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केदारनाथ में ‘आस्था’ का टेस्ट: सारा अली खान को देना होगा ‘सनातनी’ एफिडेविट, तभी मिलेगी एंट्री

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Sara Ali Khan Kedarnath Yatra: उत्तराखंड की पावन चारधाम यात्रा आस्था और श्रद्धा का सबसे बड़ा केंद्र है।

साल 2026 की यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होने जा रही है, लेकिन इस बार की यात्रा पिछले सालों के मुकाबले काफी अलग होने वाली है।

बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने धामों की पवित्रता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ बेहद कड़े फैसले लिए हैं।

इन नियमों की जद में न केवल आम श्रद्धालु, बल्कि बॉलीवुड की बड़ी हस्तियां भी आ गई हैं।

सबसे ज्यादा चर्चा अभिनेत्री सारा अली खान को लेकर हो रही है, जिन्हें अब केदारनाथ में प्रवेश के लिए एक कानूनी शपथ पत्र (Affidavit) देना पड़ सकता है।

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सारा अली खान और सनातनी एफिडेविट 

बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान अक्सर केदारनाथ धाम के दर्शन करती नजर आती हैं।

अपनी पहली फिल्म ‘केदारनाथ’ के बाद से ही उनकी बाबा के प्रति अटूट आस्था देखी गई है। हालांकि, इस बार नियम बदल गए हैं।

BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि सारा अली खान या कोई भी व्यक्ति जो हिंदू धर्म से सीधे तौर पर नहीं जुड़ा है, उसे मंदिर में प्रवेश के लिए यह लिखित में देना होगा कि उनकी आस्था ‘सनातन धर्म’ में है।

अध्यक्ष का तर्क है कि मंदिर कोई पिकनिक स्पॉट नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है।

इसलिए, जो व्यक्ति सनातन धर्म और उसकी परंपराओं में विश्वास रखता है, वही गर्भगृह और मंदिर परिसर की पवित्रता को समझ सकता है।

सारा अली खान को अब यह साबित करना होगा कि वह एक ‘सनातनी’ के तौर पर वहां आ रही हैं।

कंगना बोलीं- सब सनातनी हैं

इस मामले में एक्ट्रेस और BJP सांसद कंगना रनौत का रिएक्शन भी सामने आया है।

उन्होंने कहा, “यहां हर कोई सनातनी है। यहां जो भी मौजूद हैं, वे सभी सनातनी हैं, क्योंकि हमारे जन्म के समय से ही ‘सनातन’ का अर्थ है वह जिसका न कोई आदि है और न ही कोई अंत…”

47 मंदिरों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित?

BKTC ने केवल केदारनाथ ही नहीं, बल्कि अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले 47 अन्य मंदिरों में भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर सख्त रुख अपनाया है।

एक विशेष सब-कमेटी का गठन किया गया है जो मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर रही है।

यह कमेटी आदि गुरु शंकराचार्य के समय से चली आ रही परंपराओं का अध्ययन कर रही है।

समिति का मानना है कि जो लोग सनातन धर्म को नहीं मानते, उनका मंदिर परिसर में प्रवेश वर्जित होना चाहिए ताकि धार्मिक मर्यादा बनी रहे।

मोबाइल और रील संस्कृति पर लगाम

पिछले कुछ सालों में केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिर के सामने रील बनाने और मोबाइल के इस्तेमाल की घटनाओं ने तीर्थयात्रियों को परेशान किया है।

कई बार ऐसी तस्वीरें सामने आईं जो मंदिर की मर्यादा के खिलाफ थीं।

इसे रोकने के लिए 2026 की यात्रा में ‘नो मोबाइल जोन’ लागू किया जा रहा है।

  • 60 मीटर का दायरा: मंदिर के मुख्य द्वार से 50-60 मीटर की दूरी तक कोई भी मोबाइल नहीं ले जा सकेगा।
  • सबके लिए बराबर नियम: यह नियम केवल आम जनता के लिए नहीं है, बल्कि वीआईपी, मंदिर के कर्मचारी और पुजारियों पर भी लागू होगा।
  • फोटोग्राफी के लिए अलग स्पॉट: अगर आप यादों को कैद करना चाहते हैं, तो मंदिर समिति ने इसके लिए ‘डेजिग्नेटेड फोटो पॉइंट्स’ बनाने का फैसला किया है। श्रद्धालु केवल इन्हीं जगहों पर फोटो क्लिक कर सकेंगे।

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राजनीतिक घमासान: आस्था बनाम अधिकार

मंदिर समिति के इस फैसले ने उत्तराखंड की राजनीति में भी उबाल ला दिया है।

कांग्रेस प्रवक्ता सुजाता पॉल ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने सरकार और मंदिर समिति पर ‘विभाजन की राजनीति’ करने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस का कहना है कि उत्तराखंड वीरांगनाओं और बलिदानियों की धरती है, यहां किसी की व्यक्तिगत आस्था पर सवाल उठाना गलत है।

उन्होंने सवाल किया कि क्या यह नियम भाजपा के उन नेताओं पर भी लागू होगा जो दूसरे धर्मों से ताल्लुक रखते हैं और मंदिर जाते हैं?

क्या सभी को एफिडेविट देना होगा?

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प्रशासन की तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था

उत्तराखंड सरकार और BKTC इस बार भीड़ को नियंत्रित करने के लिए भी तकनीक का सहारा ले रही है।

19 अप्रैल से शुरू होने वाली यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया गया है।

मंदिर समिति का कहना है कि वे किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते, लेकिन ‘सनातन’ की रक्षा और मंदिर की अनुशासन व्यवस्था उनकी पहली प्राथमिकता है।

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क्या बदलेगी चारधाम यात्रा की तस्वीर?

नियम चाहे मोबाइल बैन के हों या सनातनी होने के प्रमाण के, इनका उद्देश्य यात्रा को अधिक आध्यात्मिक और कम ‘टूरिस्टी’ बनाना है।

श्रद्धालुओं को सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले इन नए नियमों की पूरी जानकारी जुटा लें ताकि उन्हें वहां जाकर किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

सारा अली खान के मामले में अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वह इस नए नियम के तहत एफिडेविट देंगी या उनकी यात्रा में कोई बदलाव आएगा।

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