Rahul kharge letter on Caste Census: देश में होने वाली आगामी जाति जनगणना 2027 को लेकर सियासत और नीतियों पर बहस तेज हो गई है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है।
इस लेटर में उन्होंने सरकार द्वारा जारी किए गए जनगणना के सवालों पर गहरी चिंता जताई है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जिस तरह से जनगणना में जाति से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं, उससे देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की सटीक तस्वीर सामने नहीं आ पाएगी।
राहुल और खड़गे ने मांग की है कि जनगणना के सवालों को अंतिम रूप देने से पहले राजनीतिक दलों, सामाजिक विशेषज्ञों और आम जनता से सलाह-मशविरा किया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं की 4 मुख्य आपत्तियां और सुझाव
पत्र में मुख्य रूप से चार बड़ी बातों पर ध्यान दिलाया गया है:
* एक जाति के कई नाम दर्ज होने का खतरा:
पत्र में कहा गया है कि अगर लोगों से सीधे उनकी जाति का नाम पूछा जाएगा, तो एक ही जाति को लोग अलग-अलग स्थानीय नामों या उप-जातियों के रूप में लिखवा सकते हैं।
इससे जातियों की असली संख्या गिनना और डेटा का मिलान करना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
* OBC वर्ग की गिनती पर असर:
कांग्रेस ने आपत्ति जताई है कि सवालों के फॉर्मैट में ‘पिछड़ा वर्ग’ (OBC) शब्द स्पष्ट रूप से शामिल नहीं है।
अगर एक ही जाति कई अलग-अलग नामों से दर्ज हो गई, तो देश में पिछड़ा, अति-पिछड़ा और वंचित समुदायों का सही आंकड़ा सामने नहीं आ पाएगा।

इसका सीधा नुकसान इन वर्गों के लिए बनने वाली सरकारी योजनाओं और बजट आवंटन पर पड़ेगा।
* समान प्रक्रिया और ड्रॉप-डाउन सूची की मांग:
नेताओं का सुझाव है कि पूरे देश में जातियों की पहचान दर्ज करने का एक तय और एक समान तरीका होना चाहिए।
इसके लिए फॉर्म में एक तय सूची या ‘ड्रॉप-डाउन’ विकल्प दिया जाना चाहिए ताकि लोग अपनी सही श्रेणी चुन सकें।
* बिहार और तेलंगाना मॉडल अपनाने की सलाह:
पत्र में कहा गया है कि केंद्र सरकार को सरकारी जाति सूचियों और ‘एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया’ (भारतीय मानवशास्त्र सर्वेक्षण) के डेटा का सहारा लेना चाहिए।
तेलंगाना और बिहार में हुए हालिया जाति सर्वेक्षणों में इसी तरह की सूचियों का इस्तेमाल किया गया था, जिससे आंकड़े काफी सटीक आए थे।

जनगणना 2027 में क्या खास होगा?
14 अगस्त को जारी हुई थी 40 सवालों की सूची:
सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 40 प्रश्नों का एक फॉर्म तैयार किया है।
इसमें सवाल नंबर 10 पर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) के साथ-साथ अन्य जातियों की जानकारी मांगी गई है।
आजादी के बाद यह पहला मौका होगा जब देश के सभी समुदायों की जाति का डेटा जनगणना में दर्ज किया जाएगा।
इससे पहले 2011 की जनगणना में कुल 29 सवाल थे और जाति वाले कॉलम में सिर्फ SC/ST का ही विकल्प मौजूद था।

वैक्सीन से लेकर आधार-बैंक अकाउंट तक के सवाल:
इस बार जनगणना में केवल आबादी ही नहीं, बल्कि कई अन्य जानकारियां भी जुटाई जाएंगी।
लोगों से पूछा जाएगा कि उन्होंने कोविड-19 की वैक्सीन कहां से लगवाई थी।
इसके अलावा मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी और बैंक अकाउंट से जुड़े सवाल भी फॉर्म में शामिल किए गए हैं।

देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना
* डिजिटल माध्यम: यह भारत के इतिहास की पहली डिजिटल जनगणना होगी। पूरा डेटा डिजिटल डिवाइस के जरिए दर्ज किया जाएगा।
* खुद जानकारी देने की सुविधा: नागरिकों को ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ (खुद से फॉर्म भरने) की सुविधा भी मिलेगी।
* गोपनीयता की गारंटी: सरकार के अनुसार, सेंसस एक्ट 1948 की धारा 15 के तहत लोगों का व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रहेगा।
इसे न तो सार्वजनिक किया जा सकता है, ना ही RTI के तहत मांगा जा सकता है और न ही किसी अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया जा सकता है।

बजट और प्रशासनिक तैयारी
केंद्र सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है।
यह जनगणना केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में होगी, जबकि इसे जमीन पर लागू करने का काम सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन द्वारा किया जाएगा।
आपको बता दें कि यह जनगणना पहले 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे टालना पड़ा था।
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