Supreme Court on Highway Safety: देश के राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर लगातार हो रहे सड़क हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है।
हाईवे किनारे अवैध रूप से खड़े वाहन और अतिक्रमण के कारण बढ़ती दुर्घटनाओं पर चिंता जताते हुए अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से तीखे सवाल किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि हाईवे की सुरक्षा और निगरानी के लिए सभी टोल प्लाजा पर CCTV कैमरे क्यों नहीं लगाए जा सकते?
इसके साथ ही कोर्ट ने इन कैमरों की लगातार देखरेख के लिए एक अलग मॉनिटरिंग रूम बनाने की बात कही है, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नजर रखी जा सके।

राजस्थान के फलोदी हादसे के बाद लिया एक्शन
यह पूरा मामला राजस्थान के फलोदी में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे से जुड़ा है।
भारतमाला हाईवे पर मटोदा गांव के पास एक तेज रफ्तार टेंपो ट्रैवलर सड़क किनारे खड़े ट्रेलर ट्रक से टकरा गया था।
इस भीषण हादसे में 15 लोगों की जान चली गई थी।
इस घटना की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस पर खुद संज्ञान (Suo Moto Action) लिया था।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट की मदद कर रहे वरिष्ठ वकील एएनएस नडकरनी ने बताया कि हाईवे पर वाहनों की अवैध पार्किंग और पक्के किनारों पर गाड़ियां खड़ी करना हादसों का एक प्रमुख कारण बन चुका है।

इस पर जस्टिस की बेंच ने कहा कि सड़क किनारे बेतरतीब तरीके से खड़े वाहन लोगों की जिंदगी के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।
NHAI और मंत्रालयों को निर्देश
NHAI ने अदालत को आश्वस्त किया कि हाईवे पर अनधिकृत पार्किंग को रोकने के लिए नियमित गश्त (Patrolling) के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि, कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, गृह मंत्रालय और तमिलनाडु सरकार ने अभी तक इस मामले में अपना जवाब (हलफनामा) दाखिल नहीं किया है।
अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को अगली सुनवाई (6 अक्टूबर) से पहले अपना हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है।

हाईवे पर पार्किंग और अवैध ढाबों पर पाबंदी
इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे:
* अवैध पार्किंग पर रोक: कोई भी भारी या व्यावसायिक वाहन हाईवे की मुख्य सड़क या पक्के किनारों पर खड़ा नहीं किया जा सकता। इन्हें केवल तय पार्किंग एरिया या ले-बाय (Lay-by) में ही पार्क करने की अनुमति है।
* अतिक्रमण और ढाबों पर रोक: नेशनल हाईवे के राइट ऑफ वे (Right of Way) में नए ढाबे, रेस्तरां या किसी भी व्यावसायिक निर्माण के संचालन पर रोक लगाई गई है।
* ब्लैकस्पॉट की पहचान: सड़क परिवहन मंत्रालय और NHAI को हादसों वाले संवेदनशील इलाकों (Blackspots) की पहचान कर उनकी सूची सार्वजनिक करने को कहा गया है।

मौतों के आंकड़े चिंताजनक
अदालत ने एक महत्वपूर्ण तथ्य रेखांकित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग देश की कुल सड़कों का केवल 2% हिस्सा हैं, लेकिन सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली कुल मौतों में इनकी हिस्सेदारी लगभग 30% है।
कोर्ट ने साफ किया कि प्रशासनिक लापरवाही या बुनियादी ढांचे की कमियों के कारण तेज रफ्तार हाईवे लोगों के लिए ‘खतरे का रास्ता’ नहीं बनने चाहिए।
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