Giribala Singh CBI Remand: भोपाल में मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।
कोर्ट ने ट्विशा की सास (रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह) और पति समर्थ सिंह को 5-5 दिनों की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है।
जांच एजेंसी की मांग पर आरोपियों के वकीलों ने कोई विरोध नहीं जताया, जिसके बाद जज शोभना भलावे ने रिमांड को हरी झंडी दे दी।
अब सीबीआई इन दोनों को आमने-सामने बैठाकर सच उगलवाएगी।
क्या है पूरा मामला?
बीती 12 मई की रात भोपाल के बाग मुगलिया एक्सटेंशन स्थित ससुराल में एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी।
शुरुआत में इस मामले की जांच स्थानीय भोपाल पुलिस कर रही थी। लेकिन ट्विशा के मायके वालों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और मामले में पक्षपात के आरोप लगाए।
विवाद बढ़ने और परिजनों की मांग के बाद इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
सीबीआई ने 25 मई की रात को इस मामले में औपचारिक तौर पर केस (FIR) दर्ज किया था।
‘टनल व्यू’ तकनीक से खुलेगा मौत का राज
सीबीआई इस केस को सुलझाने के लिए आधुनिक ‘टनल व्यू’ इन्वेस्टिगेशन तकनीक का सहारा ले रही है।
इसके तहत ट्विशा की मौत से ठीक पहले के आखिरी कुछ घंटों का एक वर्चुअल रीक्रिएशन (डिजिटल ढांचा) तैयार किया जा रहा है।
इसका फायदा यह होगा कि जांच अधिकारियों को मिनट-टू-मिनट यह समझने में मदद मिलेगी कि घटना वाली रात असल में घर के भीतर क्या हुआ था, कौन कहां मौजूद था और ट्विशा की मौत कैसे हुई।
सबूत मिटाने के आरोप में सास की गिरफ्तारी
जांच के सिलसिले में सीबीआई की टीम 26 मई को पहली बार पूर्व जज गिरिबाला सिंह के घर पहुंची थी।
इसके बाद 28 मई को एक बार फिर टीम ने वहां करीब 7 घंटे तक कड़ी पूछताछ की।
तीन दिनों में कुल 10 घंटे की पूछताछ और घटनास्थल की बारीकी से जांच (स्पॉट वेरिफिकेशन) करने के बाद सीबीआई को मजबूत अंदेशा हुआ कि घटना के बाद सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई है।
इसी आरोप में सीबीआई ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर लिया। ट्विशा का पति समर्थ पहले से ही सीबीआई की हिरासत में है।
फरार रहने के दौरान समर्थ कहां-कहां छुपा था और किसने उसकी मदद की, अब इसकी भी परतें खोली जाएंगी।
चेहरे पर कोई तनाव नहीं, कोर्ट में दिखे बेफिक्र
अदालत के भीतर जब गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ को कोर्ट के कटघरे में एक साथ खड़ा किया गया, तो दोनों के चेहरों पर किसी तरह का पछतावा या कानूनी कार्रवाई का डर नहीं दिखा।
वे बिना किसी तनाव के आपस में बातचीत करते नजर आए। कोर्ट में पेशी से पहले समर्थ का जेपी अस्पताल में और गिरिबाला सिंह का मेनिट (MANIT) परिसर में मेडिकल चेकअप कराया गया था।
डिजिटल सुरागों पर टिकी जांच
सीबीआई की टीम अब पूरी तरह से वैज्ञानिक और डिजिटल गवाहों पर भरोसा कर रही है।
दोनों आरोपियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल टावर लोकेशन और अन्य डिजिटल सबूतों को खंगाला जा रहा है।
जांच टीम यह पता लगा रही है कि मौत की रात घर के फोन से किन-किन लोगों को कॉल किए गए थे और क्या शव मिलने के बाद क्राइम सीन (घटनास्थल) की चीजों को जानबूझकर बदला गया था।
आने वाले दिनों में परिवार के अन्य करीबियों, रिश्तेदारों और घर के नौकरों से भी पूछताछ की जा सकती है।
