Champat Rai Ram Mandir Trust: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर हलचल तेज हो गई है।
हाल ही में राम मंदिर के चढ़ावे में हेरफेर और चोरी के आरोपों के बाद ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय की वापसी को लेकर चर्चाएं गर्म हैं।
25 जून की रात राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।
इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बाद अगले ही दिन यानी 26 जून को चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
उनके साथ ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्रा ने भी पद छोड़ा था।

हालांकि, अब घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है और चंपत राय को दोबारा महासचिव बनाने की कवायद शुरू हो चुकी है।
विहिप की बैठक में मिली हरी झंडी
सूत्रों के अनुसार, 22 जुलाई को नई दिल्ली में विश्व हिंदू परिषद (VHP) की एक बड़ी राष्ट्रीय बैठक आयोजित की गई थी।
इस बैठक में विहिप की ओर से चंपत राय को क्लीनचिट दे दी गई।
विहिप का मानना है कि चंपत राय का पूरा जीवन संगठन और समाज सेवा के लिए समर्पित रहा है।
विहिप से हरी झंडी मिलने के अगले ही दिन 23 जुलाई को अयोध्या के प्रमुख संतों ने उनके समर्थन में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई।

मणिराम दास छावनी के तुलसीदास प्राकृतिक चिकित्सालय परिसर में हुई इस बैठक में महंत कमलनयन दास, स्वामी राजकुमार दास, महंत मिथिलेश नंदिनी शरण, महंत संजय दास और अखाड़ा परिषद के प्रतिनिधियों समेत कई दिग्गज संत शामिल हुए।
संतों ने स्पष्ट कहा कि राम मंदिर आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण तक चंपत राय का योगदान अतुलनीय रहा है।
दिवंगत अशोक सिंहल के साथ उन्होंने वर्षों तक इस आंदोलन को संभाला है।
संतों का मानना है कि उन पर लगे आरोप एक साजिश का हिस्सा हैं।

अगर पुलिस और एसआईटी (SIT) की जांच में वे निर्दोष साबित होते हैं, तो उन्हें सम्मानपूर्वक दोबारा महासचिव बनाया जाना चाहिए।
जनसंपर्क और समर्थन जुटाने की कोशिशें
क्लीनचिट और संतों का समर्थन मिलने के बाद चंपत राय अयोध्या में एक्टिव हो गए हैं।
वे लगातार अयोध्या के अलग-अलग मंदिरों और आश्रमों में जाकर संत-महंतों से मुलाकात कर रहे हैं।
6 अगस्त को भी उन्होंने श्रीरामवल्लभाकुंज पहुंचकर कई प्रमुख संतों से भेंट की और मंदिर की व्यवस्थाओं पर चर्चा की।
बताया जा रहा है कि चंपत राय के समर्थक और करीबी लोग मंदिर-मंदिर जाकर संतों से बातचीत कर रहे हैं और उनके पक्ष में माहौल बना रहे हैं।

इसके अलावा चंपत राय की सादगी और निष्ठा को साबित करने के लिए यह बात भी सामने रखी जा रही है कि 81 वर्ष की उम्र में भी उनका अपना कोई निजी बैंक खाता नहीं है।
उनके नाम पर पैतृक संपत्ति का जो छोटा सा हिस्सा है, उसे भी वे जल्द ही अपने भाई के नाम पंजीकृत कराने वाले हैं, ताकि वे पूरी तरह से संपत्ति-मुक्त रह सकें।
वर्तमान में चंपत राय चातुर्मास के दौरान अयोध्या के तीर्थ क्षेत्र भवन में मौन व्रत पर हैं।
माना जा रहा है कि व्रत पूरा होने के बाद SIT की रिपोर्ट आते ही उनकी संगठन में स्थिति और मजबूत होगी।

कौन संभालेगा जिम्मेदारी?
फिलहाल राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज को संभालने के लिए डॉ. कृष्णमोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है।
डॉ. कृष्णमोहन मंदिर की व्यवस्थाओं को देखने के साथ-साथ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अयोध्या शाखा में जाकर ट्रस्ट के खातों और लॉकर की जांच-परख कर रहे हैं।
19 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में नए महासचिव के नाम पर फैसला टाल दिया गया था। अब अगली बैठक 2 सितंबर को होनी तय हुई है।
हालांकि, जानकारों का कहना है कि 2 सितंबर की बैठक में भी नए महासचिव के नाम का आधिकारिक ऐलान होना मुश्किल है।

SIT की अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा, जिसमें 2 से 3 महीने का समय लग सकता है।
महासचिव पद की रेस में चंपत राय के अलावा विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा का नाम भी चर्चा में बना हुआ है।
यदि कानूनी प्रक्रिया में देरी होती है या कोई तकनीकी अड़चन आती है, तो बजरंग लाल बागड़ा के नाम पर भी विचार किया जा सकता है।

फिलहाल, अयोध्या का संत समाज और विहिप का बड़ा धड़ा चंपत राय के पक्ष में खड़ा नजर आ रहा है।
अब सभी की निगाहें SIT की अंतिम रिपोर्ट और ट्रस्ट की आगामी बैठकों पर टिकी हैं।
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