US Iran Ceasefire 10 Conditions: दुनिया पिछले काफी समय से जिस महायुद्ध के डर में जी रही थी, उस पर फिलहाल दो हफ्तों के लिए ‘विराम’ लग गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 7 अप्रैल की समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए ईरान के साथ दो हफ्ते के सीजफायर (युद्धविराम) की घोषणा कर दी है।
इस फैसले का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इजरायल और हिजबुल्लाह ने भी हथियारों को शांत रखने पर सहमति जताई है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस पूरी शांति प्रक्रिया की धुरी पाकिस्तान बना है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की मध्यस्थता में अब दोनों देशों के प्रतिनिधि 10 अप्रैल से इस्लामाबाद में बातचीत की मेज पर बैठेंगे।

ईरान की वो 10 शर्तें, जिन्होंने अमेरिका को सोचने पर मजबूर किया
ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक 10-सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है।
ईरान का दावा है कि अमेरिका को उनकी शर्तों के आगे झुकना पड़ा है।
आइए जानते हैं वो कौन सी शर्तें हैं जिन पर इस्लामाबाद में चर्चा होनी है:
1. अहिंसा का संकल्प: दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई नहीं करेंगे।
2. होर्मुज स्ट्रेट पर हक: व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण बरकरार रहेगा।
3. यूरेनियम संवर्धन: ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम के तहत यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) की अनुमति दी जाए।
4. प्राथमिक प्रतिबंधों की समाप्ति: अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए सभी डायरेक्ट (Primary) प्रतिबंध हटाए जाएं।
5. द्वितीयक प्रतिबंधों का खात्मा: अन्य देशों के साथ व्यापार करने पर लगने वाली पाबंदियां (Secondary Sanctions) खत्म हों।
6. UNSC के प्रस्ताव: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ पारित सभी पुराने प्रस्तावों को रद्द किया जाए।
7. IAEA के प्रस्ताव: परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा ईरान विरोधी प्रस्तावों को समाप्त किया जाए।
8. नुकसान का मुआवजा: युद्ध और प्रतिबंधों से ईरान की अर्थव्यवस्था को जो चोट पहुंची है, उसका हर्जाना अमेरिका भरे।
9. अमेरिकी सेना की विदाई: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के देशों से अमेरिकी सैनिकों की पूरी तरह वापसी हो।
10. लेबनान में शांति: हिजबुल्लाह के खिलाफ जारी सभी मोर्चों पर तुरंत युद्धविराम लागू हो।

पाकिस्तान की भूमिका और शाहबाज शरीफ की अपील
पाकिस्तान इस समय एक ‘शांतिदूत’ की भूमिका निभा रहा है।
प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि कूटनीति ही इस संकट का एकमात्र समाधान है।
उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से अपील की है कि इस 2 सप्ताह की समयसीमा को और बढ़ाया जाए ताकि बातचीत किसी ठोस नतीजे पर पहुंच सके।

साथ ही, उन्होंने ईरान से भी बड़े भाई के नाते अनुरोध किया है कि वे इस शांति अवधि के दौरान होर्मुज स्ट्रेट को व्यापारिक जहाजों के लिए खुला रखें।
ईरान का कड़ा रुख और ट्रंप की रणनीति
ट्रंप के पोस्ट के बाद ईरान की सुप्रीम नेशनल काउंसिल का बयान काफी आक्रामक रहा।
उन्होंने इसे ईरान की “ऐतिहासिक और करारी जीत” करार दिया है।
ईरान का मानना है कि अमेरिका की “अन्यायपूर्ण और आपराधिक” जंग की हार हुई है और उन्हें मजबूरन ईरान के प्रस्तावों पर विचार करना पड़ रहा है।

दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप जो अपनी ‘डील-मेकिंग’ छवि के लिए जाने जाते हैं, वे इस समय युद्ध को टालकर एक बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल करना चाहते हैं।
अगर 10 अप्रैल से शुरू होने वाली यह वार्ता सफल रहती है, तो यह सदी का सबसे बड़ा शांति समझौता साबित हो सकता है।
आगे क्या होगा?
पूरे विश्व की नजरें अब 10 अप्रैल पर टिकी हैं।
क्या अमेरिका ईरान की इन कड़ी शर्तों को मानेगा?
क्या इजरायल इस समझौते से खुश रहेगा?
ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब इस्लामाबाद की गलियों से निकलेगा।
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