Suvendu Adhikari West Bengal First CM: 9 मई 2026 का दिन पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।
कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में जनसैलाब के बीच सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
सुवेंदु न केवल राज्य के नए मुखिया बने हैं, बल्कि वे बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पहले मुख्यमंत्री भी बन गए हैं।

बांग्ला में शपथ और प्रधानमंत्री का सम्मान
सुवेंदु अधिकारी ने अपनी मातृभाषा बांग्ला में ईश्वर के नाम की शपथ ली।
जैसे ही उन्होंने ‘आमी सुवेंदु अधिकारी…’ (मैं सुवेंदु अधिकारी…) कहकर शपथ पूरी की, पूरा मैदान ‘जय श्री राम’ और ‘वंदे मातरम’ के नारों से गूंज उठा।
शपथ लेने के तुरंत बाद सुवेंदु अधिकारी सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास गए और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
प्रधानमंत्री ने उन्हें गले लगाया और पीठ थपथपाकर उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

बुजुर्ग कार्यकर्ता के सामने झुके पीएम मोदी
इस समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने मंच पर बीजेपी के 98 साल के सबसे पुराने कार्यकर्ता माखनलाल सरकार को आमंत्रित किया गया था।
जैसे ही माखनलाल जी मंच पर आए, प्रधानमंत्री मोदी खुद अपनी कुर्सी से उठकर उनके पास गए।
पीएम ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और फिर झुककर उनके पैर छुए।

98 साल के बुजुर्ग कार्यकर्ता माखनलाल सरकार अपनी आंखों के आंसू नहीं रोक पाए और उन्होंने काफी देर तक प्रधानमंत्री को गले लगाए रखा।
यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं।

शक्ति प्रदर्शन: जुटे 20 राज्यों के मुख्यमंत्री
बंगाल का यह शपथ ग्रहण समारोह केवल एक राज्य का कार्यक्रम नहीं, बल्कि बीजेपी का बड़ा शक्ति प्रदर्शन भी नजर आया।
इस मौके पर गृहमंत्री अमित शाह के साथ-साथ देश के 20 अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्री और एनडीए (NDA) के तमाम दिग्गज नेता मौजूद थे।
सुवेंदु के साथ दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निषिथ प्रमाणिक और अशोक लाहिरी जैसे बड़े चेहरों को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलने की चर्चा है।

गुरुदेव टैगोर को श्रद्धांजलि
आज का दिन इसलिए भी खास था क्योंकि आज ‘पोचीशे बोइशाख’ यानी गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती थी।
प्रधानमंत्री ने मंच पर सबसे पहले टैगोर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।
पीएम ने ट्वीट कर गुरुदेव को याद करते हुए कहा कि वे एक असाधारण लेखक, दार्शनिक और भारत की आत्मा की शाश्वत आवाज थे।
उनके विचार हमेशा हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे।

कौन हैं सुवेंदु अधिकारी? संन्यासी से मुख्यमंत्री तक का सफर
सुवेंदु अधिकारी का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।
1970 में पूर्व मेदिनीपुर के कोंतली गांव में जन्मे सुवेंदु का झुकाव बचपन से ही धर्म और अध्यात्म की ओर था। वे हर शनिवार को रामकृष्ण मिशन जाते थे।
उनकी धार्मिक प्रवृत्ति इतनी गहरी थी कि उनके माता-पिता को डर लगने लगा था कि कहीं उनका बेटा घर छोड़कर संन्यासी न बन जाए।

बचपन में सुवेंदु अपने गुल्लक के पैसे भी चुपचाप मिशन में दान कर आते थे।
हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था। सुवेंदु ने संन्यास के बजाय जनसेवा और राजनीति का रास्ता चुना।
उन्होंने फैसला किया कि वे विवाह नहीं करेंगे और अपना पूरा जीवन बंगाल की जनता के लिए समर्पित कर देंगे।
80 के दशक के अंत में छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका सफर आज मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गया है।

बंगाल के लिए नई उम्मीदें
सुवेंदु अधिकारी के सामने अब बंगाल की कानून-व्यवस्था को सुधारने, विकास कार्यों को गति देने और युवाओं के लिए रोजगार पैदा करने की बड़ी चुनौतियां हैं।
अपनी सादगी और जमीनी पकड़ के लिए मशहूर सुवेंदु ने संकेत दिया है कि उनकी सरकार ‘सोनार बांग्ला’ के सपने को सच करने के लिए दिन-रात काम करेगी।
