Supreme Court Jantar Mantar protest site: सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, इंटरनेट सेवाएं बाधित करने और जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर एक अहम सुनवाई हुई।
अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है।
1. CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने के सख्त निर्देश
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने स्पष्ट निर्देश दिए कि 10 अक्टूबर को CJP के प्रदर्शन के दौरान के सभी सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए।
इसके अलावा, हिरासत केंद्रों (Detention Centers) के फुटेज को भी सुरक्षित रखने की मांग पर कोर्ट ने कहा कि कानून लागू करने वाली सभी एजेंसियों को अपने पास मौजूद सभी फुटेज संभालकर रखने चाहिए।

सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
2. जंतर-मंतर को सूची से हटाने पर केंद्र से जवाब तलब
पिछले 33 सालों से विरोध प्रदर्शनों का गवाह रहे जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने का मुद्दा भी अदालत में उठाया गया।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि जंतर-मंतर को तुरंत धरना स्थल के रूप में बहाल किया जाए।
इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि यह फैसला एक उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सरकार के इस फैसले की समीक्षा करेगा और देखेगा कि क्या इसके पीछे कोई ठोस और तर्कसंगत विचार था या नहीं।

3. महिला पत्रकारों और मीडिया पर चर्चा
सुनवाई के दौरान 3 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के समय महिला पत्रकारों के साथ हुई धक्का-मुक्की और उन पर हमलों का मुद्दा भी उठा।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आज के दौर में मोबाइल और माइक लेकर घूमने वाला हर व्यक्ति खुद को पत्रकार बताने लगा है, जिससे फ्रीलांस पत्रकारों और वीडियो रील्स बनाने वालों में फर्क करना मुश्किल हो गया है।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने एक महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि अगर वह जांच में सहयोग करती हैं, तो उन्हें गिरफ्तार न किया जाए।

4. इंटरनेट और मेट्रो बंदी पर सरकार की माफी और सफाई
इससे पहले केंद्र सरकार ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए इंटरनेट बंद करने के कदम पर सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगी थी।
गृह सचिव गोविंद मोहन की ओर से दाखिल हलफनामे में यह बात कही गई थी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने टिप्पणी की कि सरकार की यह माफी शर्तों के साथ प्रतीत होती है, इसलिए अदालत इसे सीधे तौर पर बिना शर्त नहीं मान रही है।

क्या है पूरा मामला?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने एसआईआर (SIR) के विरोध में और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर जोरदार प्रदर्शन का ऐलान किया था।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रदर्शन को रोक दिया था।
पार्टी के शीर्ष नेताओं अभिजित दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को विमान से ही हिरासत में ले लिया गया था, जो बाद में मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर रिहा हुए।

इस दौरान कई राजनीतिक हस्तियों और हजारों प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद से यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
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