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Zomato से खाना मंगाना हुआ महंगा! अब हर ऑर्डर पर ज्यादा ढीली होगी जेब, इतनी बढ़ी प्लेटफॉर्म फीस

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Zomato Platform Fee Hike: अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो जोमैटो (Zomato) से खाना ऑर्डर करना पसंद करते हैं, तो आपकी जेब पर अब अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है।

देश की दिग्गज फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो ने शुक्रवार, 20 मार्च 2026 से अपनी प्लेटफॉर्म फीस में बड़ी बढ़ोतरी कर दी है।

कितनी बढ़ी फीस और क्या है गणित?

जोमैटो ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस को सीधे तौर पर 19.2% बढ़ा दिया है।

अब तक आपको हर एक ऑर्डर पर ₹12.50 प्लेटफॉर्म फीस के रूप में देने पड़ते थे, लेकिन अब यह बढ़कर ₹14.90 हो गई है।

यानी अब आपको हर बार बटन दबाने पर सीधे ₹2.40 ज्यादा चुकाने होंगे।

दिखने में यह रकम छोटी लग सकती है, लेकिन अगर आप महीने में 10 बार भी खाना मंगाते हैं, तो यह अंतर साफ़ नजर आने लगेगा।

खास बात यह है कि यह फीस ‘प्री-जीएसटी’ (Pre-GST) है।

इसका मतलब है कि ₹14.90 पर सरकार द्वारा लगाया जाने वाला टैक्स अलग से जुड़ेगा, जिससे फाइनल बिल में यह बढ़ोतरी करीब ₹3 के आसपास महसूस होगी।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम? तेल का खेल और मुनाफे की रेस

इस बढ़ोतरी के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है।

जब पेट्रोल-डीजल महंगा होता है, तो डिलीवरी पार्टनर्स का खर्च बढ़ जाता है और कंपनी के लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन्स की लागत बढ़ जाती है।

दूसरा बड़ा कारण है कंपनी की ‘प्रॉफिटेबिलिटी’।

जोमैटो अब केवल डिस्काउंट देने वाली कंपनी नहीं रहना चाहती, बल्कि वह अपने बिजनेस को मुनाफे में लाने और ऐप के रखरखाव (Maintenance) के लिए ग्राहकों से यह शुल्क वसूल रही है।

यह प्लेटफॉर्म फीस खाने की कीमत, पैकेजिंग चार्ज और डिलीवरी पार्टनर की फीस से बिल्कुल अलग होती है।

कैसे बदल जाएगा आपका टोटल बिल?

जब आप जोमैटो पर ऑर्डर करते हैं, तो आपका बिल 5 हिस्सों में बंटा होता है:

  1. आइटम की कीमत: जो खाना आपने चुना है।

  2. पैकेजिंग चार्ज: रेस्टोरेंट द्वारा लगाया गया शुल्क।

  3. प्लेटफॉर्म फीस: जो अब ₹14.90 हो गई है।

  4. डिलिवरी फीस: दूरी के आधार पर (गोल्ड मेंबर्स के लिए अक्सर फ्री)।

  5. GST: जो इन सभी चीजों को जोड़ने के बाद लगता है।

चूंकि प्लेटफॉर्म फीस बढ़ी है, इसलिए उस पर लगने वाला GST भी बढ़ेगा, जिससे आपका कुल बिल उम्मीद से थोड़ा ज्यादा बढ़ सकता है।

स्विगी और जोमैटो के बीच ‘होड़’

मार्केट में जोमैटो की मुख्य टक्कर स्विगी (Swiggy) से है।

फिलहाल स्विगी भी टैक्स मिलाकर लगभग ₹14.99 प्लेटफॉर्म फीस वसूल रही है।

अक्सर देखा गया है कि जब एक कंपनी दाम बढ़ाती है, तो दूसरी भी जल्द ही उसके बराबर आ जाती है।

यह पिछले 6 महीनों में दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है; इससे पहले सितंबर 2025 में भी कीमतों में इजाफा किया गया था।

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₹2 से शुरू हुआ सफर अब ₹15 के करीब

जोमैटो ने प्लेटफॉर्म फीस की शुरुआत अगस्त 2023 में महज ₹2 से की थी।

धीरे-धीरे इसे बढ़ाकर ₹3, फिर ₹4 और फिर ₹7 किया गया।

अब मात्र ढाई साल के भीतर यह फीस ₹14.90 तक पहुंच चुकी है।

यह दर्शाता है कि कंपनियां अब विज्ञापन और डिस्काउंट के बजाय सीधे तौर पर सर्विस चार्ज से अपनी कमाई बढ़ा रही हैं।

क्या यह बढ़ोतरी हमेशा के लिए है?

कंपनी की ओर से मिले संकेतों के अनुसार, यह नई दर फिलहाल 22 मार्च 2026 (रविवार) तक के लिए लागू की गई है।

इसके बाद कंपनी समीक्षा करेगी कि क्या इसे बरकरार रखना है या पुरानी दरों पर लौटना है।

हालांकि, बाजार के जानकारों का कहना है कि एक बार फीस बढ़ने के बाद उसके कम होने की गुंजाइश कम ही रहती है।

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मध्यम वर्ग पर दोहरी मार

एक तरफ जहां एलपीजी (LPG) और प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं, वहीं ऑनलाइन फूड का महंगा होना आम आदमी के बजट को बिगाड़ने वाला है।

जो लोग रोजाना बाहर से खाना मंगाते हैं, उनके लिए अब ‘घर का खाना’ ही सबसे किफायती विकल्प नजर आ रहा है।

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