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गीला मौसम, सूखा घर! बच्चों की सेहत से लेकर कुकिंग तक, बारिश में बड़े काम आएंगे FSSAI के ये सेफ्टी रूल्स

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Monsoon safety guidelines: तपती गर्मी के बाद जब बारिश की पहली बूंदें धरती पर गिरती हैं, तो हर किसी का मन मयूर नाच उठता है।

मौसम सुहाना हो जाता है और चाय-पकौड़ों की क्रेविंग बढ़ने लगती है।

लेकिन रुकिए! यह सुहाना मौसम अपने साथ बीमारियों की एक लंबी फौज भी लेकर आता है।

बारिश के दिनों में हवा में नमी (Moisture) बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।

यह नमी बैक्टीरिया, फंगस और वायरस के पनपने के लिए सबसे मुफीद माहौल तैयार करती है।

यही वजह है कि मानसून आते ही उल्टी, दस्त, पेट दर्द, फूड पॉइजनिंग और टाइफाइड जैसी बीमारियों के मामले अचानक से बढ़ जाते हैं।

इस मौसम में हमारी जरा सी भी लापरवाही पूरे परिवार को अस्पताल पहुंचा सकती है।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (FSSAI) ने मानसून फूड सेफ्टी गाइडलाइन जारी की है।

बारिश में थोड़ी सी सतर्कता और सही हाइजीन मेंटेन करके हम इन तमाम बीमारियों से कोसों दूर रह सकते हैं।

आइए FSSAI की इस गाइडलाइन को विस्तार से समझते हैं।

आखिर बारिश में क्यों बढ़ जाता है इन्फेक्शन का खतरा?

मानसून के दौरान हमारे आसपास का वातावरण पूरी तरह बदल जाता है, जो बीमारियों को न्योता देता है।

इसके पीछे मुख्य रूप से 5 कारण जिम्मेदार हैं:

  1. जलभराव (Water Logging): बारिश का पानी जगह-जगह इकट्ठा हो जाता है। यह ठहरा हुआ पानी डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छरों का ब्रीडिंग ग्राउंड (पनपने की जगह) बन जाता है।
  2. हवा में नमी: उमस और नमी के कारण खाने-पीने की चीजों में कीटाणु बहुत तेजी से मल्टीप्लाई होते हैं।
  3. दूषित पानी और भोजन: बारिश का पानी अक्सर सीवर, गंदगी और कचरे के संपर्क में आकर हमारे वॉटर सोर्स को गंदा कर देता है। यही पानी जब खाने या पीने में इस्तेमाल होता है, तो संक्रमण फैलता है।
  4. धूप की कमी: मानसून में कई दिनों तक धूप नहीं निकलती। धूप न होने के कारण वातावरण में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस लंबे समय तक जिंदा रहते हैं।
  5. कमजोर इम्यूनिटी: तापमान में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव की वजह से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर हो जाती है, जिससे हम जल्दी बीमार पड़ते हैं।

FSSAI के अनुसार हाइजीन के 7 हाईजीन रूल्स

FSSAI ने मानसून में सुरक्षित रहने के लिए हाइजीन को 7 अलग-अलग हिस्सों में बांटा है।

अगर हम अपनी डेली लाइफ में इन बातों का ध्यान रखेंगे, तो मानसून का मजा दोगुना हो जाएगा।

1. किचन हाइजीन (Kitchen Hygiene)

रसोई घर हमारे स्वास्थ्य का केंद्र है। बारिश में किचन के प्लेटफॉर्म, सिंक और कोनों में नमी जमा हो जाती है।

  • किचन के प्लेटफॉर्म, स्लैब और गैस स्टोव को रोजाना अच्छे सैनिटाइजर या एंटी-बैक्टीरियल लिक्विड से साफ करें।
  • सिंक और ड्रेन (नाली) की सफाई पर खास ध्यान दें, क्योंकि यहाँ बैक्टीरिया सबसे ज्यादा पनपते हैं। रात को सिंक को हमेशा सुखाकर सोएं।
  • अपने फ्रिज की रेगुलर सफाई करें और हर दो हफ्ते में इसे डिफ्रॉस्ट करना न भूलें।

2. फूड हाइजीन (Food Hygiene)

इस मौसम में खाना बहुत जल्दी दूषित हो जाता है, जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा रहता है।

  • बाजार से लाई गई फल और सब्जियों को साफ पानी से अच्छी तरह धोएं।
  • पके हुए भोजन को कभी भी 2 घंटे से ज्यादा कमरे के तापमान (बाहर) पर न छोड़ेंअगर खाना बच गया है, तो उसे तुरंत फ्रिज में एयरटाइट कंटेनर में रखें।
  • कच्ची सब्जियों, कच्चे मांस और पके हुए भोजन को फ्रिज में अलग-अलग रखें ताकि क्रॉस-कंटैमिनेशन (एक का बैक्टीरिया दूसरे में जाना) न हो।
  • लंबे समय से कटे हुए फल या सलाद खाने से बिल्कुल बचें।

3. कुकिंग हाइजीन (Cooking Hygiene)

खाना बनाते समय की जाने वाली गलतियां पूरे परिवार को बीमार कर सकती हैं।

  • खाना पकाने की शुरुआत करने से पहले अपने हाथों को साबुन से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोएं।
  • सब्जी काटने के लिए इस्तेमाल होने वाले चॉपिंग बोर्ड और चाकुओं को हमेशा साफ रखें। हो सके तो वेज और नॉन-वेज के लिए अलग बोर्ड रखें।
  • सबसे जरूरी बात: खाना बनाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। मोबाइल स्क्रीन पर लाखों बैक्टीरिया होते हैं, जो खाने के जरिए आपके पेट में जा सकते हैं।

4. वॉटर हाइजीन (Water Hygiene)

मानसून में सबसे ज्यादा बीमारियां दूषित पानी की वजह से होती हैं, जैसे पीलिया, डायरिया और टाइफाइड।

  • इस मौसम में केवल फिल्टर किया हुआ या फिर अच्छी तरह उबला हुआ पानी ही पिएं। पानी को उबालने के बाद उसे ठंडा करके साफ बर्तन में ढककर रखें।
  • घर की पानी की टंकियों और वाटर फिल्टर की सर्विसिंग व सफाई समय पर करवाएं।

5. होम हाइजीन (Home Hygiene)

घर में सीलन और नमी की वजह से फंगस (फफूंद) लग जाती है, जो सांस की बीमारियों और एलर्जी का कारण बनती है।

  • बाथरूम और टॉयलेट को हमेशा साफ और सूखा रखने की कोशिश करें।
  • घर के किसी भी कोने, गमलों या कूलर में पानी जमा न होने दें।

6. पर्सनल हाइजीन (Personal Hygiene)

खुद को साफ रखना ही बीमारियों से बचने की पहली सीढ़ी है।

  • बाहर से आने के बाद अपने हाथ-पैर अच्छे से धोएं। दिन में कई बार हाथ धोने की आदत डालें।
  • बारिश में भीगने के बाद तुरंत नहाएं और खुद को सुखाकर साफ व सूखे कपड़े पहनें। गीले कपड़े या मोजे पहनने से फंगल इंफेक्शन हो सकता है।

7. बच्चों के लिए स्पेशल हाइजीन (Child Safety Tips)

  • बच्चों की इम्यूनिटी बड़ों के मुकाबले बहुत कमजोर होती है, इसलिए वे मानसून की बीमारियों की चपेट में जल्दी आते हैं।
  • बच्चों को आदत डालें कि वे खाना खाने से पहले और खेल कर आने के बाद साबुन से हाथ जरूर धोएं।
  • बच्चों के नाखून समय-समय पर काटते रहें, क्योंकि नाखूनों की गंदगी में बैक्टीरिया छिपे होते हैं।
  • बच्चों को स्ट्रीट फूड, खुला हुआ खाना या रोड साइड मिलने वाली बर्फ-गोला और चाट जैसी चीजों से पूरी तरह दूर रखें।

आखिर में मानसून का मौसम खुशियां और हरियाली लेकर आता है, लेकिन यह हमारी सेहत की परीक्षा भी लेता है।

FSSAI द्वारा बताई गई ये गाइडलाइंस कोई कड़े नियम नहीं हैं, बल्कि ये हमारी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें हैं।

थोड़ा सा सतर्क रहकर, साफ-सफाई का ध्यान रखकर और ताजा भोजन अपनाकर हम मानसून का पूरा लुत्फ उठा सकते हैं और अपने परिवार को डॉक्टर की दवाइयों और अस्पताल के चक्करों से बचा सकते हैं।

इस बार की बारिश में सेहत का हाथ थामें और सुरक्षित रहें!

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