Ladli Bahna Yojna MP: मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लाड़ली बहना योजना’ को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है।
पिछले ढाई वर्षों के भीतर इस योजना से करीब साढ़े पांच लाख से अधिक महिलाओं के नाम हटा दिए गए हैं।
योजना की शुरुआत में जहाँ लाभार्थियों की संख्या काफी अधिक थी, वहीं अब इसमें केवल 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार पात्र महिलाएं ही बची हैं।
आइए जानते है आखिर इतने बड़े पैमाने पर महिलाओं के नाम योजना से बाहर क्यों हो रहे हैं और इसके पीछे क्या-क्या कानूनी व तकनीकी कारण हैं।

क्यों कट रहे हैं महिलाओं के नाम?
फिलहाल इस योजना में नए आवेदन (रजिस्ट्रेशन) जमा नहीं किए जा रहे हैं।
इसका सीधा मतलब यह है कि नए नाम नहीं जुड़ रहे हैं, जबकि पुरानी शर्तें पूरी न होने के कारण लगातार नाम छांटे जा रहे हैं।
इंदौर जिले का उदाहरण लें तो शुरुआत में यहाँ 4.57 लाख से अधिक महिलाओं ने आवेदन किया था, लेकिन अब केवल 4.38 लाख महिलाओं के खातों में ही हर महीने आर्थिक सहायता भेजी जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जो महिलाएं तय मापदंडों से बाहर हो रही हैं, नियम के मुताबिक केवल उन्हीं के नाम हटाए जा रहे हैं।

नाम कटने की प्रमुख वजहें इस प्रकार हैं:
* 60 वर्ष की आयु सीमा: योजना के नियमानुसार 60 वर्ष की आयु पूरी होते ही महिलाएं इससे स्वतः बाहर हो जाती हैं। इंदौर में ही पिछले साढ़े तीन वर्षों में इस वजह से 14 हजार से अधिक नाम कम हुए हैं।
* निधन: लाभार्थी महिला की मृत्यु हो जाने पर नाम सूची से हटा दिया जाता है।
* स्वैच्छिक त्याग: कई महिलाओं ने स्वयं ही इस योजना का लाभ लेना छोड़ दिया है।
* डाटा की समस्या: समग्र आईडी, आधार कार्ड का लिंक न होना या डाटा आपस में मैच न करने के कारण भी हजारों महिलाओं के नाम कटे हैं।
* जांच में अपात्रता: सरकारी पड़ताल के दौरान शर्तें पूरी न करने वाली महिलाएं बाहर पाई गईं।

विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) का तकनीकी पेंच
इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा राज्य की विशेष पिछड़ी जनजातियों—सहरिया, बैगा और भारिया समुदाय की महिलाओं को लेकर हो रही है।
इस वर्ग की लगभग पांच लाख बहनें लाड़ली बहना योजना का लाभ नहीं ले पा रही हैं।
विवाद की मुख्य वजह क्या है?
मध्य प्रदेश में इन तीन जनजातियों में कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए वर्ष 2017 से ‘आहार अनुदान योजना’ चलाई जा रही है।
इसके तहत परिवार की मुख्य महिला को हर महीने 1,500 रुपये की सहायता राशि दी जाती है।

लाड़ली बहना योजना 2023 के पात्रता नियमों (पैरा 4.4) में स्पष्ट लिखा है कि यदि किसी महिला या उसके परिवार के सदस्य को किसी अन्य सरकारी योजना से 1,500 रुपये या उससे अधिक की मदद मिल रही है, तो वह लाड़ली बहना योजना के लिए पात्र नहीं होगी।
चूंकि इन महिलाओं को पहले से ही 1,500 रुपये आहार अनुदान के रूप में मिल रहे हैं, इसीलिए तकनीकी नियमों के चलते वे लाड़ली बहना योजना के दायरे से बाहर हो गईं।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने भी इस बात की पुष्टि की है कि यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होता है।

योजना की शुरुआत और अब तक का सफर
इस योजना की घोषणा 4 मार्च 2023 को मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी।
उन्होंने बताया था कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनके मान-सम्मान को बढ़ाने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई थी।
* शुरुआती राशि: शुरुआत में महिलाओं को 1,000 रुपये प्रति माह दिए जाते थे।
* बढ़ोतरी: बाद में इसे बढ़ाकर 1,250 रुपये किया गया और फिर नवंबर 2025 से यह राशि बढ़ाकर 1,500 रुपये प्रति माह कर दी गई।
* कुल बजट: जून 2023 से जून 2026 के बीच सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए महिलाओं के खातों में 56 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि भेज चुकी है।
* वर्तमान स्थिति: वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने इस योजना हेतु 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट रखा है।

नए नाम कब जुड़ेंगे?
राशि में बढ़ोतरी होने से वर्तमान लाभार्थियों को फायदा जरूर मिला है, लेकिन पेंशन या किसान सम्मान निधि जैसी अन्य सरकारी योजनाओं की तरह इसमें नए पंजीयन शुरू नहीं हो पाए हैं।
इस वजह से प्रदेश की हजारों ऐसी पात्र महिलाएं, जो योजना की सभी शर्तें पूरी करती हैं, वे अब भी नए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रही हैं।
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