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TCS नासिक विवाद: क्या कॉर्पोरेट ऑफिस के अंदर चल रहा था धर्मांतरण और उत्पीड़न का खेल? जानें पूरी सच्चाई

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

TCS Nashik Conversion Case: महाराष्ट्र के नासिक से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे देश के कॉर्पोरेट जगत और समाज को झकझोर कर रख दिया है।

देश की सबसे बड़ी IT कंपनियों में शुमार ‘टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज’ (TCS) के नासिक स्थित दफ्तर में काम करने वाली कई महिला कर्मचारियों ने अपने ही सीनियर अधिकारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।

इन आरोपों में यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ और सबसे चौंकाने वाला ‘धार्मिक धर्मांतरण’ (Religious Conversion) के लिए मजबूर करना शामिल है।

पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया है और एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।

घटना का बैकग्राउंड: कैसे शुरू हुआ यह सिलसिला?

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कोई एक दिन की घटना नहीं है।

पीड़ित महिलाओं का कहना है कि यह उत्पीड़न पिछले 2 से 3 साल से (लगभग 2022 से) लगातार चल रहा था।

नासिक के ‘मुंबई नाका’ और ‘देवलाली’ पुलिस स्टेशनों में कुल 9 FIR दर्ज की गई हैं।

इन शिकायतों में महिलाओं ने बताया है कि कैसे उनके टीम लीडर्स और इंजीनियरों ने अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल किया।

पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें करियर में तरक्की, अच्छी सैलरी और नौकरी बचाने का लालच दिया जाता था।

इसके बदले में उनसे उनकी धार्मिक पहचान छोड़ने या दूसरे धर्म के रीति-रिवाजों को मानने का दबाव बनाया जाता था।

आरोप: नमाज़, रोज़ा और मानसिक दबाव

महाराष्ट्र के मंत्री और बीजेपी नेता गिरीश महाजन ने इस मामले में दखल देते हुए गंभीर दावे किए हैं।

उन्होंने बताया कि कुछ मुस्लिम कर्मचारियों और अधिकारियों ने युवा हिंदू लड़कियों को अपने जाल में फंसाया।

उन पर कथित तौर पर नमाज़ पढ़ने और रोज़ा रखने के लिए दबाव डाला गया।

सिर्फ महिलाएं ही नहीं, बल्कि एक पुरुष कर्मचारी ने भी शिकायत दर्ज कराई है।

उसका आरोप है कि उसे मांसाहारी खाना खाने के लिए मजबूर किया गया और उसका ‘ब्रेनवॉश’ करने की कोशिश की गई ताकि वह अपना धर्म बदल ले।

यह मामला कार्यस्थल पर एक विशेष धार्मिक माहौल बनाकर दूसरों को प्रताड़ित करने का संकेत देता है।

यौन उत्पीड़न और ‘लव ट्रैप’ के आरोप

FIR में दुष्कर्म (Rape) का एक मामला भी शामिल है।

आरोपी, जो पहले से शादीशुदा था, उसने कथित तौर पर एक महिला कर्मचारी को प्रेम-संबंध के झांसे में फंसाया और उसका यौन शोषण किया।

अन्य महिलाओं ने छेड़छाड़ और अश्लील टिप्पणियों के आरोप लगाए हैं।

पीड़ितों का कहना है कि उनके पहनावे और उनकी निजी जिंदगी (जैसे वैवाहिक समस्याएं) को लेकर उन्हें टॉर्चर किया जाता था।

कौन हैं आरोपी?

पुलिस ने अब तक जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनके नाम सामने आए हैं:

  1. आसिफ अंसारी
  2. शफी शेख
  3. शाहरुख कुरैशी
  4. रजा मेमन
  5. तौसीफ अत्तार
  6. अश्विन चैनानी

इसके अलावा, पुलिस एक HR अधिकारी की भी तलाश कर रही है, जिस पर शिकायतों को नजरअंदाज करने का आरोप है।

कंपनी (TCS) का क्या रुख है?

विवाद बढ़ने के बाद TCS ने अपना आधिकारिक बयान जारी किया है।

कंपनी ने कहा कि उनकी ‘ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ है, यानी वे किसी भी तरह के उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं करते।

जिन कर्मचारियों के नाम जांच में आए हैं, उन्हें सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है।

हालांकि, आलोचकों और शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कंपनी के इस रवैये को ‘लापरवाह’ बताया है।

उनका सवाल है कि जब महिलाएं आंतरिक रूप से HR को शिकायत कर रही थीं, तब सालों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

SIT और कानूनी कार्रवाई

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए नासिक पुलिस ने एक SIT (विशेष जांच दल) बनाई है, जिसमें 12 सदस्य और एक ACP रैंक के अधिकारी शामिल हैं।

पुलिस तकनीकी सबूतों, जैसे ईमेल, चैट्स और ऑफिस के फुटेज की जांच कर रही है।

फिलहाल, आरोपी पुलिस और न्यायिक हिरासत में हैं।

नासिक का यह मामला न केवल अपराध का है, बल्कि यह कॉर्पोरेट संस्कृति में कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी बड़े सवाल खड़े करता है।

क्या बड़ी कंपनियों के आंतरिक शिकायत तंत्र (Internal Complaints Committee) विफल हो रहे हैं?

इस मामले की पूरी सच्चाई SIT की विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी, लेकिन फिलहाल इसने महाराष्ट्र की राजनीति और सामाजिक माहौल में तनाव पैदा कर दिया है।

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