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April Vrat Tyohar: हनुमान जयंती से अक्षय तृतीया तक, अप्रैल के महीने में आएंगे ये प्रमुख व्रत-त्योहार

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

April 2026 Vrat Tyohar: साल 2026 का चौथा महीना यानी अप्रैल, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस महीने में न केवल चैत्र मास का समापन होगा, बल्कि पवित्र वैशाख मास की शुरुआत भी होगी।

भारतीय संस्कृति में वैशाख के महीने को दान, पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा पाने के लिए यह समय सबसे उत्तम है।

हनुमान जन्मोत्सव और पूर्णिमा से शुरुआत

अप्रैल महीने की शुरुआत ही बेहद ऊर्जावान होने वाली है।

2 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर हनुमान जयंती मनाई जाएगी।

यह दिन संकटमोचन हनुमान जी की भक्ति में डूबा रहेगा।

मान्यता है कि इस दिन हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।

इसके अगले ही दिन यानी 3 अप्रैल से वैशाख महीने का प्रारंभ होगा, जिसमें लोग सूर्योदय से पूर्व स्नान कर भगवान माधव की पूजा शुरू करेंगे।

ग्रहों की चाल और राशियों पर प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र के नजरिए से अप्रैल 2026 का महीना काफी ‘उथल-पुथल’ वाला संकेत दे रहा है।

इस दौरान कई बड़े ग्रह अपनी राशि और नक्षत्र परिवर्तन करेंगे। ग्रहों के इस गोचर का प्रभाव देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर देखने को मिलेगा।

विशेषकर 14 अप्रैल को जब सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करेंगे (मेष संक्रांति), तो यह कई राशियों के लिए भाग्य उदय के द्वार खोलेगा।

शुभ संयोग और अक्षय तृतीया का महत्व

इस महीने का सबसे प्रतीक्षित दिन 19 अप्रैल होगा, जब अक्षय तृतीया (आखातीज) मनाई जाएगी।

यह एक स्वयंसिद्ध मुहूर्त है, जिसमें किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती।

सोना खरीदने, नया व्यवसाय शुरू करने या विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ है।

इसी दिन भगवान परशुराम की जयंती भी मनाई जाएगी, जो साहस और न्याय के प्रतीक हैं।

एकादशी और प्रदोष का उपवास

व्रत रखने वाले भक्तों के लिए 13 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी और 27 अप्रैल को मोहिनी एकादशी का विशेष महत्व रहेगा।

जहां वरुथिनी एकादशी सौभाग्य प्रदान करती है, वहीं मोहिनी एकादशी मोह-माया के बंधनों से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है।

महीने के अंत में 28 अप्रैल को ‘भौम प्रदोष’ का संयोग बन रहा है, जो कर्ज से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ के लिए अत्यंत फलदायी है।

शक्ति और साधना के पर्व

अप्रैल का उत्तरार्ध शक्ति साधना के नाम रहेगा।

24 अप्रैल को बगलामुखी जयंती और मासिक दुर्गाष्टमी के अवसर पर भक्त शत्रुओं पर विजय और आंतरिक शक्ति के लिए मां दुर्गा की उपासना करेंगे।

साथ ही, 25 अप्रैल को सीता नवमी मनाई जाएगी, जो नारी शक्ति और धैर्य के आदर्श रूप माता सीता के प्राकट्य का उत्सव है।

महीने का समापन 30 अप्रैल को भगवान नृसिंह जयंती के साथ होगा।

बुराई पर अच्छाई की जीत का यह पर्व हमें सिखाता है कि अटूट विश्वास होने पर ईश्वर स्वयं खंभे से निकलकर भक्त की रक्षा करने आते हैं।

यहां देखें पूरी लिस्ट

  • हनुमान जयंती और चैत्र पूर्णिमा (2 अप्रैल)

  • वैशाख माह प्रारंभ (3 अप्रैल)

  • विकट संकष्टी चतुर्थी (5 अप्रैल)

  • मासिक कृष्ण जन्माष्टमी (9 अप्रैल)

  • कालाष्टमी (10 अप्रैल)

  • वरुथिनी एकादशी (13 अप्रैल)

  • बैशाखी और मेष संक्रांति (14 अप्रैल)

  • वैशाख अमावस्या (17 अप्रैल)

  • अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती (19 अप्रैल)

  • शंकराचार्य और सूरदास जयंती (21 अप्रैल)

  • रामानुज जयंती और स्कंद षष्ठी (22 अप्रैल)

  • गंगा सप्तमी (23 अप्रैल)

  • बगलामुखी जयंती और दुर्गाष्टमी (24 अप्रैल)

  • सीता नवमी (25 अप्रैल)

  • मोहिनी एकादशी (27 अप्रैल)

  • भौम प्रदोष व्रत (28 अप्रैल)

  • नृसिंह और छिन्नमस्ता जयंती (30 अप्रैल)

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