Delhi Air Purifier GST: दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से पूछा कि जब दिल्ली की हवा लगातार आपातकालीन स्तर पर पहुंच रही है, तो साफ हवा के लिए जरूरी एयर प्यूरीफायर पर 18% GST क्यों लगाया जा रहा है?
अदालत ने कहा कि अगर सरकार लोगों को स्वच्छ हवा नहीं दे पा रही है, तो कम से कम उन उपकरणों पर टैक्स कम करे जो लोगों को सांस लेने में मदद करते हैं।
कोर्ट का सवाल: “21,000 बार सांस लेते हैं, नुकसान की गणना करें”
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गडेला की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
पीठ ने कहा, “हर नागरिक को स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार है। ऐसे में एयर प्यूरीफायर को लग्जरी आइटम मानकर 18% जीएसटी लगाना उचित नहीं है।”
🚨A PIL has been filed before Delhi High Court to declare air purifier as ‘medical device’, bring down its GST from 18% to 5% pic.twitter.com/HdEbTNvafS
— Indian Infra Report (@Indianinfoguide) December 24, 2025
अदालत ने आगे कहा, “हम एक दिन में लगभग 21,000 बार सांस लेते हैं। इस जहरीली हवा से होने वाले नुकसान की गणना कीजिए।”
याचिका में एयर प्यूरीफायर को मेडिकल डिवाइस की श्रेणी में शामिल करने और जीएसटी 18% से घटाकर 5% करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खराब से गंभीर स्तर पर पहुंच जाता है, तो एयर प्यूरीफायर लक्जरी नहीं बल्कि एक आवश्यकता बन जाता है, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए।
#WATCH | Delhi | Kapil Madan, petitioner in Delhi air pollution matter in Delhi High Court, says, “In this PIL, what we were praying from the court was that GST on air purifiers should be 5% instead of 18%. To say this, we were relying on a notification issued by a ministry that… pic.twitter.com/s7bwZTJnAZ
— ANI (@ANI) December 24, 2025
गडकरी ने स्वीकारा: 40% प्रदूषण परिवहन क्षेत्र से
इस बीच, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम में स्वीकार किया कि दिल्ली में प्रदूषण का 40% हिस्सा परिवहन क्षेत्र से आता है, जिसके वह स्वयं मंत्री हैं।
गडकरी ने कहा, “दिल्ली में दो-तीन दिन रहने पर मुझे भी इन्फेक्शन हो जाता है। हमें ईंधन पर निर्भरता कम करनी होगी। इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन वाहनों को बढ़ावा देने से प्रदूषण कम होगा।”
आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने गडकरी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “कम से कम एक नेता तो ऐसा है जो सच बोल रहा है। पिछले तीन महीनों में दिल्ली की लगभग 60% आबादी बीमार पड़ गई है।”
दिल्ली: हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाई फटकार
➡हर नागरिक को ताजी हवा चाहिए
➡वायु प्रदूषण पर निष्क्रियता पर कड़ी निंदा
➡प्रदूषण संकट में कम से कम GST घटाएं-हाईकोर्ट
➡एयर प्यूरीफायर पर 18% GST पर सवाल उठाए#DelhiHighCourt #AirPollution #GSTOnAirPurifiers… pic.twitter.com/UKazVYcdv6— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) December 24, 2025
अदालत की मुख्य टिप्पणियां और सुझाव
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं:
- मूलभूत कदम की बात: अदालत ने कहा कि जब सरकार स्वच्छ हवा देने में नाकाम है, तो कम से कम एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी घटाना या टैक्स में छूट देना सबसे बुनियादी कदम हो सकता है।
- आपातकालीन प्रावधान पर सवाल: कोर्ट ने पूछा कि जब हालात एयर इमरजेंसी जैसे हैं, तो क्या किसी आपात प्रावधान के तहत अस्थायी रूप से एयर प्यूरीफायर को जीएसटी से छूट नहीं दी जा सकती?
- समयबद्ध राहत का सुझाव: पीठ ने सुझाव दिया कि 15 दिन या किसी तय अवधि के लिए ही सही, टैक्स राहत पर विचार किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह सिर्फ लंबी तारीखें नहीं, बल्कि मौजूदा हालात में ठोस प्रस्ताव चाहती है।
दिल्ली की जहरीली हवा और एयर प्यूरीफायर पर 18% GST? *Delhi High Court* is not happy! कोर्ट ने पूछा, ‘जब हजारों लोग मर जाएंगे, तब क्या टैक्स कम होगा?’ It’s time to prioritize health over taxes. #DelhiPollution #GSTUpdate pic.twitter.com/OHdXWc7xp6
— thinQ360 (@thinQ360) December 24, 2025
केंद्र सरकार का रुख और अगली सुनवाई
लंच के बाद की सुनवाई में केंद्र सरकार के वकील ने जवाब दाखिल किया और कहा कि यह मामला जीएसटी काउंसिल का है, जिसमें सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सदस्य शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में कोई भी निर्णय एक तय प्रक्रिया के तहत जीएसटी काउंसिल द्वारा ही लिया जाएगा।
The Delhi HC criticised the government over 18% GST on Air Purifiers pic.twitter.com/SJ9I4ervvE
— RVCJ Media (@RVCJ_FB) December 24, 2025
वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद नायर ने तर्क दिया कि 2020 की अधिसूचना के आधार पर एयर प्यूरीफायर को आसानी से मेडिकल डिवाइस की श्रेणी में शामिल किया जा सकता है, जिससे इन पर 5% जीएसटी लागू हो सके।
अदालत ने कहा, “पहली नजर में हमें कोई कारण नहीं दिखता कि 2020 की अधिसूचना के आधार पर एयर प्यूरीफायर पर 5% जीएसटी क्यों नहीं दिया जा सकता।”
मामले की अगली सुनवाई 26 दिसंबर के लिए तय की गई है, ताकि केंद्र सरकार यह पता लगा सके कि जीएसटी काउंसिल कितनी जल्दी बैठक बुला सकती है।


