपलब्ध है और Amazon पर इसका लिंक मौजूद है, तो पेंगुइन कंपनी यह दावा कैसे कर सकती है कि किताब छपी ही नहीं? यहां या तो जनरल सच बोल रहे हैं या फिर पब्लिशर सरकार के दबाव में झूठ का सहारा ले रहा है।”

दिल्ली पुलिस की FIR 

इस मामले ने कानूनी मोड़ तब लिया जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक FIR दर्ज की।

पुलिस का आरोप है कि किताब की एक अनधिकृत (Unauthorized) PDF फाइल सोशल मीडिया और कुछ वेबसाइट्स पर वायरल हो रही है।

पुलिस का कहना है कि चूंकि यह किताब एक संवेदनशील पद पर रहे व्यक्ति द्वारा लिखी गई है, इसलिए इसे प्रकाशित करने से पहले रक्षा मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) की जरूरत होती है, जो अभी तक नहीं मिली है।

Rahul Gandhi on Naravane Book

वहीं, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने इस मुद्दे पर राहुल गांधी पर कड़ा हमला बोला है।

उन्होंने कहा कि जब पब्लिशर खुद कह रहा है कि किताब बाजार में नहीं है, तो राहुल गांधी संसद को गुमराह करने के लिए कौन सी किताब दिखा रहे हैं?

उन्होंने इसे देश की सुरक्षा से खिलवाड़ बताते हुए स्पीकर से राहुल गांधी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

किताब में ऐसा क्या है, जिस पर मचा है बवाल?

राहुल गांधी ने संसद में किताब का एक पन्ना खोलकर दिखाया और दावा किया कि इसमें लिखा है कि जब चीन के साथ सीमा पर तनाव चरम पर था, तब प्रधानमंत्री ने आर्मी चीफ से कहा था कि “जो उचित समझो, वह करो।”

इसके अलावा, सबसे बड़ा विवाद ‘अग्निवीर योजना’ को लेकर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नरवणे ने अपनी किताब में लिखा है कि जिस रूप में अग्निपथ योजना लागू की गई, वह सेना के लिए पूरी तरह अप्रत्याशित थी और शुरू में इसे केवल ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ के रूप में सोचा गया था।

विपक्ष का कहना है कि सरकार इन टिप्पणियों को दबाने की कोशिश कर रही है।

जनरल नरवणे 2019 से 2022 तक देश के सेना प्रमुख रहे।

उन्होंने खुद माना है कि किताब मंजूरी के लिए रक्षा मंत्रालय के पास एक साल से ज्यादा समय से लंबित है।

अब सवाल यह है कि अगर आधिकारिक तौर पर किताब रिलीज नहीं हुई, तो इंटरनेट पर इसकी कॉपियां कहां से आईं? और क्या वास्तव में पब्लिशर सरकार के किसी गुप्त निर्देश के तहत काम कर रहा है?

फिलहाल, ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ एक रहस्यमयी किताब बन गई है, जो प्रकाशित होने से पहले ही भारतीय राजनीति का केंद्र बन चुकी है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इसे हरी झंडी देती है या यह विवाद और गहराता जाएगा।

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