Rajya Sabha Election 2026: भारत की संसद के दो सदन हैं—लोकसभा और राज्यसभा।
जहां लोकसभा में हम और आप (जनता) सीधे वोट डालकर अपना प्रतिनिधि चुनते हैं, वहीं राज्यसभा की कहानी थोड़ी अलग और दिलचस्प है।
इसे ‘ऊपरी सदन’ या ‘स्थायी सदन’ कहा जाता है।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि राज्यसभा के सांसद कैसे चुने जाते हैं और आज हो रहे चुनावों में क्या खास है।
राज्यसभा: जो कभी भंग नहीं होती
लोकसभा का कार्यकाल 5 साल का होता है और चुनाव के बाद पूरी सभा नई चुनी जाती है।
लेकिन राज्यसभा एक ‘स्थायी सदन’ है। इसका अर्थ यह है कि यह कभी पूरी तरह खाली नहीं होती।
राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल 6 साल का होता है।
हर दो साल में सदन के एक-तिहाई (1/3) सदस्य रिटायर हो जाते हैं और उनकी जगह नए सदस्यों का चुनाव होता है।
वर्तमान में राज्यसभा में कुल 245 सीटें हैं, जिनमें से 233 पर चुनाव होते हैं और 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं।
कौन डालता है वोट?
राज्यसभा चुनाव में आम जनता वोट नहीं देती।
यहां वोट डालने का अधिकार केवल राज्यों की विधानसभा के निर्वाचित विधायकों (MLAs) को होता है।
चूंकि इसमें जनता के प्रतिनिधि वोट देते हैं, इसलिए इसे ‘अप्रत्यक्ष चुनाव’ कहा जाता है।
मतदान की अनोखी प्रक्रिया (Single Transferable Vote)
राज्यसभा चुनाव में ‘ओपन बैलेट’ सिस्टम और ‘सिंगल ट्रांसफरेबल वोट’ (STV) का इस्तेमाल होता है। इसकी कुछ खास बातें हैं:
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वरीयता क्रम (Preference): विधायक को बैलेट पेपर पर उम्मीदवारों के नाम के आगे 1, 2, 3 लिखकर अपनी पसंद बतानी होती है।
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पार्टी एजेंट को दिखाना: क्रॉस-वोटिंग रोकने के लिए विधायकों को अपना वोट अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाना पड़ता है। अगर वे ऐसा नहीं करते या किसी और को दिखाते हैं, तो वोट रद्द हो सकता है।
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सीक्रेट नहीं है वोट: यह आम चुनाव की तरह गुप्त मतदान नहीं होता।
आज के चुनाव और 3 राज्यों का ‘पेंच’
देश के 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी।
इनमें से 7 राज्यों (महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल आदि) की 26 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं क्योंकि वहां उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर ही थी।
असली मुकाबला बिहार, हरियाणा और ओडिशा की 11 सीटों पर है।
यहां सीटों की तुलना में उम्मीदवार ज्यादा हैं, जिससे वोटिंग की नौबत आई है।
बिहार का समीकरण: बिहार में 5 में से 4 सीटों पर स्थिति साफ है, लेकिन 5वीं सीट के लिए NDA के उपेंद्र कुशवाहा और महागठबंधन (RJD) के AD सिंह के बीच कांटे की टक्कर है।
RJD को जीत के लिए 41 वोट चाहिए, जबकि उनके पास अभी 35 हैं।
हालांकि, ओवैसी की पार्टी (AIMIM) के 5 विधायकों के समर्थन से मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया है।
जनसंख्या के आधार पर सीटों का बंटवारा
संविधान की चौथी अनुसूची के अनुसार, जिस राज्य की जनसंख्या जितनी ज्यादा होगी, वहां राज्यसभा की सीटें भी उतनी ही अधिक होंगी।
यही वजह है कि उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा 31 सांसद आते हैं, जबकि छोटे राज्यों से केवल 1-2 सदस्य ही चुने जाते हैं।
राज्यसभा चुनाव न केवल आंकड़ों का खेल है, बल्कि यह राजनीतिक दलों की एकजुटता की परीक्षा भी है।
यहां एक-एक वोट की कीमत होती है और हार-जीत का फैसला दशमलव की गणना तक जा सकता है।
शाम तक आने वाले नतीजे तय करेंगे कि उच्च सदन में किस गठबंधन का पलड़ा भारी रहेगा।
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