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कॉलेज में अनचाही प्रेग्नेंसी और बिन ब्याही मांओं पर भड़कीं आनंदीबेन पटेल, कहा- ‘सरकार पर आ जाती है जिम्मेदारी’

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Anandiben Patel on student pregnancy: UP की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने AKTU दीक्षांत समारोह के दौरान युवाओं की जीवनशैली और उनके फैसलों पर गहरी चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में पढ़ाई के दौरान ही कई लड़कियां प्रेग्नेंट हो जाती हैं और कुछ को तो बच्चा भी हो जाता है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “उस बच्चे की जिम्मेदारी जानते हैं किस पर जाती है? सरकार पर जाती है।”

राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं को सख्त लहजे में नसीहत देते हुए कहा, “ऐसा पराक्रम आप लोग मत करिए। दूर रहिए इन पराक्रमों से।”

उन्होंने आगे जोड़ा कि कभी-कभी लड़के-लड़कियां घर से भाग जाते हैं।

उनके इस कदम का नतीजा यह होता है कि बच्चे हो जाते हैं।

बाद में न तो वे लड़के-लड़कियां उस बच्चे को अपनाते हैं और न ही उनके परिवार वाले।

अंत में उन मासूमों का बोझ सरकार को उठाना पड़ता है।

लव मैरिज का विरोध नहीं, लेकिन पहले करियर और आत्मनिर्भरता जरूरी’

भाषण के दौरान राज्यपाल ने यह साफ किया कि वे प्रेम विवाह (Love Marriage) के खिलाफ नहीं हैं।

उन्होंने कहा, “आप करिए लव मैरिज। आपको उनसे प्रेम है, उनको आपसे प्रेम है तो शादी करिए। लेकिन शादी तभी करिए जब आप आत्मनिर्भर हो जाएं।”

इस दौरान उन्होंने अपने बेटे का उदाहरण भी साझा किया।

उन्होंने बताया, “मेरा बेटा जब बेंगलुरु पढ़ने गया था, तो मैंने उससे साफ कह दिया था कि अगर वहां की कोई बेटी पसंद आए तो बता देना, हम शादी करा देंगे। लेकिन उसे कोई पसंद ही नहीं आई।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय में महिलाओं की जो दशा हो रही है, वह सही नहीं है। पढ़ाई छूट जाती है और असमय जिम्मेदारियां सिर पर आ जाती हैं।

सरकारी टीचर्स को नसीहत और हॉस्टलों की बदहाली पर गुस्सा

समारोह में मेडल पाने वाले कुल 83 छात्रों में से 49 प्राइवेट कॉलेजों के थे।

इस पर चिंता जताते हुए राज्यपाल ने सरकारी प्रोफेसरों से कहा कि वे मेहनत करें और बच्चों को सही ढंग से सिखाएं ताकि सरकारी कॉलेजों का स्तर सुधरे।

इसके अलावा, राज्यपाल ने यूनिवर्सिटी के निर्माण विभाग और हॉस्टलों की कमियों को जमकर उजागर किया।

उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए निम्नलिखित बातें कहीं:

भवन निर्माण में लापरवाही: कई यूनिवर्सिटी में एडमिन ब्लॉक और लाइब्रेरी इतनी दूर बना दिए गए हैं कि बच्चों को 1 से 2 किलोमीटर दूर चलकर जाना पड़ता है।

क्या सरकार के बजट को सिर्फ खर्च करने के लिए ही कहीं भी बिल्डिंग बना दी जाएगी?

कभी-कभी लगता है कि निर्माण विभाग वाले फर्जी डिग्री लेकर भर्ती हो गए हैं।

हॉस्टल और क्लासरूम की खराब डिजाइन: हॉस्टल के टॉप फ्लोर पर पंखे इस तरह लगे हैं कि सिर टकरा जाए। कमरे में खिड़कियां नहीं हैं, अलमारी खोलो तो चूहा निकलता है।

200 बच्चों के हॉस्टल में बर्तन धोने के लिए घरों जितना छोटा वाशिंग एरिया दिया गया है।

टंकी में बंदर और छत पर पौधे: गर्ल्स हॉस्टल की तीसरी मंजिल पर रखी पानी की टंकी पर ढक्कन तक नहीं है, उसमें बंदर नहाते हैं।

क्लासरूम में ब्लैकबोर्ड इतनी ऊंचाई पर हैं कि बच्चे वहां तक पहुंच ही नहीं सकते।

छतों पर एक-एक फुट के पौधे उग आए थे, जिसे राज्यपाल को अपने पीएसओ (PSO) से उखड़वाना पड़ा।

बहरहाल राज्यपाल का यह बयान अब काफी सुर्खियां बटोर रहा है।

इससे पहले भी वो कई मौकों पर वह लिव इन रिलेशनशिप और लव मैरिज पर सवाल उठा चुकी हैं।

अब देखना है कि इस बयान के बाद यूपी और देश की राजनीति में कौन सी हलचल होती है।

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