Supreme Court on Vande Mataram: मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ से जुड़े एक बेहद अहम मामले पर सुनवाई हुई।
कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई व्यक्ति धार्मिक कारणों से ‘वंदे मातरम’ नहीं गाता है, तो उसके खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई या पुलिस केस दर्ज नहीं होना चाहिए।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्र सरकार ने मानसून सत्र के दौरान ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ में संशोधन करके वंदे मातरम के अपमान या इसके गायन में बाधा डालने को एक दंडनीय अपराध बना दिया।

क्या है पूरा मामला
कानून के मुताबिक, वंदे मातरम के गायन को रोकने या इसमें जानबूझकर खलल डालने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान किया गया है।
इसी कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए प्रसिद्ध कर्नाटक संगीत गायक टीएम कृष्णा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और यह जांचने पर सहमति जताई है कि वंदे मातरम न गाने को अपराध बनाया जा सकता है या नहीं।

याचिकाकर्ता का तर्क और 6 अंतरों (पैराग्राफ) पर विवाद
गायक टीएम कृष्णा की तरफ से पेश हुए वकीलों ने अदालत में तर्क दिया कि ‘वंदे मातरम’ मूल रूप से बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखा गया था, जिसमें कुल छह पैराग्राफ (छंद) हैं।
* शुरुआती दो छंद: इन पैराग्राफों में भारत माता की प्राकृतिक सुंदरता और उर्वरता की तारीफ की गई है, जिस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है।
* अंतिम चार छंद: याचिकाकर्ता के अनुसार, अंतिम चार पैराग्राफ में हिंदू देवी-देवताओं (जैसे दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती) के प्रति भक्ति और उनका आह्वान किया गया है।
याचिका में कहा गया कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष (Secular) देश है।
ऐसे में किसी भी नागरिक को ऐसे छंद गाने के लिए मजबूर करना, जो उसकी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ हों, संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर फैसला सुनाने से इनकार कर दिया कि राष्ट्रीय कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत केवल शुरुआती दो छंदों तक सीमित रहेगा या पूरे छह छंद गाए जाएंगे।
गौरतलब है कि इस बार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से पहली बार ‘वंदे मातरम’ के पूरे छह छंद गाए गए थे।

1986 का ‘बिजो इमैनुअल’ केस और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले की व्याख्या करते समय ऐतिहासिक ‘बिजो इमैनुअल बनाम केरल राज्य (1986)’ फैसले के सिद्धांतों को ध्यान में रखा जाएगा।
क्या था 1986 का बिजो इमैनुअल केस?
केरल के एक स्कूल में ‘जहोवा के साक्षी’ (Jehovah’s Witnesses) ईसाई समुदाय के तीन बच्चों—बिजो, बीना और बिंदु ने धार्मिक मान्यताओं के कारण स्कूल असेंबली में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाने से मना कर दिया था।
हालांकि, जब राष्ट्रगान गाया जाता था, तब वे बेहद सम्मानपूर्वक सीधे खड़े रहते थे।
स्कूल ने उन्हें बाहर निकाल दिया था। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने बच्चों के निष्कासन को रद्द करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था:
“हमारी परंपरा सहिष्णुता सिखाती है; हमारा दर्शन सहिष्णुता पर जोर देता है; हमारा संविधान सहिष्णुता की बात करता है।”
सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत का अपमान नहीं कर रहा है और सम्मान में खड़ा है, तो केवल अपनी धार्मिक आस्था के कारण इसे न गाने पर उसे सजा नहीं दी जा सकती।

कोर्टरूम में तीखी बहस: ‘नक्सली’ शब्द पर विवाद
सुनवाई के दौरान अदालत में काफी गहमागहमी देखने को मिली। केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता और याचिकाकर्ता के सीनियर एडवोकेट डॉ. एस. मुरलीधर के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
* संविधान के तहत फैसला लेने की प्रक्रिया पर दलील देते हुए जब डॉ. मुरलीधर ने अपनी बात रखी, तो सॉलिसिटर जनरल ने ‘नक्सली’ शब्द का इस्तेमाल किया।
* इस पर डॉ. मुरलीधर ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा, “अदालत की कार्यवाही लाइव चल रही है। आप इस शब्द को तुरंत वापस लें।”
* सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया, “मैंने कहा कि यही संवैधानिक तरीका है, न कि वह तरीका जो नक्सली चाहता है। मुझे इस पर कोई पछतावा नहीं है।”
* डॉ. मुरलीधर ने पलटवार करते हुए कहा कि किसी मुद्दे पर संवैधानिक विचार करना नक्सली होना नहीं होता।
बात बढ़ती देख जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने बीच-बचाव किया और स्थिति को संभाला। उन्होंने कहा कि संविधान सभी के लिए बराबर है।
यहां तक कि अगर किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप या आतंकवादी होने का ठप्पा भी लगा हो, तब भी संविधान के तहत उसके मौलिक अधिकार सुरक्षित रहते हैं।

गृह मंत्रालय के नए नियम और प्रोटोकॉल
गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को लेकर सभी राज्यों और मंत्रालयों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं:
* गायन का क्रम: यदि किसी सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रम में दोनों गाए या बजाए जाते हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा और उसके बाद ‘जन गण मन’।
* राज्य गीत का नियम: यदि किसी राज्य का अपना आधिकारिक राज्य गीत है, तो सबसे पहले राज्य गीत, फिर ‘वंदे मातरम’ और अंत में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ होगा।
* सही उच्चारण: गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि गायन के दौरान शब्दों का सही उच्चारण और तय समय सीमा का कड़ाई से पालन होना चाहिए।
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