Yasin Malik demands death penalty: तिहाड़ जेल में बंद प्रतिबंधित संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख मोहम्मद यासीन मलिक ने एक बेहद चौंकाने वाला फैसला लिया है।
कश्मीरी पंडित महिला सरला भट की हत्या के मामले में यासीन मलिक ने अदालत के सामने खुद के लिए फांसी की सजा की मांग की है।
60 वर्षीय मलिक ने 25 पन्नों का एक हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें उन्होंने साफ कहा है कि वह अब इस केस में अपना बचाव नहीं करेंगे और खुद के लिए मौत की सजा चाहते हैं।

सरला भट केस में मुझे फंसाया गया
हालाँकि, हलफनामे में मलिक ने सरला भट की हत्या में अपनी किसी भी भूमिका से पूरी तरह इनकार किया है और खुद को पूरी तरह बेगुनाह बताया है।
उनका कहना है कि दशकों पुराने इस मामले में उन्हें झूठा फंसाया जा रहा है और पुलिस की यह जांच एक असली कार्रवाई होने के बजाय पूरी तरह से मनगढ़ंत कहानी लगती है।

SIA की चार्जशीट के बाद आया हलफनामा
यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी (SIA) ने इसी साल 29 जून को सरला भट हत्या मामले में अदालत में अपनी चार्जशीट दाखिल की।
1990 के दशक के इस चर्चित मामले में अचानक नई चार्जशीट आने पर यासीन मलिक ने कानूनी लड़ाई लड़ने के बजाय मौत की सजा स्वीकार करने की बात कही है।

पत्नी को तलाक देने का फैसला, बेटी के लिए भावुक संदेश
हलफनामे का सबसे भावुक और चौंकाने वाला हिस्सा यासीन मलिक के निजी जीवन से जुड़ा है।
उन्होंने अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक के साथ अपना निकाह (शादी) खत्म करने का फैसला किया है।
मलिक ने हलफनामे में अपनी पत्नी के नाम लिखे संदेश में कहा, “फांसी पर चढ़ने से पहले, मैंने तुम्हें हमारे निकाह के बंधन से आजाद करने का फैसला किया है। मैं नहीं चाहता कि तुम अपनी बाकी बची जिंदगी मेरे हालात का बोझ सहते हुए और एक विधवा के रूप में बिताओ।”

उन्होंने इसका कारण अपनी लंबी कैद और पिछले 8 सालों से परिवार से कोई बातचीत या संपर्क न हो पाना बताया है।
यासीन का कहना है कि तिहाड़ जेल में उन्हें न तो कोई फोन कॉल करने की इजाजत दी गई और न ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात करने की सहूलियत मिली।

अपनी बेटी रजिया सुल्ताना का जिक्र करते हुए मलिक ने लिखा कि तिहाड़ की ‘डेथ सेल’ (मौत की कोठरी) में उनके पास सिर्फ उनकी बेटी की तस्वीर है, जिससे उन्हें हर वक्त उसके पास होने का एहसास होता है।
उन्होंने बेटी को हिदायत दी कि वह रोज कम से कम 5 मिनट अपने दादा-दादी से बात जरूर किया करे।

हलफनामे में यासीन मलिक के 5 बड़े दावे
यासीन मलिक ने अपने 25 पन्नों के दस्तावेज में जांच एजेंसियों और पुरानी पुलिस कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
* 30 साल बाद आरोप क्यों?
मलिक के मुताबिक, SIA के अधिकारी चार्जशीट दाखिल करने से पहले जेल में उनसे मिले थे और केवल दो बातों पर सवाल किए।
पहला JKLF का वह कथित नोट जिसमें हत्या की जिम्मेदारी ली गई थी और दूसरा यह आरोप कि सरला भट सुरक्षा बलों को मलिक के ठिकाने की जानकारी दे रही थीं।

मलिक का सवाल है कि अगर ऐसा नोट मौके से मिला था, तो 30 साल तक उन पर या अन्य आरोपियों पर केस क्यों नहीं चला?
* पूर्व गवर्नर जगमोहन का जिक्र
मलिक ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन गवर्नर जगमोहन को कश्मीरी पंडितों का रक्षक माना जाता था, लेकिन उन्होंने भी कभी अपने बयानों में मलिक को सरला भट या कश्मीरी पंडितों की हत्या के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया।
* पुराने मामलों में नाम नहीं था
अगस्त 1990 में जब मलिक को गिरफ्तार किया गया था, तब उन पर टाडा (TADA) के तहत दर्जनों मामले दर्ज हुए थे।
लेकिन उस समय की पुलिस एफआईआर या जांच में सरला भट केस का कहीं जिक्र नहीं था।

* घटना के समय कोमा में होने का दावा
मलिक ने हलफनामे में तर्क दिया कि अप्रैल 1990 में नरवारा में बीएसएफ (BSF) की एक छापेमारी के दौरान इमारत से गिरने के कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे और कोमा में चले गए थे।
उस समय दूरदर्शन समेत कई समाचार चैनलों ने उनके मारे जाने तक की खबर चला दी थी।

मलिक का कहना है कि जो इंसान जिंदगी और मौत से जूझ रहा था और बेहोश था, वह किसी हत्या का आदेश या साजिश कैसे रच सकता है?
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