MP Monsoon Update: मध्य प्रदेश के लोगों के लिए राहत की खबर है।
लगभग 9 दिनों के सूखे और उमस भरे मौसम के बाद सूबे में मानसून एक बार फिर पूरी तरह एक्टिव हो गया है।
शुक्रवार को बालाघाट, उमरिया और डिंडौरी जैसे जिलों में झमाझम बारिश के साथ मानसून ने धमाकेदार वापसी की है।
मौसम विभाग (IMD) ने बालाघाट और डिंडौरी में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जबकि प्रदेश के 31 अन्य जिलों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की उम्मीद जताई है।

आखिर क्यों दोबारा सक्रिय हुआ मानसून?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय मौसम में एक साथ कई बड़े बदलाव हो रहे हैं:
* लो प्रेशर एरिया: बंगाल की खाड़ी में हवा का एक कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) बन रहा है।
* साइक्लोनिक सर्कुलेशन: मध्य प्रदेश के ऊपर इस समय तीन चक्रवाती सिस्टम (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) एक्टिव हैं।
* वेस्टर्न डिस्टरबेंस: आगामी 19 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय होने जा रहा है।
इन तीनों मौसमी सिस्टम के एक साथ मिलने से आने वाले दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश का नया दौर शुरू होने की पूरी संभावना है।

देश के 60% हिस्से पर फिर छाए बादल: यूपी-बिहार में भारी बारिश की चेतावनी
सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के करीब 50 से 60 प्रतिशत हिस्से में मानसूनी बादल एक बार फिर से मंडराने लगे हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम की वजह से उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में अगले 7 दिनों तक मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
इसके अलावा, भूमध्य रेखा (इक्वेटर) के पास भी एक नया वेदर सिस्टम सक्रिय हो रहा है।
इसके प्रभाव से 20 से 30 जुलाई के बीच मध्य भारत और उत्तर भारत में बारिश की गतिविधियां और तेज हो जाएंगी।

जम्मू-कश्मीर में 15 दिनों में 16 बार फटा बादल
एक तरफ जहां मैदानी इलाकों में लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं, वहीं पहाड़ी राज्य जम्मू-कश्मीर में मानसून आफत बनकर आया है।
जुलाई के पहले हफ्ते में मानसून की एंट्री के बाद से यहां महज 15 दिनों के भीतर 16 बार बादल फटने की घटनाएं हो चुकी हैं।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

दूसरी तरफ, देश के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में अल नीनो के प्रभाव के कारण सूखे जैसे हालात हैं और वहां हीटवेव (लू) का अलर्ट जारी किया गया है।
MP में अब तक 13% कम बरसा पानी: कृषि और जल संकट की बढ़ी चिंता
9 दिनों तक बारिश थमने की वजह से मध्य प्रदेश में पानी की कुल कमी का आंकड़ा बढ़ गया है।
चालू सीजन में अब तक प्रदेश में औसतन 243.3 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो कि सामान्य औसत (281.3 मिमी) से लगभग 13% कम है।
अगर हम क्षेत्रवार बात करें, तो:
* पूर्वी मध्य प्रदेश: यहां सामान्य से 26% कम बारिश हुई है, जिससे किसान बेहद चिंतित हैं।
* पश्चिमी मध्य प्रदेश: यहाँ स्थिति थोड़ी बेहतर है, लेकिन फिर भी सामान्य से 2% कम पानी गिरा है।

आज आपके जिले में कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विभाग ने आज के लिए जिलों को दो श्रेणियों में बांटा है:
बारिश का अलर्ट (31+ जिले) | उमस और गर्मी का असर (17 जिले)
बालाघाट, डिंडौरी (भारी बारिश); इंदौर, धार, बड़वानी, आलीराजपुर, खरगोन, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल, नर्मदापुरम, रायसेन, सागर, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, भिंड, दतिया, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, जबलपुर, सिवनी, मंडला, अनूपपुर और उमरिया।
भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम और झाबुआ।
मौसम एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि बंगाल की खाड़ी से उठने वाला सिस्टम मजबूत रहा, तो जुलाई के आखिरी पखवाड़े में पानी की यह कमी दूर हो सकती है और फसलों को नया जीवन मिल जाएगा।
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