Commercial Cylinder Price Hike: 1 अप्रैल 2026 की सुबह आम जनता और कारोबारियों के लिए महंगाई का नया झटका लेकर आई है।
सरकारी तेल कंपनियों ने नए वित्त वर्ष के पहले ही दिन 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में ₹195.50 तक का भारी इजाफा कर दिया है।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

प्रमुख शहरों में अब क्या हैं नए दाम?
देश के महानगरों में अब कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें आसमान छू रही हैं।
दिल्ली में जो सिलेंडर कल तक ₹1883 में मिल रहा था, अब वह ₹2078.50 का हो गया है।
आइए देखते हैं प्रमुख शहरों की नई रेट लिस्ट:
- शहर | पुराना रेट (लगभग) | नया रेट। बढ़ोतरी
- दिल्ली | ₹1883.00 | ₹2078.50 | ₹195.50
- मुंबई | ₹1835.00 | ₹2031.00 | ₹196.00
- कोलकाता | ₹1990.00 | ₹2208.00 | ₹218.00
- चेन्नई | ₹2043.50 | ₹2246.50 | ₹203.00
- पटना | – | ₹2365.00
इसके अलावा छोटे सिलेंडर (5 किलो FTL) के दाम में भी ₹51 की वृद्धि की गई है, जिसके बाद इसकी कीमत ₹549 हो गई है।

क्यों बढ़े दाम? सरकार और कंपनियों का तर्क
कीमतों में इस उछाल के पीछे सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट (वेस्ट एशिया) में चल रहा युद्ध और संघर्ष है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में सप्लाई चेन बाधित होने से वैश्विक LPG सप्लाई का लगभग 20-30% हिस्सा प्रभावित हुआ है।
सरकार ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि कमर्शियल सिलेंडर के दाम पूरी तरह बाजार (Market Linked) पर आधारित होते हैं और सरकार इन्हें नियंत्रित नहीं करती।
तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर हर महीने रेट तय करती हैं।
सरकार का कहना है कि चूंकि देश में कुल खपत का केवल 10% ही कमर्शियल गैस है, इसलिए इसका सीधा असर घरेलू बजट पर कम पड़ेगा।

आम आदमी पर कैसे पड़ेगा असर?
भले ही घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) के दाम इस बार नहीं बढ़े हैं, लेकिन कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने का मतलब है कि आपकी जेब पर अप्रत्यक्ष (Indirect) बोझ बढ़ेगा:
- होटल और रेस्टोरेंट: रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों की लागत बढ़ जाएगी, जिससे वे थाली और डिशेज के दाम बढ़ा सकते हैं।
- स्ट्रीट फूड: समोसे, कचोरी और चाय जैसी चीजें जो छोटे दुकानदार बेचते हैं, उनकी कीमतें बढ़ सकती हैं।
- बेकरी और स्वीट शॉप्स: बिस्कुट, केक और मिठाइयों के निर्माण में गैस का भारी इस्तेमाल होता है, यहाँ भी महंगाई दिख सकती है।
- कैटरिंग सर्विस: शादियों और इवेंट्स में खाने का कॉन्ट्रैक्ट अब महंगा हो सकता है।

ऑयल कंपनियों की चुनौती
सूत्रों के अनुसार, तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी कीमतों का पूरा बोझ अभी भी ग्राहकों पर नहीं डाल रही हैं।
घरेलू सिलेंडर पर कंपनियां अब भी करीब ₹380 प्रति सिलेंडर का नुकसान उठा रही हैं।
मई के अंत तक यह घाटा ₹40,484 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।
सरकार का दावा है कि भारत में गैस की कीमतें अब भी पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान (₹1046), श्रीलंका (₹1242) और नेपाल (₹1208) के मुकाबले स्थिर रखने की कोशिश की जा रही है।

एक्सपर्ट्स की राय
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के विशेषज्ञों का कहना है कि लागत बढ़ने से प्रॉफिट मार्जिन कम हो रहा है।
अगर यह संकट लंबा चला, तो कई छोटे फूड बिजनेस बंद होने की कगार पर आ सकते हैं।
कई व्यापारी अब बिजली से चलने वाले चूल्हों (इलेक्ट्रिक इंडक्शन) की ओर रुख कर रहे हैं, लेकिन भारी खाना पकाने के लिए यह विकल्प अभी भी बहुत महंगा और धीमा है।
कुल मिलाकर, 1 अप्रैल से बाहर खाना और नाश्ता करना अब आपके लिए पहले जैसा सस्ता नहीं रहेगा।
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