Homeन्यूजराहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस: गर्भवती पत्रकार को धक्का देने...

राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस: गर्भवती पत्रकार को धक्का देने के मामले में FIR की मांग

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Rahul Gandhi SC notice: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य लोगों को एक अहम मामले में नोटिस जारी किया है।

यह मामला 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए एक मार्च से जुड़ा हुआ है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस मार्च के दौरान राहुल गांधी ने एक गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का दिया था।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के सामने सुनवाई के लिए रखा गया।

याचिकाकर्ता के वकील गौरव भाटिया ने कोर्ट को बताया कि इस मामले से जुड़ी एक पहले से लंबित याचिका में नया आवेदन दिया गया है।

आरोप लगाया गया है कि सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर या उसके आसपास भीड़भाड़ के दौरान एक महिला पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की की गई।

याचिका में मांग की गई है कि राहुल गांधी और इस घटना में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया जाए।

इसके साथ ही पीड़ित पत्रकार को मुआवजा दिए जाने की भी मांग उठाई गई है।

याचिका में क्या दावे किए गए हैं?

याचिका के मुताबिक, घटना के समय महिला पत्रकार ने भीड़भाड़ वाली जगह पर राहुल गांधी से धक्का न देने की अपील भी की थी।

इसके बावजूद अचानक उन्हें गेट की तरफ धक्का दे दिया गया, जिससे उनका संतुलन बिगड़ गया और वे गिरने लगीं।

गिरने से खुद को बचाने के लिए उन्हें अपने हाथों का सहारा लेना पड़ा।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि यह कोई भीड़ के कारण लगने वाला सामान्य धक्का नहीं था, बल्कि जानबूझकर की गई हरकत जैसी स्थिति थी।

यह सब सुरक्षाकर्मियों, साथी पत्रकारों और अन्य लोगों की मौजूदगी में हुआ।

 

राजनीतिक प्रतिक्रिया और वीडियो आया सामने

इस घटना के बाद राजनीति भी गरमा गई है।

बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी और राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने 13 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर एक महिला पत्रकार का अस्पताल से जुड़ा वीडियो शेयर किया था।

उन्होंने कहा कि वह महिला एक जिम्मेदार पत्रकार हैं, कोई सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर नहीं हैं।

वह एक ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए काम करती हैं, जिसके करोड़ों फॉलोअर्स हैं।

दिल्ली पुलिस ने दर्ज की हैं 4 एफआईआर

दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाले जाने के मामले में दिल्ली पुलिस पहले ही सख्त कदम उठा चुकी है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मार्च को लेकर दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में कुल 4 एफआईआर दर्ज की गई हैं।

ये मामले कनॉट प्लेस, बाराखंभा रोड, तिलक मार्ग और मंदिर मार्ग थानों में दर्ज किए गए हैं।

फिलहाल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस पर कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

#RahulGandhi #SupremeCourt #JournalistCase #DelhiPolice #SupremeCourtNotice 

- Advertisement -spot_img