Opposition SIR petition flaws: देश की सियासत में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर घमासान मचा हुआ है।
राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव समेत 11 प्रमुख विपक्षी नेताओं ने वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हालांकि, याचिका दायर होते ही इसमें तकनीकी और कानूनी अड़चनें सामने आ गईं।
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने इस याचिका में करीब 14 तरह की खामियां निकाली हैं, जिसके बाद विपक्ष के कानूनी सलाहकारों और नेताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

रजिस्ट्री ने गिनाईं याचिका की खामियां: कोर्ट फीस से लेकर धुंधले दस्तावेजों तक का जिक्र
न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने पाया कि याचिका में कई बुनियादी प्रक्रियागत गलतियां हैं।
सबसे पहले, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आईडी कार्ड की कॉपी काफी धुंधली है, जिसे साफ तौर पर पढ़ने में दिक्कत आ रही है।
रजिस्ट्री ने वकील से इसकी स्पष्ट कॉपी तुरंत उपलब्ध कराने को कहा है।
इसके अलावा, सबसे बड़ी तकनीकी भूल यह सामने आई कि इस याचिका के साथ जमा की जाने वाली निर्धारित कोर्ट फीस में 220 रुपए कम दिए गए थे।
जांच के दौरान यह भी पता चला कि याचिका के साथ संलग्न किए गए कुछ दस्तावेज या तो पूरी तरह से गायब हैं या फिर उनके पन्ने इतने खराब और फटे हुए हैं कि वे पढ़ने लायक नहीं बचे हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि इस याचिका पर 9 याचिकाकर्ताओं ने लिखित सहमति (कंसेंट) ही नहीं दी थी, जो कि कोर्ट में मामला दर्ज करने के लिए एक अनिवार्य प्रक्रिया होती है।

विपक्ष की याचिका में निकली कुल 14 बड़ी गलतियां
* 1. याचिका के मुख्य फॉर्म में जिस पर केस किया गया था (प्रतिवादी), उसका नाम ही गलत लिखा हुआ था।
* 2. याचिका के पेज नंबर 9 पर दूसरे पक्ष की जानकारी गलत तरीके से दर्ज की गई थी।
* 3. याचिका दायर करने वाले 9 लोगों (नंबर 3 से 11) के वकालतनामा (साइन किए हुए कागजात) कोर्ट में नहीं मिले।
* 4. पुरानी याचिका से इस नई याचिका की समानता (सिमिलरिटी) दिखाने वाला जरूरी पैराग्राफ गायब था।
* 5. याचिका में जहां कोर्ट से राहत या मांग की जाती है, उस हिस्से में दूसरे पक्ष का नंबर गलत लिखा था।
* 6. चुनाव आयोग के 24 जून 2025 के फैसले की कॉपी इस याचिका के साथ नहीं लगाई गई थी।
* 7. दस्तावेज के अनुलग्नक P2 (Annexure P2) पर जो तारीख लिखी थी, वह मेल नहीं खा रही थी।
* 8. याचिका के पेज नंबर 57 और 64 की कलरफुल (रंगीन) कॉपी जमा नहीं की गई थी।
* 9. अनुलग्नक P5 में केस का नंबर ही गलत दर्ज था।
* 10. अनुलग्नक P6 के लिए कोर्ट में अलग से पेन ड्राइव की मांग की गई थी।
* 11. कोर्ट में जमा होने वाली फीस में 220 रुपए कम दिए गए थे।
* 12. मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र (ID Card) की साफ और स्पष्ट कॉपी मांगी गई थी।
* 13. आम और निजी लोगों को प्रतिवादी (केस में दूसरा पक्ष) क्यों बनाया गया है, इसकी वजह साफ करने को कहा गया था।
* 14. दस्तावेजों में छपाई धुंधली होना, फॉन्ट बहुत छोटा होना, पन्ने गायब होना, स्थानीय भाषा के पन्ने होना और पेज नंबरिंग में गड़बड़ी जैसी कई आपत्तियां दर्ज थीं।

कौन-कौन हैं पक्षकार और क्या है मुख्य मांग?
यह याचिका 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी।
इसमें भारत निर्वाचन आयोग (ECI), मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) को पक्षकार बनाया गया है।
विपक्ष की इस याचिका में एक मुख्य मांग यह रखी गई है कि सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति (इंडिपेंडेंट कमेटी) बनाई जाए।
इस समिति में तकनीकी विशेषज्ञों और देश के प्रतिष्ठित नागरिकों को भी शामिल करने की बात कही गई है।
विपक्ष चाहता है कि यह कमेटी तय समय सीमा के भीतर एसआईआर प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों और उसमें किए गए सभी बदलावों का निष्पक्ष ऑडिट करे।

सुप्रीम कोर्ट में विपक्ष की 7 मुख्य मांगें
1. चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती
* राहुल गांधी समेत 11 नेताओं ने SIR से जुड़े चुनाव आयोग (EC) के फैसलों को कोर्ट में चुनौती दी है।
2. पूरे सरकारी रिकॉर्ड की मांग
* SIR से जुड़ी सभी फाइलें, एजेंडा, मीटिंग के मिनट्स, आपत्तियां और ECINET-ERONET लॉग की पूरी जानकारी मांगी गई है।
3. फैसलों की कानूनी जांच
* चुनाव आयोग के फैसलों की जांच संविधान के अनुच्छेद 324, 2023 के कानून और ऐतिहासिक टी.एन. शेषन फैसले के आधार पर करने की मांग की गई है।
4. बिना सुनवाई वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर रोक
* मांग की गई है कि बिना कोई आधिकारिक नोटिस दिए और बिना पक्ष सुने किसी भी वोटर का नाम लिस्ट से न हटाया जाए।
5. हटाए गए नामों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करना
* बूथ वार (Booth-wise) सूची, नाम हटाने की असली वजह और जनसांख्यिकी (Demographic) डेटा को सार्वजनिक/पब्लिश करने की मांग की गई है।
6. वोटर डेटा का निष्पक्ष ऑडिट
* सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुआई में कमेटी बनाकर ECINET-ERONET समेत पूरे वोटर डेटा का ऑडिट कराने की मांग की गई है।
7. SIR प्रक्रिया पर तुरंत रोक
* जब तक कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक जारी SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक (Stay Order) लगाई जाए।

सुप्रीम कोर्ट तक मार्च और पुलिस की कार्रवाई
इस कानूनी लड़ाई से एक दिन पहले, यानी सोमवार को राहुल गांधी और कई अन्य विपक्षी नेता संसद भवन से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च करते हुए पहुंचे थे।
इस मार्च के दौरान भारी भीड़ और सुरक्षा पाबंदियों के बीच दिल्ली पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए दो एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये मामले बाराखंभा रोड और तिलक मार्ग थानों में दर्ज किए गए हैं, जो विरोध-प्रदर्शन के दौरान नियमों के उल्लंघन से जुड़े हैं।

CJI की दो टूक: “दिल्ली में प्रदर्शन मेरा काम नहीं, कोर्ट के दरवाजे सबके लिए खुले”
इससे पहले, इस पूरे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का रुख भी काफी चर्चा में रहा।
इंडिया ब्लॉक (INDIA Bloc) के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सीजेआई को पत्र लिखकर मिलने का समय मांगा था।
हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने इस मांग को खारिज कर दिया था और साफ कहा था कि विचाराधीन मामलों पर उनसे चर्चा करना न्यायिक मर्यादा के खिलाफ है।
सीजेआई ने विज्ञान भवन में एक कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट किया था कि दिल्ली में प्रदर्शन और पाबंदियां उनका विषय नहीं हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं और कोई भी नागरिक या जनप्रतिनिधि सीधे याचिका दाखिल कर सकता है, जिसके बाद विपक्ष ने कानूनी रास्ता चुना।

राहुल गांधी के घर ‘चाय पर चर्चा’ और आगे की रणनीति
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार शाम को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने सुनहरी बाग रोड स्थित आवास पर एक अहम बैठक बुलाई है।
इस ‘हाई टी’ मीटिंग में सभी विपक्षी सांसदों, सिविल सोसाइटी के सदस्यों और छात्र संगठनों को आमंत्रित किया गया है।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वोट चोरी के खिलाफ संयुक्त राष्ट्रव्यापी विरोध-प्रदर्शन की रणनीति तैयार करना है।
इसके साथ ही, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आगे के राजनीतिक और कानूनी कदमों पर भी विस्तार से मंथन किया जाएगा।

इससे पहले दोपहर में विपक्षी सांसदों ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अपने तेवर और तीखे कर दिए हैं।
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