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मंत्री के बेटे पर रेप और धमकी का आरोप: नए साल की पार्टी में क्या हुआ था? पीड़िता की मां ने बताई पूरी कहानी

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Bandi Sanjay Kumar son pocso case: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जो देश भर में चर्चा का विषय बन गया है।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार के 25 साल के बेटे साई भागीरथ पर एक 17 साल की नाबालिग लड़की से छेड़छाड़, जबरन शराब पिलाने और यौन उत्पीड़न (रेप) का गंभीर आरोप लगा है।

इस मामले में पुलिस ने भागीरथ को गिरफ्तार कर लिया है और कोर्ट ने उसे 29 मई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

आइए इस पूरे मामले को सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं।

31 दिसंबर की रात फार्महाउस पर क्या हुआ था?

पूरी घटना की शुरुआत 31 दिसंबर 2025 की रात से होती है। नए साल (New Year 2026) का जश्न मनाने के लिए 17 साल की पीड़िता और उसके कुछ दोस्तों ने मिलकर एक पार्टी रखी थी।

हैदराबाद के पास मोइनाबाद इलाके में स्थित एक फार्महाउस पर यह जश्न चल रहा था।

पार्टी में नाबालिग लड़की के साथ एक और लड़की और पांच लड़के मौजूद थे।

इन्हीं लड़कों में केंद्रीय मंत्री का बेटा साई भागीरथ भी शामिल था।

आरोप है कि पार्टी के दौरान साई भागीरथ ने काफी ज्यादा शराब पी रखी थी। नशे में धुत होकर उसने नाबालिग लड़की पर भी शराब पीने का भारी दबाव बनाया।

जब लड़की ने इसका विरोध किया, तो भागीरथ उसके साथ बदतमीजी और छेड़छाड़ करने लगा। उसने लड़की को गलत तरीके से छुआ और शारीरिक संबंध बनाने के लिए उकसाने लगा।

फार्महाउस पर लड़की खुद को बिल्कुल अकेला और असहाय महसूस कर रही थी, जिसके कारण वह ज्यादा विरोध नहीं कर पाई।

पार्टी खत्म होने के बाद पीड़िता ने रोते हुए अपनी मां को सारी आपबीती सुनाई।

जब परिवार ने इस मामले में पुलिस के पास जाकर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, तो राजनीतिक रसूख के कारण उन पर केस न करने का भारी दबाव डाला गया।

यही वजह रही कि घटना के तुरंत बाद एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी।

इंस्टाग्राम से हुई थी दोस्ती, फिर शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का खेल

इस मामले की कानूनी लड़ाई लड़ रही छात्र संस्था ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट डेमोक्रेटिक एसोसिएशन’ (AIDSO) की लीगल टीम से मिले दस्तावेजों के मुताबिक, पीड़िता की मां ने पुलिस को दिए बयान में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

मां का कहना है कि जून 2025 के आसपास उनकी बेटी की मुलाकात साई भागीरथ से हुई थी।

इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम (Instagram) के जरिए दोनों बातचीत करने लगे और धीरे-धीरे उनकी दोस्ती गहरी हो गई।

भागीरथ ने लड़की को झांसा दिया कि जैसे ही वह बालिग (18 साल की) हो जाएगी, वह उससे शादी कर लेगा।

लड़की का भरोसा जीतने के बाद भागीरथ का असली चेहरा सामने आने लगा। वह लड़की को इमोशनली ब्लैकमेल करने लगा।

इतना ही नहीं, वह लड़की की पढ़ाई-लिखाई और उसके करियर से जुड़े फैसलों पर भी अपनी मर्जी थोपने लगा और उसे रोकने-टोकने लगा।

मां का आरोप है कि भागीरथ उनकी बेटी को कई बार अलग-अलग प्राइवेट अपार्टमेंट्स और फार्महाउस में ले गया, जहां उसका यौन उत्पीड़न किया गया।

नए साल की रात हुई घटना के कुछ ही दिन बाद, यानी 7 जनवरी 2026 को भागीरथ ने अचानक लड़की से सारे रिश्ते तोड़ दिए।

कोर्ट जाने पर मिलीं धमकियां, मंत्री से मुलाकात का भी दावा

जब लड़की की हालत बिगड़ने लगी, तो परिवार ने मार्च और अप्रैल 2026 के बीच वकीलों और कोर्ट से कानूनी मदद लेने की कोशिश की।

आरोप है कि जैसे ही आरोपी पक्ष को इस बात की भनक लगी, उन्होंने पीड़ित परिवार को डराना-धमकाना शुरू कर दिया ताकि वे पीछे हट जाएं।

हैरान करने वाली बात यह है कि 21 अप्रैल 2026 को भागीरथ के एक करीबी साथी ने निर्मल पुलिस स्टेशन में पीड़ित लड़की के खिलाफ ही एक काउंटर केस दर्ज करवा दिया।

इस शिकायत में आरोप लगाया गया कि लड़की और उसका परिवार मंत्री के बेटे को ब्लैकमेल कर रहे हैं और उससे मोटी रकम वसूलने (उगाही) की कोशिश कर रहे हैं।

पीड़ित परिवार ने अपनी शिकायत के पॉइंट नंबर-8 में एक और बड़ा दावा किया है।

उनके मुताबिक, 22 अप्रैल 2026 को संगप्पा नाम का एक व्यक्ति उनसे मिला और अगले ही दिन (23 अप्रैल को) उसने उनकी मुलाकात सीधे केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार से करवाई।

परिवार का कहना है कि इस मुलाकात के दौरान उन पर मामले को रफा-दफा करने और समझौता करने का दबाव बनाया गया। उन्हें सुरक्षा देने के बजाय डराया और धमकाया गया।

आखिरकार, लंबी जद्दोजहद के बाद घटना के करीब 4 महीने बाद यानी 8 मई को हैदराबाद से 15 किलोमीटर दूर पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन में मां की शिकायत पर साई भागीरथ के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

गिरफ्तारी पर पुलिस और वकील के अलग-अलग दावे

इस हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस और आरोपी के वकील के बयानों में साफ विरोधाभास दिख रहा है।

साइबराबाद पुलिस ने 16 मई को साई भागीरथ को गिरफ्तार किया।

कुकटपल्ली की डिप्टी कमिश्नर (IPS) रितिराज ने साफ किया कि भागीरथ ने खुद सरेंडर नहीं किया था, बल्कि पुलिस की टीम ने उसे पकड़ा है।

इससे पहले पुलिस ने 12 मई को उसे पूछताछ के लिए नोटिस भेजा था, लेकिन वह हाजिर नहीं हुआ था और उसने लेटर भेजकर कहा था कि वह सबूतों के साथ बाद में आएगा।

दूसरी तरफ, भागीरथ के वकील करुणासागर का कहना है कि पीड़ित परिवार के सारे आरोप मनगढ़ंत और राजनीति से प्रेरित हैं।

उन्होंने दावा किया कि पुलिस झूठ बोल रही है।

केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार के कहने पर उन्होंने और एक अन्य सीनियर वकील ने खुद भागीरथ को पुलिस के हवाले (सरेंडर) किया था।

वकील ने कहा कि उन्होंने जांच में सहयोग करते हुए भागीरथ का मोबाइल फोन भी पुलिस को सौंप दिया है।

इस विवाद से RSS ने क्यों बना ली दूरी?

इस मामले के सामने आने के बाद तेलंगाना की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है।

साल 2024 और 2025 के चुनावों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बीजेपी (BJP) ने मिलकर जमीनी स्तर पर काम किया था, जिससे बीजेपी को राज्य में बड़ी चुनावी सफलता मिली थी।

लेकिन इस पॉक्सो केस में जब संघ के कुछ पदाधिकारियों का नाम घसीटने की कोशिश हुई, तो संघ ने तुरंत सख्त रुख अपना लिया।

तेलंगाना प्रांत के संघचालक बार्ला सुंदर रेड्डी और प्रांत प्रचारक कट्टा राजगोपाल ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि इस पूरे विवाद से RSS का कोई लेना-देना नहीं है।

यह पूरी तरह से बीजेपी का अंदरूनी मामला है।

संघ ने चेतावनी भी दी है कि अगर कोई उनकी छवि खराब करने की कोशिश करेगा, तो वे कानूनी कार्रवाई करेंगे।

फिलहाल पीड़ित परिवार को भारी सुरक्षा के बीच 24 घंटे पुलिस की निगरानी में रखा गया है और उन्हें मीडिया से बात करने की अनुमति नहीं है।

सरकारी वकील नागेश्वर राव के मुताबिक, पुलिस आरोपी से सख्ती से पूछताछ कर रही है और मामले की गहराई से जांच जारी है।

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