Vishwanath Patil Suicide Khandwa: मध्य प्रदेश के खंडवा संसदीय क्षेत्र से भाजपा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल के छोटे भाई, 58 वर्षीय विश्वनाथ पाटिल (जिन्हें प्यार से बाडू पाटिल कहा जाता था) ने आत्महत्या कर ली है।
बुधवार की सुबह उनका शव उनके ही पैतृक गांव बोहरडा में स्थित खेत के एक कुएं में तैरता हुआ पाया गया।
क्या है पूरी घटना?
जानकारी के अनुसार, विश्वनाथ पाटिल मंगलवार से ही अपने घर से लापता थे।
काफी खोजबीन के बाद जब उनका कुछ पता नहीं चला, तो परिवार वालों ने पुलिस में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी।
बुधवार सुबह करीब 4 बजे के आसपास, जब कुछ मजदूर खेत पर काम करने पहुंचे, तो उनकी नजर कुएं में उतराते हुए एक शव पर पड़ी।
पहचान होने पर पता चला कि यह शव सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल के छोटे भाई विश्वनाथ का ही है।
प्रशासन की मुस्तैदी और रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की खबर मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बुरहानपुर के कलेक्टर हर्ष सिंह और एसपी देवेंद्र पाटीदार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
शव कुएं की गहराई में होने के कारण प्रशासन को गोताखोरों की मदद लेनी पड़ी।
लगभग 3 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाला जा सका।
पुलिस ने तत्काल शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है।

सांसद पाटिल दिल्ली से रवाना
जिस वक्त यह हादसा हुआ, सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल दिल्ली में थे।
जैसे ही उन्हें अपने छोटे भाई की मौत की खबर मिली, वे स्तब्ध रह गए और तुरंत हवाई मार्ग से बुरहानपुर के लिए रवाना हो गए। शाम तक उनके पहुंचने की उम्मीद है।
इधर गांव में उनके निवास पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है।
नेपानगर विधायक मंजू दादू समेत कई बड़े नेता और स्थानीय कार्यकर्ता शोक व्यक्त करने पहुंचे हैं।

मौत की वजह अब भी रहस्य
विश्वनाथ पाटिल पांच भाइयों में तीसरे नंबर के थे।
उनका परिवार न केवल राजनीतिक रूप से रसूखदार है, बल्कि आर्थिक रूप से भी काफी संपन्न माना जाता है।
ऐसे में उन्होंने यह आत्मघाती कदम क्यों उठाया, यह सवाल हर किसी के मन में है।
बुरहानपुर एसपी देवेंद्र पाटीदार ने शुरुआती जांच के आधार पर इसे आत्महत्या का मामला बताया है, लेकिन पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि इसके पीछे की असली वजह क्या थी।

अंतिम विदाई
विश्वनाथ पाटिल के निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को उनके पैतृक गांव बोहरडा में किया जाएगा।
फिलहाल गांव में सुरक्षा के लिहाज से भारी पुलिस बल तैनात है और परिजन सांसद के पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं।
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